Home /News /lifestyle /

वर्चुअल मीटिंग्स में कैमरा बना थकान का कारण- रिसर्च

वर्चुअल मीटिंग्स में कैमरा बना थकान का कारण- रिसर्च

रिसर्च के अनुसार ऑनलाइन मीटिंग में महिलाओं पर रहता है अतिरिक्त दबाव (प्रतीकात्मक तस्वीर- Shutterstock)

रिसर्च के अनुसार ऑनलाइन मीटिंग में महिलाओं पर रहता है अतिरिक्त दबाव (प्रतीकात्मक तस्वीर- Shutterstock)

Zoom Fatigue : वर्चुअल बैठकों में कैमरा ऑन रहने से 'जूम फटिग' बढ़ती है, मतलब व्यक्ति थका हुआ और कम एनर्जेटिक फील करता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :

    Fatigue In Virtual Meetings : कोरोना के दौर में ऑफिस जाना बंद हुआ तो वर्चुअल मीटिंग्स (Virtual Meetings) का चलन बढ़ गया. शुरुआत में इससे लोगों में खासी खुशी नजर आई थी क्योंकि एक तो आप वायरस के खतरे के बीच बाहर निकलने से बच गए, दूसरा आपकी जॉब भी जारी है लेकिन लंबे समय तक चले आ रहे ऑनलाइन काम और वर्चुअल मीटिंग से लोग थकान महसूस करने लगे हैं. दैनिक जागरण में छपी ख़बर के मुताबिक एक रिसर्च में पाया गया है कि वर्चुअल बैठकों में कैमरा ऑन रहने से ‘जूम फटिग (Zoom Fatigue)’ बढ़ती है, मतलब व्यक्ति थका हुआ और कम एनर्जेटिक फील करता है और अगर उन वर्चुअल मीटिंग्स के दौरान कैमरा बंद रखा जाए, तो थकाम कम महसूस होती है. ख़बर के मुताबिक यह निष्कर्ष जर्नल ऑफ अप्लाइड साइकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है.

    सेल्फ प्रजेंटेशन अतिरिक्त दबाव
    यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के मैनेजमेंट कॉलेज (University of Arizona’s College of Management) की प्रोफेसर और रिसर्चर एलीसन ग्रेबियल (Allison Gabriel) ने कहा कि ‘जूम फटिग’ के लिए आंशिक तौर पर कैमरे का चालू होना भी अहम कारक है. इससे कुछ कर्मचारियों में थकान की गंभीर समस्या हुई है.

    यह भी पढ़ें- मॉनसून में बच्चों को डेंगू, मलेरिया सहित हो सकती हैं ये बीमारियां : जानिए लक्षण, इलाज और बचाव

    उन्होंने कहा, अक्सर ऐसा माना जाता है कि यदि वर्चुअल बैठकों के दौरान आप कैमरा ऑन रखते हैं तो, आप एक्टिविटी से जुड़े होते हैं लेकिन कैमरा ऑन होने से खुद की सेल्फ प्रजेंटेशन का अतिरिक्त दबाव रहता है. जैसे खुद एक प्रोफेशनल की तरह दिखें, बैकग्राउंड भी वैसा ही हो, बच्चों को कैमरे से दूर रखना आदि.

    रिसर्च में क्या निकला
    चार सप्ताह में 103 लोगों पर किए अध्ययन में 1400 से ज्यादा ऑब्जर्वेशन (अवलोकन) किया गया. इस आधार पर एलीसन ग्रेबियल ने बताया, ‘हमने पाया कि वर्चुअल बैठकों के दौरान कैमरा चालू रखने से ज्यादा थकान होती है क्योंकि जब लोगों से वर्चुअल बैठकों के दौरान कैमरा चालू रखने को कहा गया, तो ऐसे लोगों ने कैमरा बंद रखने वालों से अधिक थकान होने की शिकायत की.

    यह भी पढ़ें- महामारी के चलते ऑर्गन ट्रांसप्लांट में आई भारी कमी- रिसर्च

    इस थकान के कारण मीटिंग में बोलना और सहभागिता (Participation) का लेवल कम हो जाता है. मतलब यह है कि जिन लोगों ने कैमरे चालू रखे, वे कैमरा बंद रखने वालों की तुलना में कम सक्षमता (competence) से बैठकों में शामिल रहे.

    क्या होती है टेंशन?
    स्टडी के मुताबिक वर्चुअल मीटिंग में थकान का यह असर महिलाओं और नए कर्मियों पर सेल्फ प्रजेंटेशन के दवाब के कारण अधिक पाया गया. इसका विश्लेषण करते हुए एलीसन ग्रेबियल कहती हैं, ‘महिलाएं परफेक्ट दिखने तथा बच्चों के कारण किसी अवरोध को लेकर ज्याद सतर्क होती हैं. जबकि नए कर्मी खुद को सक्रिय और उत्पादक यानि एक्टिव और प्रोडक्टिव दिखाने के चक्कर में तनाव में रहते हैं.

    क्या किया जा सकता है?
    ग्रेबियल आगे कहती हैं कि इसलिए जूम बैठकों में कर्मचारियों से कैमरा चालू रखने को कहा जाना श्रेष्ठ विकल्प नहीं हो सकता है. ऐसे में कर्मचारियों को इसकी छूट दी जानी चाहिए कि वे अपनी इच्छा से वर्चुअल बैठकों के दौरान कैमरा चालू रखें या बंद. साथी ही यह भी नहीं मान लिया जाना चाहिए कि कैमरा बंद रखने का मतलब है कि कर्मचारी की सहभागिता या उत्पादकता कम हो जाएगी.

    Tags: Health, Health News, Work From Home

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर