Home /News /literature /

नि:शब्द नूपुर: आत्मा का छूती मोहब्बत को जीने वाला फकीर रूमी की ग़ज़ल

नि:शब्द नूपुर: आत्मा का छूती मोहब्बत को जीने वाला फकीर रूमी की ग़ज़ल

'नि:शब्द नूपुर' में रूमी की मूल फारसी ग़जल और उसका हिंदी में अनुवाद है.

'नि:शब्द नूपुर' में रूमी की मूल फारसी ग़जल और उसका हिंदी में अनुवाद है.

मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी फारसी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक रहे हैं. उन्होंने फारसी साहित्य के ग्रंथ मसनवी में अहम योगदान दिया है.

फ़ारसी कवि रूमी ऐसे संत थे जिन्हें लोग पागल समझते थे. वे बेसुध थे, दीवाने थे. रूमी ने खुद को दिमाग से दूर करने के लिए नाचने का सहारा लिया. वे मदमस्त होकर इतना नाचे कि दिमाग ने दखल देना ही बंद कर दिया. जब आप खुद से दूर रहकर नाचते हैं मस्त होते हैं, तो रूमी के संदेशों को अपने आसपास ही पाते हैं. रूमी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.

”प्रिय के अत्याचार की इच्छा करो
उसके लाड की ख़ाहिश न रखो
ताकि वह नखरे वाला महबूब
एक दिन तुम्हें टूट कर चाहने लगे.”

लोग नाम और प्रतिष्ठा कमाने की बात करते हैं, दिन-रात इसी धुन में लगे रहते हैं कि उनके मित्र, उनका समाज और उनका देश कैसे उनके बारे में जाने, उनकी प्रशंसा करे. लेकिन प्रतिष्ठा को मिटाने और बदनाम होने की कामना भला कौन करेगा. रूमी ऐसे कवि हैं, मौलाना हैं और विचारक हैं, जो चतुराई बेच देने और हैरानी खरीदने की बात करते हैं. रूमी ही कह सकते हैं, ”ख़ुद को सबसे बेगाना बना लो, अपने घर को वीराना बना लो.”

‘’ऐ लोगों, हमें हरगिज़ याद न करो
हम ख़ुद ऐसी याद हैं जिसमें हम नहीं हैं.’’

कुछ ऐसा ही जलालुद्दीन मुहम्मद रूमी या ‘बल्ख़ी’ का प्रेम. लोग उन्हें आदर से मौलाना या मौलवी भी कहते हैं. मौलाना मुहम्मद जलालुद्दीन रूमी फारसी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक रहे हैं. उन्होंने फारसी साहित्य के ग्रंथ मसनवी में अहम योगदान दिया है. रूमी की शायरी में मस्ताना रंग है. इनकी रचनाओं के एक संग्रह को दीवान-ए-शम्स कहते हैं. रूमी का जन्म 1207 में ताजिकिस्तान में हुआ था. लेकिन इनकी रचनाएं पूरी दुनिया में मशहूर हैं. इनकी रचनाएं मानवीय सर्जना की अमूल्य धरोहर बन चुकी हैं.

डॉक्टर बलराम शुक्ल ने रूमी की 100 ग़ज़लों को हिन्दी में अनुवाद किया है और राजकमल प्रकाशन ने इस संग्रह को ‘नि:शब्द नूपुर’ के नाम से प्रकाशित किया है. मौलाना रूमी की 4000 ग़ज़लों में से बलराम शुक्ल ने 1500 से अधिक ग़ज़लों का अध्ययन और विश्लेषण किया. इसके बाद उनमें से 100 ग़ज़लों का चुनाव किया. डॉक्टर बलराम का फ़ारसी कविता संग्रह इश्क़ो आताश ईरान से भी प्रकाशित हो चुका है.

यह भी पढ़ें- प्रेमचंद की कहानी ‘कफ़न’ मृत्यु नहीं, जीवन की कहानी है

‘नि:शब्द नूपुर’ में रूमी की मूल फारसी ग़जल बाईं ओर देवनागरी लिपि में दी हुई है और दाएं पृष्ठ पर उसका हिंदी में अनुवाद है. बलराम शुक्ल ने अपने अनुवाद में इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि ग़ज़ल के मूल अर्थ से छेड़छाड़ न हो. प्रस्तुत रचना में रूमी की ग़ज़लों का मूल फ़ारसी पाठ भी दिया हुआ है.
देवनागरी लिपि में ग़ज़ल पेश करने से पाठक लयबद्ध तरीके से उनका उच्चारण कर सकता है.

रूमी ने अपनी ग़ज़लों में इश्क, माशूक, आशिक और वस्ल जैसे शब्दों पर जोर दिया है, लेकिन ये माशूका है ख़ुदा और इश्क है ख़ुदा की इबादत.

”ईश्वर के बाग का पंछी हूं मैं
इस धूल-मिट्टी की दुनिया से मेरा क्या वास्ता
सिर्फ कुछ एक दिनों के लिए यह देह बना है मेरा पिंजरा.”

”मिलन की मदिरा तो चखा दो
ताकि इस अछोर क़ैदखाने के दरवाज़े को
एक मस्तानी ठोकर से तोड़ डालूं मैं.”

