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सावरकर भारतीय राजनीति और इतिहास का एक बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति- निर्मला सीतारमण

सावरकर भारतीय राजनीति और इतिहास का एक बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति- निर्मला सीतारमण

लेखक विक्रम संपत की पुस्तक ‘सावरकर-ए कॉन्टेस्टेड लिगेसी 1924-1966’ का विमोचन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया गया.

लेखक विक्रम संपत की पुस्तक ‘सावरकर-ए कॉन्टेस्टेड लिगेसी 1924-1966’ का विमोचन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया गया.

Savarkar a contested legacy पुस्तक भारत और विदेशी अभिलेखागारों और पुस्तकालयों से लगभग 5 वर्षों का गहन शोध है जो एक बदनाम और गलत समझे जाने वाले व्यक्ति की समग्र तस्वीर की गहन पड़ताल करती है.

  • News18Hindi
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    Book Release: प्रभा खेतान फाउंडेशन की पहल ‘किताब’ के तहत लेखक विक्रम संपत (Vikram Sampath) की पुस्तक ‘सावरकर-ए कॉन्टेस्टेड लिगेसी 1924-1966’ का विमोचन किया गया. इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उपस्थित थीं. बतौर पैनलिस्ट भारतीय अर्थशास्त्री संजीव सान्याल कार्यक्रम में मौजूद थे और कार्यक्रम का संचालन शुभ्रस्था ने किया. ‘सावरकर – ए कॉन्टेस्टेड लिगेसी’ (Savarkar a contested legacy) पुस्तक पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित की गयी है.

    यह दो श्रृंखलाओं वाली पुस्तक का दूसरा भाग है. पहली पुस्तक सावरकर: इकोज़ फ्रॉम ए फॉरगॉटन पास्ट, 1883–1924 (Savarkar Echoes from a Forgotten Past) में वीर सावरकर के बचपन के प्रभावों, राजनीतिक सक्रियता, कालापानी कारावास और 1924 में उनकी अंतिम रिहाई के बारे में बताया गया.

    लेखक विक्रम संपत (Author Vikram Sampath) बीसवीं सदी के विवादास्पद राजनीतिक, विचारक और नेता विनायक दामोदर सावरकर के जीवन और कार्यों को प्रकाश में लाये हैं. उन्होंने बताया कि पूरे भारत से और इसके बाहर, अंग्रेजी और कई भारतीय भाषाओं में मूल अभिलेखीय दस्तावेजों की एक विशाल श्रृंखला की छानबीन करते हुए यह पुस्तक तैयार की है.

    विक्रम संपत ने कहा, “यह पुस्तक भारत और विदेशी अभिलेखागारों और पुस्तकालयों से लगभग 5 वर्षों का गहन शोध है जो एक बदनाम और गलत समझे जाने वाले व्यक्ति की समग्र तस्वीर की गहन पड़ताल करती है. मुझे आशा है कि विवेकशील पाठक इन संस्करणों को पढेंगे और अपने दिमाग में सावरकर, उनकी विरासत और आज के भारत में उनके महत्व के बारे में अपनी राय बनाएंगे.”

    मृत्यु के दशकों बाद, विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) भारत के राजनीतिक परिदृश्य को विशिष्ट रूप से प्रभावित करते रहे हैं. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में जो हिंदू-मुस्लिम एकता के कट्टर समर्थक थे ऐसा उनके साथ क्या हुआ था कि वे ‘हिंदुत्व’ के समर्थक के रूप में बदल गये?

    Savarkar a contested legacy

    अखिल भारतीय हिंदू महासभा के पूर्व अध्यक्ष सावरकर कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति के घोर आलोचक थे. गांधी की हत्या के बाद, सावरकर को हत्या में सह-साजिशकर्ता के रूप में आरोपित किया गया था, जबकि उन्हें अदालत ने बरी कर दिया था. सावरकर पर अभी भी गांधी की हत्या में भूमिका निभाने का आरोप लगते रहते है, और यह एक ऐसा विषय है जिस पर अक्सर चर्चा और बहस होती है.

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा, ‘मैं लोगों को ऐसा अवसर देने के लिए प्रभा खेतान फाउंडेशन जैसे संगठनों की प्रंशसा करती हूं. लेखक विक्रम की यह एक बहुत ही ठोस और अच्छी तरह से शोध की गई किताब है, जिस विवेक के साथ लेखक ने कठोर शोध कर इस पुस्तक को लिखा है, वह काबिले तारीफ है. सावरकर भारतीय राजनीति और इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और इसलिए उन पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए.’

    अर्थशास्त्री संजीव सान्याल (Sanjeev Sanyal) ने कहा कि यह एक उत्कृष्ट काम है, बहुत अच्छी तरह लिखा गया है और बेहद पठनीय है. उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले खंड को पढ़ा है, और दूसरा खंड भी आधा पढ़ चूका हूं और इसका आनंद ले रहा हूं. मैं यह कह सकता हूं कि ये दो खंड किसी भारतीय लेखक द्वारा लिखी गई अब तक की सर्वश्रेष्ठ जीवनी हो सकते हैं.’

    प्रभा खेतान फाउंडेशन (Prabha Khaitan Foundation) की प्रवक्ता तथा वरिष्ठ साहित्यकार नीलिमा डालमिया अधर (Neelima Dalmia Adhar) ने कहा कि ‘किताब’ पहल लेखकों को अपनी किताबें प्रदर्शित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है. लेखक विक्रम संपत की नई किताब के लोकार्पण की मेजबानी करते हुए हमें बेहद खुशी हो रही है.

    उन्होंने कहा कि ‘सावरकर – द कंटेस्टेड लिगेसी’ कोविड के इन चुनौतीपूर्ण समय में लोकार्पित हो रही है. इस किताब में पाठक सावरकार के नए व्यक्तित्व और रूप से रू-ब-रू होंगे.

    प्रभा खेतान फाउंडेशन (Prabha Khaitan Foundation)
    प्रभा खेतान फाउंडेशन1980 के दशक की शुरुआत में स्वर्गीय डॉ. प्रभा खेतान द्वारा स्थापित एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है. यह सामाजिक-सांस्कृतिक कल्याण और मानवीय कारणों के लिए समर्पित है. कोलकाता में स्थित, फाउंडेशन प्रदर्शन कला, संस्कृति, शिक्षा, साहित्य, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है. यह भारत में सांस्कृतिक, शैक्षिक, साहित्यिक और सामाजिक कल्याण परियोजनाओं को लागू करने के लिए देखभाल करने वालों, प्रतिबद्ध व्यक्तियों और समान विचारधारा वाले संस्थानों के साथ सहयोग करता है.

    Tags: Books

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