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  • YOGA SESSION 7 JUNE 2021 TADASANA TIRYAK TADASANA BUTTERFLY ASAN BGYS

Yoga Session: लटका हुआ पेट आएगा शेप में, बॉडी बनेगी फ्लेक्सिबल, करें ये योग

सविता यादव से योग सीखें

Yoga Session: वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों को न सिर्फ पीठ, कमर और गर्दन में दर्द महसूस होता है बल्कि उनके पेट की चर्बी भी घंटों बैठकर काम करने के कारण बढ़ने लगती है. ऐसे में आपको कुछ खास योगासनों को करने की जरूरत है.

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Yoga Session: योगाभ्यास (Yoga) करते वक्त लय, गति और संतुलन का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है. इसके अलावा अपनी क्षमता का भी जरूर ध्यान रखें. आज हमें कई तरह के अभ्यास दिखाए और सिखाए गए. लाइव सेशन में आज ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, उदर शक्ति विकासक क्रिया, चक्की चलनासन और बटरफ्लाई आसन सहित कई अन्य व्यायाम सिखाए गए. इन आसनों को करने से बॉडी शेप में रहती है और शरीर लचीला रहता है. लेकिन इस बात का ख्याल रखें कि हर अभ्यास अपनी क्षमता अनुसार ही करें. किसी भी योग को करने के लिए अपने शरीर पर जबरन फोर्स न डालें. अपने शरीर को स्वस्थ (Healthy) रखने के लिए खुद से संकल्प लेना जरूरी है. खासकर वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों को न सिर्फ पीठ, कमर और गर्दन में दर्द महसूस होता है बल्कि उनके पेट की चर्बी भी घंटों बैठकर काम करने के कारण बढ़ने लगती है. ऐसे में आपको कुछ खास योगासनों को करने की जरूरत है.



ताड़ासन: सबसे पहले आप खड़े हो जाएं और अपने कमर और गर्दन को सीधा रखें. अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे धीरे पूरे शरीर को खींचें. खिंचाव को पैर की उंगली से लेकर हाथ की उंगलियों तक महसूस करें. इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाए रखें ओर सांस ले सांस छोड़ें. फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ और शरीर को पहली अवस्था में लेकर आएं. इस तरह से एक चक्र पूरा होता है. ताड़ासन योग पूरे शरीर को लचीला बनाता है. यह एक ऐसा योगासन है जो मांसपेशियों में काफी हद तक लचीलापन लाता है. यह शरीर को हल्का करता है और आराम देता है. इसके अलावा शरीर को सुडौल और खूबसूरती भी प्रदान करता है. शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघालता है और आपके पर्सनैलिटी में नई निखार लेकर आता है.



तिर्यक ताड़ासन: तिर्यक ताड़ासन करने से कमर की चर्बी करे कम होती है और कब्ज दूर होता है. तिर्यक ताड़ासन करके पेट की कई दिक्‍कतों से छुटकारा पाया जा सकता है. कब्ज, कमर के पास जमी चर्बी और शरीर को लचीला बनाने के लिए तिर्यक ताड़ासन बहुत फायदा देता है.

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उदर शक्ति विकासक क्रिया: उदर शक्ति विकासक क्रिया से पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिलता है. साथ ही पेट की चर्बी कम होती है. जिन लोगों को पाचन से संबंधित समस्याएं हों वे इस आसन से अपनी पाचन शक्ति बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा इसे नियमित तौर पर करने से पेट की चर्बी कम होती है. साथ ही कब्ज में भी इस क्रिया से लाभ मिलता है. हालांकि हाई ब्‍लल प्रेशर, हर्निया और गर्भवती महिलाओं को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए.

चक्की चलनासन: दरी या मैट बिछाकर बैठ जाएं. बैठने के बाद अपने दोनों पैरों को बिल्‍कुल सामने की ओर फैला लें. हालांकि चक्‍की बैठकर चलाई जाती थी पर इसमें आपको पैरों के बल नहीं बल्कि कूल्‍हों को जमीन पर टिका कर आराम से बैठना है. बैठने के बाद दोनों हाथों को जोड़कर पैरों के पास तक यानी अपने सामने लाएं. दोनों हाथों को जोड़े हुए ही इसे क्‍लॉक वाइज घुमाना शुरू करें, जिस तरह चक्‍की चलाई जाती है. इसी तरह एंटी क्‍लॉक वाइज घुमाएं. शुरुआत में आप इसे 10 मिनट कर सकते हैं. बैली फैट घटाने में मदद मिलती है. लटके हुए पेट को वापस शेप में लाने के लिए यह आसन बहुत फायदेमंद है. इससे कमर को लचीला बनाने में भी मदद मिलती है.

बटरफ्लाई आसन: बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं. दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें. सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं. एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें. लंबी,गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों एवं जांघो को जमीन की तरफ दबाव डालें. तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें. धीरे धीरे तेज करें. सांसें लें और सांसे छोड़ें. शुरुआत में इसे जितना हो सके उतना ही करें. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.
कपालभारती: कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं.
Published by:Bhagya Shri Singh
First published: