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'बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे', फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की बेहतरीन रचनाएं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की रचनाओं में बेबाकी है, पीड़ा है और दमनकारी सत्ता के खिलाफ मुखालफत है. उन्होंने अपनी शायरी में हदबंदी से बाहर निकलकर एक अलग ही मुकाम हासिल किया.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की रचनाओं में बेबाकी है, पीड़ा है और दमनकारी सत्ता के खिलाफ मुखालफत है. उन्होंने अपनी शायरी में हदबंदी से बाहर निकलकर एक अलग ही मुकाम हासिल किया.

सियासी हंगामे या किसी आंदोलन में दुष्यंत कुमार के बाद सबसे ज्यादा जिनकी रचनाओं का इस्तेमाल किया जाता है उनमें फ़ैज़ अहम ...अधिक पढ़ें

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिक़ी करते थे
हम जीते-जी मसरूफ़ रहे
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

काम इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ से काम उलझता रहा
फिर आख़िर तंग आ कर हम ने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया।

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे

बोल ज़बाँ अब तक तेरी है
तेरा सुत्वाँ जिस्म है तेरा
बोल कि जाँ अब तक तेरी है
देख कि आहन-गर की दुकाँ में
तुंद हैं शोले सुर्ख़ है आहन
खुलने लगे क़ुफ़्लों के दहाने
फैला हर इक ज़ंजीर का दामन
बोल ये थोड़ा वक़्त बहुत है
जिस्म ओ ज़बाँ की मौत से पहले
बोल कि सच ज़िंदा है अब तक
बोल जो कुछ कहना है कह ले।

Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature, Poet

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