रूमी ने अपनी ग़ज़लों में ईश्वर को अपने अंदर ही खोजने और मानवता की सेवा पर ही बल दिया है. एक जगह वे लिखते हैं,

”हज को चल दिए ऐ मेरे क़ौम के यारो
कहां, कहां भटक रहे हो आखिर तुम सब
जिससे प्रेम हैं, तुम्हारा माशूक
वह तो यहीं है, जल्दी लौट आओ, लौट आओ.”

”कल राहत मैं दिवाना हो उठा था
इश्क़ ने मुझे देखा और कहा-लो मैं आ गया
चित्कार मत करो, कपड़े मत फाड़ो, शोर बंद करो.”

”मैंने कहा
ऐ इश्क़, मुझे बेगानी चीज़ से डर लगता है
इश्क़ ने कहा
वह बेगानी चीज़ अब बेगानी नहीं रही
कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है.”

जिंदा आदमी की कद्र नहीं और मरने के बाद उसकी याद में बड़े-बड़े आयोजन किए जाते हैं, इस पर रूमी लिखते हैं-

”मैं मर जाऊंगा
इस ख़याल से कई बार तुम खुश हो जाते हो
हम इतने मुर्दापरस्त और ज़िंदगी के दुश्मन से क्यों हो चले हैं.”

”अगर तुमने मन बना लिया है कि तुम मुझे मरने पर ही प्रेम करोगे
तो अभी भी मुझे तुम अपने प्रति समर्पण में मरा हुआ ही समझो.”

”अगर तुम मेरी कब्र को चूमना चाहते हो
तो आओ, मेरे चेहरे को चूम लो
इस समय मेरा सारा अस्तित्व ही
विरह में कब्र सा बन चुका है.”

‘प्रेम में समर्पण होने को रूमी बहुत ही अहमियत देते हैं. अज़ इश्क़ न परीज़म में मौलाना लिखते हैं-

”क़यामत के दिन जब संसार के लोगों को
उनके ख़ाक से उठाया जाएगा
उस दिन मैं बेचारा
अपनी नहीं तुम्हारी ख़ाक से बाहर निकलूंगा.”

‘नि:शब्द नूपुर’ में आपको रूमी की ग़ज़ल तो पढ़ने को मिलेंगी ही, साथ ही लेखक ने इनमें इस्तेमाल होने वाले छन्द के बारे में भी विस्तार से बताया है. इसमें बताया गया है कि फ़ारसी में 90 प्रतिशत से अधिक कविताओं में आमतौर पर 31 छन्द ही इस्तेमाल किए गए हैं. रूमी फ़ारसी में सबसे ज्यादा छन्दों का प्रयोग करने वाले कवि हैं.

यह भी पढ़ें- प्रेमचंद को समझने का प्रमाणिक सूत्र है पत्नी शिवरानी देवी की किताब ‘प्रेमचंद घर में’

यहां आपको सक्षिप्त रूप से फ़ारसी का व्याकरण भी पढ़ने और समझने को मिलेगा. निश्चित ही यह संग्रह रूमी के बारे में, उनकी ग़ज़ल और फ़ारसी लिपि को समझने में मदद करेगी. फ़ारसी का अध्ययन कर रहे छात्रों के लिए यह पुस्तक बहुत ही मददगार साबित हो सकती है.

जलालुद्दीन रूमी (Jalaluddin Rumi)
मौलाना जलालुद्दीन रूमी का जन्म 30 सितंबर, 1207 में ताजिकिस्तान के वख़्श गांव में हुआ था. उनके पिता बहाउद्दीन वलद एक धर्मशास्त्रविद् और सूफी थे. मंगोलों के हमले के कारण बहाउद्दीन वलद अपने परिवार के साथ ताजिकिस्तान को छोड़कर इधर-उधर भटकते रहे. इस वजह से रूमी की तालीम भी अलग-अलग जगहों पर हुई. 1228 में उन्होंने तुर्की के कूनिया शहर में आकर एक मदरसा खोला और धार्मिक शिक्षा देने शुरू किया. मौलाना जलालुद्दीन के नाम के साथ रूमी जुड़ने की वजह के बारे में बताया जाता है कि तुर्की पूर्वी रोमन साम्राज्य का हिस्सा रह चुका था, इसलिए उसे रूम भी कहा जाता है. तुर्की में लंबे समय बसने के चलते मौलाना जलालुद्दीन के नाम के साथ रूमी शब्द जुड़ गया. रूमी जीवन के 50 सालों तक तुर्की के कोन्या को अपना ठिकाना बनाया.

रूमी अपने पिता के जीवनकाल से उनके शिष्य सैयद बरहानउद्दीन से पढ़ा करते थे. एक बार रूमी की मुलाकात उस समय के पहुंचे हुए फकीर शम्स तबरेज़ से हुई. शम्स तबरेज का रूमी के जीवन पर बहुत गहरा असर हुआ. शम्स तबरेज ने रूमी को अध्यात्म-विद्या की शिक्षा दी और उसके गुप्त रहस्य बतलाए.

रूमी की सबसे प्रसिद्ध रचना उनकी मसनवी है. यह दुनियाभर में इतनी प्रसिद्ध है कि इसे ‘फ़ारसी में लिखी गई क़ुर्आन’ भी कहा जाता है.

पुस्तक- नि: शब्द नूपुर
लेखक- बलराम शुक्ल
प्रकाशक- राजकमल प्रकाशन
मूल्य- 995 रुपये

Tags: Books

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर