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प्रसिद्ध नाटककार अशोक पागल की स्मृति में नाट्योत्सव का आयोजन, 7 नाटकों का मंचन

अशोक पागल झारखंड के रंगमंच और साहित्य जगत में चर्चित नाम रहे हैं.

अशोक पागल झारखंड के रंगमंच और साहित्य जगत में चर्चित नाम रहे हैं.

बेहतरीन नाटक और शानदार निर्देशन के बल पर अशोक पागल ने झारखंड की पहचान को रंगमंच स्थापित करने का काम किया था. लंबी बीमार ...अधिक पढ़ें

रांची के बड़ा तालाब के पास स्थित एलएलबीबी हाई स्कूल में दो दिवसीय ‘अशोक पागल स्मृति नाट्योत्सव’ का आयोजन किया गया. इस स्कूल को बांग्ला स्कूल के नाम से भी जाना जाता है. इसी बांग्ला स्कूल में नाटककार और कवि अशोक पागल के लिखे 7 नाटकों का मंचन और उनकी कविताओं का पाठ हुआ.

आयोजन के पहले दिन अशोक पागल के लिखे 4 नाटक ‘कोहरे के बीच’, ‘और पुल टूट गया’, ‘जिंदा भूत’ और ‘बहाने’ का मंचन किया गया. ‘कोहरे के बीच’ एक ऐसे चित्रकार की कहानी है, जिसकी आत्मा सिर्फ पेंटिंग में ही बसी है. लेकिन उसके इस कला प्रेम को कोई समझने को तैयार नहीं. परिजनों को इस कलाकार से गहरी शिकायत रहती है. घर की जरूरतें पूरी न कर पाने का मलाल और कला के प्रति अपने जुनून के बीच पिसते एक कलाकार की कहानी कहता है नाटक ‘कोहरे के बीच’. इस नाटक का मंचन रांची की संस्था ‘नाट्यांचल’ ने किया था. निर्देशन सुकंठ ठाकुर का था. बादल साहु, तन्वी बर्दियार, अथर्व सिन्हा, नेहा महतो और शिवम मनोहर ने जीवंत प्रदर्शन करके दर्शकों को प्रभावित किया.

इस दिन की दूसरी प्रस्तुति ‘और पुल टूट गया’ थी. यह नाटक एक तरफ तो स्त्रीशोषण की कहानी है तो दूसरी तरह स्त्री के प्रेम और उसके साहस का प्रतिनिधित्व भी करता है. इस नाटक का मंचन ‘रंगदर्पण’ ने किया. निर्देशक थे अशोक गोप. इस नाटक में अभिनय कर रहे थे शर्मिष्ठा कुमारी, रिया कुमारी, बिपिन ठाकुर और रोहित पांडेय.

तीसरे नाटक ‘जिंदा भूत’ का मंचन ‘झारखंड फिल्म एंड थियेटर एकडमी’ ने किया था. यह नाटक मनुष्य जीवन की विडंबना का प्रतिनिधित्व करता है. इसका निर्देशन राजीव सिन्हा ने किया था. मंच पर निलेश वर्मा, निशा गुप्ता, मानव जालान, अभिषेक राय और मन्नु कुमार ने शानदार अभिनय किया.

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नाटक ‘बहाने’ का मंचन ‘युवा नाट्य संगीत अकादमी’ की ओर से किया गया था. इसका निर्देशन ऋषिकेश लाल ने किया था. पंडित जी की भूमिका में भी ऋषिकेश नजर आए, जबकि इस नाटक में अन्य पात्रों को बजरंग शर्मा, जयदीप सहाय, ऋषिका कुमारी और कामिनी ताम्रकार ने जिया.

‘अशोक पागल स्मृति नाट्योत्सव’ के दूसरे दिन अशोक पागल के लिखे 3 नाटक फसाद की जड़, विषपान और कैनवस की मौत का मंचन किया गया. नाटक ‘फसाद की जड़’ का मंचन ‘झारखंड फिल्म एंड थियेटर एकडमी’ ने किया था, जबकि निर्देशन राजीव सिन्हा ने किया. इस नाटक की कहानी दो परिवारों के बीच घूमती है. एक परिवार में पति-पत्नी के बीच अथाह प्यार है जबकि दूसरा परिवार की दिनचर्या में शामिल है आपस में झगड़ना. ऐसी स्थिति में यह दूसरा परिवार कोशिश करता है कि पहले परिवार के पति-पत्नी में भी झगड़ा हो. कई रोचक प्रसंगों से गुजरते हुए इस नाटक में अंततः लड़ने-झगड़ने वाले परिवार को कामयाबी मिल जाती है. इस नाटक में मन्नु कुमार, अंकिता कुमारी, समर्थ झा और मुस्कान मेधा ने अभिनय किया था.

दूसरे दिन की दूसरी प्रस्तुति ‘विषपान’ थी. नाट्य संस्था ‘वसुंधरा आर्ट्स’ ने इस नाटक का मंचन किया जबकि निर्देशन रीना सहाय ने किया. आदर्शों के कथानक पर टिका यह नाटक एक मास्टर की जीवनगाथा है. इस नाटक में फजल इमाम, रीना सहाय, विनोद जायसवाल, पराग श्रीवास्तव, कैलाश मानव और अश्मि जायसवाल ने भूमिकाएं निभाई थीं.

तीसरी प्रस्तुति ‘कैनवस की मौत’ रही. ‘एक्सपोजर’ नाम की संस्था के लिए इस नाटक का निर्देशन संजय लाल ने किया. यह नाटक दर्शकों के सामने एक चित्रकार के जीवन की त्रासदी रखता है. चित्रकार का दुर्भाग्य है कि वह जिसकी भी तस्वीर बनाता है उसकी मौत हो जाती है. इस अभिशप्त कलाकार से एक रोज उसकी प्रेमिका जिद कर बैठती है कि वह उसकी पोट्रेट बनाए. बाध्य होकर चित्रकार ने अपनी प्रेमिका की पोट्रेट बनाई और नाटकीय घटनाक्रम में प्रेमिका की मौत हो जाती है. इस बात से यह कलाकार बेहद टूट जाता है और अंततः वह अपनी पोट्रेट बनाकर जान देने का इरादा करता है. उसने अपनी भी पोट्रेट बनाई पर नियति को उसकी मौत स्वीकार नहीं होती. इस नाटक में सन्नी देवगम, आंचल चौधरी, कमलेश गोप, आकांक्षा चौधरी और अनूप कुमार ठाकुर ने अभिनय किया था.

इस आयोजन में नाटकों के अलावा 21 कवियों ने अशोक पागल की कविताओं का पाठ किया. किसी दिवंगत कलाकार को याद करना और उसके सम्मान में दो दिवसीय आयोजन करना जाहिर है झारखंड के साहित्य और सांस्कृतिक इतिहास में बड़ी घटना के तौर पर दर्ज हो गई है. इस पूरे आयोजन में विनोद जायसवाल, कमल बोस, राजीव थेपड़ा और सूरज खन्ना का योगदान रेखांकित किए जाने योग्य है. ऐसे आयोजन के लिए ‘वसुंधरा आर्ट्स’ बधाई का पात्र है.

बता दें कि अशोक पागल झारखंड के रंगमंच और साहित्य जगत में चर्चित नाम थे. बेहतरीन नाटक और शानदार निर्देशन के बल पर अशोक पागल ने झारखंड की पहचान को रंगमंच स्थापित करने का काम किया था. लंबी बीमारी के बाद इसी साल 22 जुलाई को उनका निधन हुआ था.

Tags: Literature, Literature and Art, Theater

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