सरस्वती नदी की तरह विलुप्त होने की कगार पर यमुना

यमुना नदी विलुप्त होने के कगार पर

यमुना नदी विलुप्त होने के कगार पर

साधु बताते है कि इतने बुरे हाल यहां पर कभी नही हुए और ये हालत सरकार के कारण हुए हैं. सरकार ने रेत के लिए युमना नदी में ठेके छोड़ रखे हैं और पैसे के लिए नदी अब सरस्वती नदी की तरह विलुप्त होने की कगार पर है.

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हरियाणा में करीब 125 किलोमीटर तय करने का बाद यमुना नदी का पानी दिल्ली में मिल जाता है. कभी इस नदी में इतना पानी होता था कि हरियाणा और उतरप्रदेश के किसानों के लिए जीवन दायनी थी. लेकिन समय के साथ हालात बदल गए यमुना पहले नदी से नाले में तब्दील हुई फिर नाले से सूखी रेत में.

अब ये बरसाती नाला बन गई है जो सिर्फ बरसाती दिनों में बहती है. यहां 30 सालों से रहने वाले साधु बताते है कि इतने बुरे हाल यहां पर कभी नही हुए और ये हालत सरकार के कारण हुए हैं. सरकार ने रेत के लिए युमना नदी में ठेके छोड़ रखे हैं और पैसे के लिए नदी अब  सरस्वती नदी की तरह विलुप्त होने की कगार पर है.

यमुना नदी लोगों की आस्था का केंद्र है. यहां लोग अपनो की अस्थियों को लेकर आते है. लेकिन पानी नहीं होने के कारण लोग अपनों की अस्थियों को यमुना की मिट्टी में हो दबा देते है ताकि उन्हें मोक्ष मिल सके. यहां रहने वाले पुजारी बताते है कि पहले जब यमुना में पानी होता था तब यहां सैंकड़ों लोग अस्थियां लेकर आते थे. अब भी यहां लोग आते है लेकिन पानी नहीं होने के कारण उन्हें यमुना की मिट्टी में दबा दिया जाता है.



वहीं जब इस मामले में केबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार से बात की गई तो उन्होंने कहा की यह मामला उनके संज्ञान में आया था और इस मामले को वो कैबिनेट की बैठक में जरूर रखेंगे ताकि जल्द से जल्द पानी का समाधान हो सके.

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