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'प्रतिबंधित साहित्य में गांधी', अंग्रेजी हुकूमत में खौफ पैदा करने वाली कविताओं का संकलन

'प्रतिबंधित साहित्य में गांधी', अंग्रेजी हुकूमत में खौफ पैदा करने वाली कविताओं का संकलन

पुस्तक में उन कविताओं का संकलन है जो तमाम लोगों ने गांधी जी के बारे में लिखी थीं और अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें प्रतिबंधित कर दिया था.

पुस्तक में उन कविताओं का संकलन है जो तमाम लोगों ने गांधी जी के बारे में लिखी थीं और अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें प्रतिबंधित कर दिया था.

'ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबंधित साहित्य में गांधी' (Pratibandhit Sahitya Mein Gandhi) पुस्तक का विमोचन गांधी दर्शन एवं स्मृति समिति में किया गया.

  • News18Hindi
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    Book Release: हम आज़ादी का अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) मना रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आज़ादी के 75वें वर्ष को आज़ादी का अमृत महोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा की है. पूरे वर्ष यह महोत्सव मनाया जाएगा और इस महोत्सव में आज़ादी के उन वीर सिपाहियों (Unsung Heroes of India) को याद किया जा रहा है जो इतिहास के पन्नों पर जगह नहीं बना पाए. ऐसे हज़ारों-लाखों गुमनाम वीर (Freedom fighters) हैं जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए.

    ऐसे समय में हमें राकेश पांडेय के संपादन में प्रकाशित हुई पुस्तक ‘ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबंधित साहित्य में गांधी’ (Pratibandhit Sahitya Mein Gandhi) बरबस ही लोगों का ध्यान आकर्षित करती है. हाल ही में गांधी दर्शन एवं स्मृति समिति (Raj Ghat) में इस पुस्तक का लोकार्पण किया गया.

    पुस्तक का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय (Ram Bahadur Rai), गांधी स्मृति और दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन, गांधी न्यास के निदेशक दीपांकर श्रीज्ञान और राष्ट्रीय अभिलेखागार के सह निदेशक एल. दास मोहपात्रा के करकमलों से हुआ.

    इस पुस्तक में उन गीत, कविता, नारों और लेखों का संकलन है जो तमाम लोगों ने गांधी जी के बारे में लिखे थे और उन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने प्रतिबंधित कर दिया था.

    केंद्रीय संसदीय कार्य और संस्कृति राज मंत्री अर्जुन राम मेघवाल (Arjun Ram Meghwal) ने पुस्तक के बारे में कहा कि यह पुस्तक भारतीय भाषाओं के माध्यम से भारतीय राष्ट्रवाद की स्पष्ट अभिव्यक्ति है और हिंदी लोक साहित्य का अनूठा संग्रह है.

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    उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में प्रकाशित रचनाएं देश के उन अनेक अज्ञात रचनाकारों ने लिखी हैं, जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधी को ना देखा था और ना ही सामने से सुना था. वे तो बस गांधी जी से प्रभावित थे और आज़ादी की लड़ाई में गांधीजी के सिद्धांतों को प्रतिपादित करते हुए रचनाओं को रचा.

    अर्जुन राम मेघवाल (Central Minister Arjun Ram Meghwal) ने कहा कि वैसे तो गांधीजी पर हजारों पुस्तकें हैं लेकिन यह पुस्तक इसलिए सबसे अलग है क्योंकि इसकी रचनाओं को अंग्रेजी शासन ने प्रतिबंधित कर दिया था.

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    गांधी स्मृति और दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल (Vijay Goel) ने कहा कि जैसे-जैसे इस पुस्तक के पन्ने पलटते जाएंगे आपकी रुचि और ज्यादा बढ़ती जाएगी. उन्होंने कहा कि गांधीजी ने अंग्रेजों के खिलाफ देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करने के साथ-साथ रचनात्मक कार्य भी किए, जिनके माध्यम से उन्होंने देश को जात-पात, ऊंची-नीचे से परे हटकर एकजुट होने का संदेश दिया.

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    वरिष्ट पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा कि 1931 में नमक सत्याग्रह देश की आज़ादी का सबसे बड़ा आंदोलन था. उस समय में गांधीजी की प्रेरणाएं संगीत के रूप में, कविताओं के रूप में देश के कोने-कोने में लोगों में क्रांति की लौ जलाने का काम कर रही थीं. कुछ ऐसी ही क्रांतिकारी कविताओं को इस पुस्तक के माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया है.

    वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन (Arvind Mohan) ने पुस्तक के बारे में कहा कि पुस्तक में संकलित कविताओं ने क्रांति पैदा करने का काम किया है. ये कविताएं गांधीजी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रही थीं. पुस्तक में शामिल कविताएं केवल कविता नहीं हैं, बल्कि उस समय के संचार का पूरा माध्यम हैं. ये कविताएं काव्य के सभी मानकों पर खरी उतरती हैं.

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    पुस्तक के लेखक और संपादक राकेश पांडेय (Rakesh Pandey) ने कहा कि राष्ट्रीय अभिलेखागार की फाइलों में दर्ज इन रचनाओं को संकलित करने में उन्हें चार का वक्त लगा. उन्होंने तकरीबन तीन हज़ार कविताएं इकट्ठा की और उनमें से कुछ चुनिंदा रचनाएं लेकर यह पुस्तक तैयार की है.

    राकेश पांडेय अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि इन रचनाओं पर क्रांतिकारियों के उंगलियों के निशान हैं, उनकी कला, उनके जज्बात दर्ज हैं. इन कविताओं के स्पर्श मात्र से ही एक अलग तरह का रोमांच महसूस होता है.

    विभिन्न भाषाओं में रचित ये कविताएं भले ही व्याकरण या काव्य के मानकों की कसौटी पर खरी ना उतरती हों, लेकिन ये लोक विधाएं हैं. इनका संदेश बहुत स्पष्ट है.

    पुस्तक में एक कविता दी हुई है ‘गांधीजी का चरखा’. इस कविता पर 30 मार्च, 1930 पर प्रतिबंध लगाया गया था. आप भी पढ़ें यह कविता-

    हमें ये स्वराज दिलाएगा चरखा
    खिलाफत का झगड़ा मिटाएगा चरखा
    हमको घूं-घूं की धुर्पद सुनाएगा चरखा
    मेरे हौसले सब बढ़ाएगा चरखा

    Tags: Books

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