होम /न्यूज /साहित्य /आलोक धन्वा की कविता 'छतों पर लड़कियां'

आलोक धन्वा की कविता 'छतों पर लड़कियां'

आलोक धन्वा समकालीन हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि हैं. वे आंदोलन और चेतना के कवि माने जाते हैं.

आलोक धन्वा समकालीन हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि हैं. वे आंदोलन और चेतना के कवि माने जाते हैं.

आलोक धन्वा ने हिंदी कविता को एक नई पहचान दी है. 'दुनिया रोज बनती है', 'जनता का आदमी', 'गोली दागो पोस्टर', 'कपड़े के जूत ...अधिक पढ़ें

अब भी
छतों पर आती हैं लड़कियां
मेरी जिंदगी पर पड़ती हैं उनकी परछाइयां।
गो कि लड़कियां आयी हैं उन लड़कों के लिए
जो नीचे गलियों में ताश खेल रहे हैं
नाले के ऊपर बनी सीढियों पर और
फुटपाथ के खुले चायखानों की बेंचों पर
चाय पी रहे हैं
उस लड़के को घेर कर
जो बहुत मीठा बजा रहा है माउथ ऑर्गन पर
आवारा और श्री 420 की अमर धुनें।

पत्रिकाओं की एक जमीन पर बिछी दुकान
सामने खड़े-खड़े कुछ नौजवान अखबार भी पढ़ रहे हैं।
उनमें सभी छात्र नहीं हैं
कुछ बेरोजगार हैं और कुछ नौकरीपेशा,
और कुछ लफंगे भी

लेकिन उन सभी के खून में
इंतजार है एक लड़की का!
उन्हें उम्मीद है उन घरों और उन छतों से
किसी शाम प्यार आयेगा!

Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Literature, Poet

टॉप स्टोरीज
अधिक पढ़ें