• Home
  • »
  • News
  • »
  • literature
  • »
  • पुस्तक समीक्षा: धड़कते हुए दिलों की कहानी है 'पटना डायरी'

पुस्तक समीक्षा: धड़कते हुए दिलों की कहानी है 'पटना डायरी'

पटना डायरी 'पटना शहर' को नजदीक से देखने और समझने की एक खुली खिड़की है.

पटना डायरी 'पटना शहर' को नजदीक से देखने और समझने की एक खुली खिड़की है.

निवेदिता ने किताब के शुरू में ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पुस्तक पटना का इतिहास नहीं है. वे लिखती हैं, 'पटना डायरी में मेरी यादें हैं, धड़कते हुए दिलों की कहानी है, जिसे मैं खजाने की तरह अपने पास रखती हूं.'

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

Book Review: वाणी प्रकाशन (Vani Prakashan) से छपकर आई प्रसिद्ध लेखिका निवेदिता (Nivedita) पुस्तक पटना डायरी (Patna Diary) काफी चर्चा में है. पटना शहर के बारे में हाल ही में कई किताबें आई हैं, लेकिन यह इतिहास से इतर संस्मरणात्मक किताब है. यह किताब कई पीढ़ियों के बीच संवाद कायम करने का काम करती है.

अस्सी के दशक के पटना शहर (Patna City) को जानने के लिए निवेदिता की पटना डायरी एक जीवंत दस्तावेज है. यह पटना शहर का रोजनामचा भी है और कविता भी. इस पुस्तक में पटना के आपको विविध रंग दिखाई देंगे. इस किताब की मार्फत आप उस समय के पटना शहर के तमाम लोगों से भी रू-ब-रू होंगे.

‘पटना डायरी’ में पटना के कई घटनाक्रमों की चर्चा होती है. निवेदिता के स्कूल-कॉलेज के अनुभव है. ये किसी व्यक्ति के भीतर के कलाकार के विकास की गाथा भी है.

लेखिका ने किताब के शुरू में ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पुस्तक पटना का इतिहास नहीं है. वे लिखती हैं, ‘पटना डायरी में मेरी यादें हैं, धड़कते हुए दिलों की कहानी है, जिसे मैं खजाने की तरह अपने पास रखती हूं.’

किताब के नाम के बारे में निवेदिता बताती हैं, ‘पटना डायरी की शुरूआत अविनाश के मोहल्ला ब्लॉग से हुई. मैं अपने भीतर की स्मृतियों के बारे में इस ब्लॉग में लिख रही थी. उस वक्त 80 के दशक दुनिया में उथल-पुथल मची हुई थी. समाजवाद के सपने टूट रहे थे. मैं टुकड़ों में लिख रही थी, लोग इसे पंसद कर रहे थे. एक दिन वाणी प्रकाशन की अदिति माहेश्वरी से मुलाकात हुई तो अदिति ने इन टुकड़ों को एक किताब की शक्ल देने का काम किया. आलोक धन्वा, अरुण कमल, उषा किरण खान जैसे साहित्यकार इस किताब का हिस्सा हैं.’

साहित्य अकादमी सम्मान 2020: हिंदी में अनामिका और अंग्रेजी के लिए अरुंधति सम्मानित

निवेदिता बताती हैं कि पटना डायरी जब वह लिख रही थीं, तो उस काल के ज्यादातर रचनाकारों को इसमें शामिल किया गया, लेकिन फिर भी बहुत से लोग छूट गए.

वरिष्ठ कवि अरुण कमल किताब के बारे बताते हैं कि इस किताब की बहुत सी बातें सीधे दिल तक उतर गईं. ये किताब इस शहर से जुड़े लोगों की जिंदगी है.

अरुण कमल कहते हैं, ‘ये किताब वास्तव में लोगों के जरिए शहर को समझने की कोशिश है. और खुद को भी समझने की कोशिश है. इस किताब में दास्तान है. इस किताब में सब कुछ पटना शहर से जुड़ा है.’

भाषा भी बहती हवा-सी है, यह जितनी स्वछंद होगी उतनी ही महकेगी- स्वानन्द किरकिरे

किताब का पहला लेख कवि आलोक धन्वा से शुरू होता है. हालांकि किताब के पहले पन्ने पर आपको आलोक धन्वा की प्रतिक्रिया पढ़ने को मिलेगी. अपनी प्रतिक्रिया में आलोक धन्वा लिखते हैं, ‘निवेदिता एक बेहतरीन पत्रकार, कवि और एक्टविस्ट है. वो बहुत निडर है. मैं इस निडर लड़की का कायल हूं.’

आलोक लिखते हैं, ‘निवेदिता की कविताएं उसका संघर्ष साथ-साथ है. हम सब संघर्ष के साथी हैं. उसने खूब यात्राएं की हैं. ये यात्रा उसकी कविताओं को आगे ले जाती है. निवेदिता की इस किताब में पटना और उसमें जीने वालों का दिलचस्प दस्तावेज है. इस किताब में पटना का दिल धड़कता है.’

