Home /News /literature /

book review rashmi bajaj hindi poems kahat kabiran by shriram sharma hindi literature and sahitya

धर्म, जाति में बंटे समाज पर प्रहार है रश्मि बजाज का काव्य संग्रह 'कहत कबीरन'

'कहत कबीरन' रश्मि बजाज का छठा काव्य संग्रह है.

'कहत कबीरन' रश्मि बजाज का छठा काव्य संग्रह है.

मृत्योर्मा जीवनम् गमय, निर्भय हो जाओ द्रौपदी, सुरबाला की मधुशाला और जुर्रत ख्वाब देखने की जैसे चर्चित काव्य संग्रहों की लेखिका रश्मि बजाज भारत सरकार में संयुक्त हिंदी सलाहकार रही हैं. भिवानी के वैश्य पीजी कॉलेज के अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष रहीं रश्मि अब स्वतंत्र लेखन कर रही हैं.

अधिक पढ़ें ...

पुस्तक समीक्षा: रश्मि बजाज का हिंदी और अंग्रेजी लेखन में समान अधिकार है. उनके कई काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह ‘कहत कबीरन’ एक नई उष्मा और नई ऊर्जा से लवरेज है. अयन प्रकाशन से छपकर आए ‘कहत कबीरन’ चार खंडों में बंटा हुआ है. ‘सांच-पंथ’, ‘कोरोना-काले’, ‘स्त्री’ और ‘ऐ मेरे देश’ खंड में बंटा यह कविता संग्रह अलग-अलग भाव की कविताओं से लैस है. रश्मि की हर कविता एक नया संदेश देती नजर आती है.

कहते हैं मौन में बड़ी शक्ति होती है. हमारे यहां कहावत भी है- एक चुप सौ को हरावे. मौन की इसी ताकत को पहचानते हुए रश्मि बजाज लिखती हैं-

शब्दों की हर
यात्रा का
अंतिम पड़ाव है
केवल मौन
गूढ़ सत्य यह
आदि अनादि
कवि से बढ़
जाने कौन..?

रश्मि की रचनाओं की खासियत यह है कि वह ‘शब्द’ और ‘भाषा’ को सर्वोपरी रखती हैं. क्योंकि अभिव्यक्ति का अधिकार कुदरत ने मनुष्य को दिया है और शब्द तथा भाषा के माध्यम से हम अपने भावों को अभिव्यक्त करते हैं. और रश्मि एक ऐसी भाषा गढ़ रही हैं जिसमें सिर्फ और सिर्फ प्रेम की अभिव्यक्ति हो-

खोज रही हूं
मैं वह भाषा
हर शब्द का
अर्थ हो जहां
केवल प्रेम
लिपि स्निग्धता
व्याकरण में
उमगती हो चेतना की
शुभ्र अन्त: सलिला…

यह भी पढ़ें- Book Review: मूल्यहीन सामाजिकता का करुणा से पगा निर्मम व्यंग्य है ‘स्वाँग’

रश्मि बजाज की रचनाओं में प्रेम केवल समर्पण नहीं बल्कि बगावत भी है. पाठकों को इस पुस्तक में प्रेम के कई रूप-रंग देखने को मिलेंगे-

बरसती हों
जब हरसू
कातिलाना नफरतें
तो प्रेम पर
कविता लिखना
रूमानियत नहीं
एक बगावत है!

रश्मि की कविताओं में जहां आपको प्रेम, समर्पण और ईश्वर के साथ आत्मसाथ का अनुभव होगा वहीं उत्सवधर्मिता पर प्रश्नचिह्न भी दिखाई देते हैं. एक कविता में वह कवि को ही कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल करती हैं कि शब्दों से हमेशा इंद्रधनुषी रंग भरने वालों को जीवन का स्याह पक्ष क्यों नजर नहीं आता, एक पीड़ित की आह सुनाई क्यों नहीं देती-

कवि
लिखता है कविता
पंछी पर
रचता है शब्दों में
उड़ान का उत्सव
कलरव की सरगम..

उकेरता है पृष्ठों पर
कोमल पंखों के
मखमली इंद्रधनुषीय रंग,
आकाश की नीलाभ अनंतता..

क्यों नहीं लिखी तूने
पिंजरे में कैद
पंछी की व्यथा..?

यह भी पढ़ें- अगला जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल रोम में, इटली की धरती पर होगी भारतीय साहित्य की धूम

धर्म, जाति में बंटते समाज पर भी रश्मि ने खूब कलम चलाई है. कम शब्दों में बड़ा संदेश ने का अनूठा प्रयोग उनकी कविताओं में देखा जा सकता है-

अंधेरे हैं दबंग
उजाले दुबक गए
चिराग जब से
मजहबों, जातों में
बंट गए…

रश्मि के लिए आजादी के मायने अलग हैं. वह आजादी की एक नई परिभाषा गढ़ती दिखाई देती हैं. सच तो है हम जन्म के बाद धर्म-जाति में बंटते हैं. कुदरत से हर जीव को बिना किसी नाम और पहचान के ही धरती पर उतारती है. रश्मि इस नाम-पहचान से पहले की आजादी की बात करती हैं ताकि एक ऐसी नई सुबह हो जिनमें ना कोई हिंदू हो, ना मुस्लमान, ना कोई ऊंची जाति का हो और ना ही नीच. अगर हो तो सिर्फ और सिर्फ प्रेम हो-

इस बार मुझे
चाहिए आजादी
अपनी पैदाइश से
पहले ही

करना चाहती हूं
इस बंटे-कटे
जहान में
बे-जात
बे-मजहब
बे-जैण्डर
बेखौफ गुस्ताख एंट्री

मकान को घर बनाने में एक स्त्री की अहम भूमिका होती है. एक औरत की वजह से ही घर में खुशियां गूंजती हैं. लेकिन इन्हीं खुशियों की जनक एक स्त्री न जाने कितनी उदासी ओढ़े हुए होती है, इसकी बानगी यहां देखी जा सकती है-

घर की
नम, उदास दीवारें
इस घर में
कोई औरत भी
रहती है…

भीड़ का कोई चेहरा या नाम नहीं होता. उन्मादी उमड़ते हैं और खंड-खंड करते हैं लोकतंत्र को. देश में बढ़ते भीड़ तंत्र पर रश्मि ने बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रहार किया है-

बहुत दबंग होता है
भीड़ का गणित
एक के बदले अनेक
अनेक के बदले अनेकानेक!

एक-आयामी होती है
उन्माद की ज्यामिति!
रचते हैं महागणितज्ञ
नित नई ‘थ्योरम’
‘इनफाइनाइट’ क्रूरता की!
पुनर्पुन: सिद्धं इति!

Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Literature, Poem

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर