तिर्यक भुजंगासन और शशकासन से रिलैक्स होगी बॉडी, सीखें योग सविता यादव से

सीखें योग सविता यादव से

सीखें योग सविता यादव से

Yoga Session By Savita Yadav-योग एक्सपर्ट सविता यादव ने आज बॉडी को रिलैक्स करने वाले कई योगासनों के बारे में बताया गया. इसके आलावा कुछ प्राणायाम भी बताए गए जो कमर दर्द में आराम तो दिलाते हैं...

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 8, 2021, 11:02 AM IST
  • Share this:
Yoga Session By Savita Yadav- लाइव योग सेशन (Live Yoga Session) में योग एक्सपर्ट सविता यादव ने आज बॉडी को रिलैक्स करने वाले कई योगासनों के बारे में बताया गया. इसके आलावा कुछ प्राणायाम भी बताए गए जो कमर दर्द में आराम तो दिलाते ही हैं साथ ही बॉडी को फिट और हेल्दी रखने में मदद भी करते हैं. इन अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. सबसे पहले सांस भरते हुए दोनों हाथ को क्रॉस करते हुए ऊपर की तरफ करके तानें और नीचें की तरफ लाएं और सांस बाहर छोड़ें. इसके बाद सांस भरते हुए ॐ का उच्चारण करें. इसके बाद आंखें खोलें.

सुप्त ताड़ासन :
सबसे पहले मैट पर पीठ के बल लेट जाएं, दोनों पैरों को मिलाकर रखें, दोनों हाथों की हथेलियां जमीन से स्पर्श करें, इसके पश्चात लम्बा गहरा सांस फेफड़ो में भरें और दोनों हाथों को धीरे-धीरे सीधे उठाते हुए सिर के पीछे जमीन पर ले जाएं और भूमि पर दोनों हाथों के पिछले भाग को स्पर्श करें, कुछ समय ठहरने के बाद वापस दोनों हाथों को उठाते हुए वापस ले आएं और सांस छोड़ दें.

फायदे: 
इस अभ्यास से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन सोल्डर, वक्षस्थल, सोल्डरब्लेड, पीठ व पेट में चर्बी का बढ़ना व पीठ दर्द में आराम मिलेगा.



भुजंगासन:
भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है. इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है. ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है.

भुजंगासन के फायदे
-रीढ़ की हड्डी में मजबूती और लचीलापन
-पेट के निचले हिस्से में मौजूद सभी अंगों के काम करने की क्षमता बढ़ती है
-पाचन तंत्र, मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं और यौन शक्ति बढ़ती है
-मेटाबॉलिज्म सुधरता है और वजन कम करने में मदद मिलती है
-कमर का निचला हिस्सा मजबूत होता है
-फेफड़ों, कंधों, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छा खिंचाव मिलता है.



तिर्यक भुजंगासन:

पेट के बल लेटें और हाथों को कन्धों के पीछे फर्श पर रखें. पैर थोड़ी दूर हों और पंजे फर्श पर मुड़े हुए हों. ऐसाकरते हुए कूल्हों को फर्श की तरफ दबायें. धड़ को बाजुओं की सहायता से ऊपर उठायें. ऊपर देखें. धीरे-धीरे आसन करते हुए सिर को और धड़ को दाईं ओर घुमायें और दायें कंधे पर से बाईं एड़ी को देखें. ऐसा करते हुए पीठ को फिर बीच की ओर मोड़ें और ऊपर की ओर देखें. ऐसा करते हुए धीरे-धीरे शुरूआती स्थिति में वापस आ जाएं. ऐसा ही दूसरी तरफ भी करें.

मार्जरी आसन: मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है. कैट वॉक दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हम योग आसन वर्ग में कैट पोज के बारे में चर्चा करते हैं. यह आसन आपके शरीर के लिए अनके प्रकार से लाभदायक है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव देता है. इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है.

शशकासन: शशक का मतलब खरगोश. इस आसन में खरगोश की तरह बैठना होता है.
बसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को श्वास भरते हुए ऊपर उठा लें. कंधों को कानों से सटाएं. फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, श्वास बाहर निकालते हुए हथेलियां को भूमि पर टिका दें. फिर माथा भी भूमि पर टिका दें. कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर पुनः वज्रासन की स्थिति में आ जाइए. यदि आपके पेट और सिर में कोई गंभीर समस्या हो तो यह आसन नहीं करें.

फायदे: यह आसन पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करता है. इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव, क्रोध, चिड़चिड़ापन भी दूर हो जाते हैं.

उष्ट्रासन:
उष्ट्र से तात्पर्य ऊंट से है. इस आसन को करने ले लिएअपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें.
घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आसमान की तरफ हो.
सांस लेते हुए मेरुदंड को खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है.
गर्दन पर बिना दबाव डालें बैठे रहें
इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे.
सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं.
हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं.

अनुलोम विलोम प्राणायाम: सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे
-फेफड़े मजबूत होते हैं
-बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.
-वजन कम करने में मददगार
-पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाता है
-तनाव या डिप्रेशन को दूर करने के लिए मददगार
-गठिया के लिए भी फायदेमंद
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज