• Home
  • »
  • News
  • »
  • lifestyle
  • »
  • YOGA SESSION LEARN EXERCISE FOR BODY FLEXIBILITY CONSTIPATION PROBLEM BGYS

Yoga Session: बॉडी बनेगी लचीली, रेस्पिरेटरी सिस्टम होगा मजबूत करें ये एक्सरसाइज

निरोग बने रहने के लिए रोजाना करें योग...

Yoga Session: शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए भी योगासन अहम भूमिका निभाते हैं. आसनों को करने के बाद शरीर को आराम देने के लिए प्राणायाम जरूर करें. इससे शरीर की थकान दूर होती है. शरीर को संतुलित बनाए रखने के लिए प्राणायाम बहुत अच्‍छा आसन है.

  • Share this:
    Yoga Session: आज के लाइव योगा सेशन में कई तरह के योगाभ्‍यास सिखाए गए. कोरोना काल में इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी है. ताकि किसी भी तरह के इंफेक्‍शन से बचा जा सके. इसके लिए बहुत जरूरी है कि योगासन को अपने रूटीन में शामिल किया जाए. वहीं शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए भी योगासन अहम भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा घंटो बैठकर काम करने वाले लोगों को अक्सर कमर और पीठ दर्द की परेशानी होती है. वहीं बैठकर काम करने से पेट की चर्बी भी तेजी से बढ़ती है. ऐसे में आपको कुछ खास योगासनों का अभ्यास करना चाहिए. योग करने से शरीर स्वस्थ रहता है. वहीं आसनों को करने के बाद शरीर को आराम देने के लिए प्राणायाम जरूर करें. इससे शरीर की थकान दूर होती है. शरीर को संतुलित बनाए रखने के लिए प्राणायाम बहुत अच्‍छा आसन है.

    तितली आसन: तितली आसन/बटरफ्लाई आसन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है. बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं. दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें. सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं. एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें. लंबी,गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों एवं जांघो को जमीन की तरफ दबाव डालें. तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें. धीरे धीरे तेज करें. सांसें लें और सांसे छोड़ें. शुरुआत में इसे जितना हो सके उतना ही करें. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.



    मलासन: मल त्यागते वक्त हम जिस अवस्था में बैठते हैं उसे मलासन कहते हैं. बैठने की यह स्थति पेट और पीठ के लिए बहुत ही लाभदायक रहती है. इसे करने के लिए सबसे पहले दोनों घुटनों को मोड़ते हुए मल त्याग करने वाली अवस्था में बैठ जाएं. फिर दाएं हाथ की कांख को दाएं और बाएं हाथ की कांख को बाएं घुटने पर टिकाते हुए दोनों हाथ को मिला दें (नमस्कार मुद्रा). उक्त स्थिति में कुछ देर तक रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं. मलासन से घुटनों, जोड़ों, पीठ और पेट का तनाव खत्म होता है और इनका दर्द कम होता है. इससे कब्ज और गैस की समस्या से भी मुक्ति मिलती है.

    त्रिकोणासन: त्रिकोणासन करने के लिए दोनों पैरों के बीच लगभग डेड़ फुट का फासला रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं. दोनों हाथ कन्धों के बराबर पिछले भाग में खुले हुए हों. सांस अन्दर भरते हुए बायें हाथ को सामने लेते हुए बाएं पंजे के पास जमीन पर टिका दें, अथव हाथ को एड़ी के पास लगायें तथा हाथ को ऊपर की तरफ उठाकर गर्दन को दाईं तरफ घुमाते हुए दायें हाथ को देखें. फिर सांस छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आकर यही अभ्यास दूसरी तरफ भी दोहराएं. इस कमर के आसपास का हिस्सा लचीला बनता है. पिछले भाग की चर्बी कम होती है.

    भस्त्रिका : भस्त्रिका का अभ्‍यास कोरोना के समय में अपने लंग्‍स की कैपिसिटी को बढ़ाने के लिए करें. यह मुख्य रूप से डीप ब्रीदिंग है. इससे आपका रेस्पिरेटरी सिस्टम मजबूत होगा. भस्त्रिका प्राणायाम बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणायाम है. इससे तेजी से रक्त की शुद्धि होती है. साथ ही शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त का संचार तेज होता है.

    यह भी पढ़ें:  Yoga Session- रक्त संचार और ऑक्सीजन लेवल होगा अच्छा, करें ये एक्सरसाइज



    कपालभारती : कपालभारती से आपके जीवन में संतुलन आता है और तनाव को आप मैनेज कर पाते हैं. कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.

    अनुलोम विलोम प्राणायाम: पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.
    Published by:Bhagya Shri Singh
    First published: