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Happy Children's Day: 'बाल दिवस' पर पढ़ें बचपन से जुड़ी सुंदर रचनाएं

Happy Children's Day: 'बाल दिवस' पर पढ़ें बचपन से जुड़ी सुंदर रचनाएं

हिंदी साहित्य (Hindi Sahitya) में बाल साहित्य को विशेष महत्व दिया गया है.

हिंदी साहित्य (Hindi Sahitya) में बाल साहित्य को विशेष महत्व दिया गया है.

हमारे साहित्यकारों (bal Sahityakar) ने चंचल बचपन के दिनों को अलग-अलग शब्द दिए हैं. आज भी हम जब बचपन की कविताओं की बात करते हैं तो सबसे पहले 'मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं', 'चंदा मामा दूर के', 'उठे लाल अब आंखें खोलो' समेत तमाम गीत-कविताओं होंठों पर थिरकने लगती हैं.

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    Hindi Bal Sahitya: आज पूरा देश बाल दिवस मना रहा है. हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नहेरू का जन्मदिवस 14 नवंबर हर वर्ष बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

    हिंदी साहित्य (Hindi Sahitya) में बाल साहित्य को विशेष महत्व दिया गया है. अच्छे साहित्य के माध्यम से ही हम बच्चों को अच्छी सीख, उन्हें अच्छे संस्कार और एक अच्छा इनसान बनने की प्ररेणा देते हैं.

    हमारे साहित्यकारों (bal Sahityakar) ने चंचल बचपन के दिनों को अलग-अलग शब्द दिए हैं. आज भी हम जब बचपन की कविताओं की बात करते हैं तो सबसे पहले ‘मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं’, ‘चंदा मामा दूर के’, ‘उठे लाल अब आंखें खोलो’ समेत तमाम गीत-कविताओं होंठों पर थिरकने लगती हैं.

    बाल दिवस से अवसर पर हम भी अलग-अलग लेखकों के गीत और रचनाएं प्रस्तुत कर रहे हैं.

    मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं

    मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं।
    जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥
    सुरभी कौ पय पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं।
    ह्वै हौं पूत नंद बाबा को , तेरौ सुत न कहैहौं॥
    आगैं आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं।
    हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुलहिया दैहौं
    तेरी सौ, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं॥
    सूरदास ह्वै कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं॥
    – महाकवि सूरदास

    बाल साहित्य: क्षमा शर्मा की कहानी ‘बारिश के दिन में तोते’

    उठो लाल अब आँखें खोलो

    उठो लाल अब आँखें खोलो,
    पानी लायी हूँ मुंह धो लो।

    बीती रात कमल दल फूले,
    उसके ऊपर भँवरे झूले।

    चिड़िया चहक उठी पेड़ों पे,
    बहने लगी हवा अति सुंदर।

    नभ में प्यारी लाली छाई,
    धरती ने प्यारी छवि पाई।

    भोर हुई सूरज उग आया,
    जल में पड़ी सुनहरी छाया।

    नन्ही नन्ही किरणें आई,
    फूल खिले कलियाँ मुस्काई।

    इतना सुंदर समय मत खोओ,
    मेरे प्यारे अब मत सोओ।
    – अयोध्या सिंह उपाध्या ‘हरिओध’

    नोट- यह बाल गीत इंटरनेट की दुनिया में हिंदी के वरिष्ठ कवि सोहन लाल द्विवेदी के नाम से वायरल हो रहा है.

    मेरी ख़्वाहिश है कि फिर से मैं फ़रिश्ता हो जाऊँ
    माँ से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊँ
    कम-से कम बच्चों के होठों की हंसी की ख़ातिर
    ऎसी मिट्टी में मिलाना कि खिलौना हो जाऊँ
    – मुनव्वर राना

    जहां बच्चों का संग वहां बाजे मृदंग
    जहां बुढ्ढों का संग वहां खर्चे का तंग
    – शिवपूजन सहाय

    मिरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा
    बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है
    – राजेश रेड्डी

    Tags: Hindi Literature

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