किताब शुरू होती है ‘आलोक धन्वा और सफेद रातें’ से. इसमें आलोक धन्वा की एक कविता दी हुई है-

स्त्रियों ने रचा जिसे युगों में
युगों की रातों में
उतने निजी हुए शरीर
आज मैं चला ढूंढडने अपने शरीर में

इस कविता के संदर्भ में निवेदिता लिखती हैं, ‘आलोक के जीवन में क्रांति का आना एक हादसा था, जाना भी एक हादसा है. यह बात इतने भरोसे के साथ इसलिए कह रही हूं कि दोनों की जिंदगी को नजदीक से देखा है. क्रांति ने अपना नाम बदल लिया है, अब वह असीमा के नाम से जानी जाती है. उन दोनों के जीवन के दुखद प्रसंगों को मैं कुरेदना नहीं चाहती.’

निवेदिता लिखती हैं, ‘प्यार ही है जिसने आलोक को डुबोया और प्यार ही है जिसने निकाला.’

आलोक की कविताओं पर लेखिका ने लिखा है, ‘आलोक को जब कविता पढ़ते हुए सुना तो बेशुमार रंग मेरे सामने झिलमिलाने लगे. शब्द बहने लगे. आसमान पर सितारे सुलगने लगे. खुश्क होती नदियां पानी से लबालब भर गईं.’

किताब के दूसरे अध्याय में आप उषा किरण खान को पाएंगे. ‘जीवन से भरी एक स्त्री’ में निवेदिता ने लिखा है, ‘जैसे-जैसे उनके (उषा किरण खान के) नजदीक गई मैंने पाया जिन्दगी ढेर सारे रंगों के साथ मौजूद है. हैरान थी कि एक स्त्री के भीतर इतने सारे रंगों को देखकर.’

उषा किरण खान के लेखन के बारे में पुस्तक में लिखा गया है, ‘उषा दी के लेखन की खासियत यही है. उनके पात्र अपनी पीड़ा का जश्न नहीं मनाते, न ज्ञान बघारते हैं. सच को बिना किसी मिलावट के कहने की कला ने ही उन्हें अदब की दुनिया में बेहतरीन अफसानानिगार बनाया.’

तीसरे अध्याय ‘ न ख़ुदा ही मिला न विसाले सनम’ में निवेदिता ने आंदोलन के दिनों को याद किया है. वे कहती हैं कि 80 का दशक राजनीतिक परिपक्वता का दौर था. उस समय खूब आलोचनाएं होती थीं, बहस होती थीं, लेकिन किसी की आवाज़ दबाई नहीं जाती थी. आंदोलन, संस्कृति कला और साहित्य के हिसाब से सबसे खूबसूरत दौर था. इस दौर में पटना इन गतिविधियों का केंद्र था. उस दौर में जन आंदोलन भी बहुत तेज थे.

इस अध्याय में निवेदिता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पटना के गांधी मैदान में काले झंडे दिखाने की घटना का वर्णन किया है.

मुहब्बत और क्रांति के दिन में निवेदिता ने अपने कॉलेज के अल्हड़ दिनों की धमाचौकड़ी के बारे में बताया है. मुहब्बत के बारे में वे लिखती हैं, उसने रेडियो खोल दिया. रेडियो पर लता के गीत गूंज रहे थे. चाय की दो प्यालियां. गर्म भाप और उसकी मादक हंसी. उसने बहुत धीरे से कहा- आपकी आंखें बहुत सुंदर हैं और इस बहाने मेरी आंखों में उतर गया. पहली बार महसूस किया कि मेरे भीतर एक खूबसूरत औरत है. उसके हाथ मेरे स्याह और घने बालों पर फिसल रहे थे. मेरी आंखें पिघल रही थीं.

मुहब्बत से निकलकर यहां आपको इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पटना में हुए दंगे-फसाद के बारे में भी पढ़ने को मिलेगा. इस किताब से गुजरते हुए आपकी मुलाकात कैफी आज़मी से भी होगी तो आपको लतिका दीदी के घर तीसरी कसम फिल्म के लेखक फणीश्वर नाथ रेणु भी दिखाई देंगे.

इस किताब को पढ़ते हुए आप पटना की सड़कों पर दौड़ते रिक्शा, गाड़ियों से बचते-बचाते गंगा नदी के तट पर पहुंच जाओगे. यहां आपको पता चलेगा कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने प्रिय पोते मुहम्मद अजीम के अनुरोध पर 1704 में शहर का नाम बदल कर अज़ीमाबाद कर दिया था. किताब के आखिरी चैप्टर में निवेदिता ने प्रसिद्ध कवि अरुण कमल के साक्षात्कार का जगह दी है.

पटना डायरी एक किताब के माध्यम से ‘पटना शहर’ को नजदीक से देखने और समझने की एक शानदार कोशिश है.

पुस्तक- पटना डायरी
लेखक- निवेदिता
प्रकाशन- वाणी प्रकाशन
मूल्य- 199 रुपये

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज