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दूसरी दुनिया की सैर करता जयंती रंगनाथन का सस्पेंस और थ्रिल से भरा उपन्यास 'शैडो'

जयंती रंगनाथन की ‘आसपास से गुजरते हुए’, ‘औरतें रोती नहीं’, गीली छतरी’, ‘रूह की प्यास’ जैसी कृतियां भी काफी चर्चित रही हैं.

जयंती रंगनाथन की ‘आसपास से गुजरते हुए’, ‘औरतें रोती नहीं’, गीली छतरी’, ‘रूह की प्यास’ जैसी कृतियां भी काफी चर्चित रही हैं.

जयंती रंगनाथन के उपन्यास 'शैडो' (Shadow) को जब पढ़ना शुरू करते हैं तो इसके पात्रों से खुद को जुड़ा पाते हैं. उपन्यास का रोमांच धीरे-धीरे आपको अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर देता है.

– सरस्वती रमेश

पिछले जन्म जैसा कुछ है या नहीं यह रहस्यों से भरा है. इसकी वास्तविकता शोध का विषय बना हुआ है. लेकिन बहुत सारे लोग पिछले जन्म से जुड़ी कहानियां बड़ी दिलचस्पी के साथ सुनते, पढ़ते हैं. अगर आप भी पुनर्जन्म, आत्मा या रूह के किस्सों में दिलचस्पी रखते हैं तो आपके लिए है जयंती रंगनाथन का लिखा बिल्कुल ताजातरीन उपन्यास – ‘शैडो’.

इस उपन्यास में एक लेखक है मयंक. मयंक अपने नए उपन्यास के लिए किरदार की तलाश में है. उसकी मंगेतर पूर्वा ने उसे किसी काव्या की लाइफ स्टोरी बताई. मयंक को स्टोरी दिलचस्प लगी. उसने काव्या के किरदार को शब्दों में उतारना शुरू किया. पहला चैप्टर लिखने के बाद उसके मोबाइल स्क्रीन पर अचानक किसी काव्या के मैसेज आने लगे. मयंक को यह पहेली समझ नहीं आई. वह काव्या की तलाश करने लगा, जो असल में अपने पति के मर्डर के बाद अचानक गायब हो गई है. उसकी तलाश उसे दिल्ली से वायनाड ले गई. वह काव्या की गुत्थी जितना सुलझाने की कोशिश करता वह और भी उलझती जाती. आखिर में गुत्थी सुलझती है रोजर के आश्रम में. पाठक यह जानकर दंग रह जाता है कि जिसे वह अबतक जीता-जागता किरदार के रूप में देख रहा था वह असल में एक रूह है. लेखिका ने बड़ी चतुरता से काव्या के रहस्य से कुछ इस तरह पर्दा उठाया कि काव्या मिलकर भी नहीं मिली.

उपन्यास में मुख्य कहानी के साथ अनेक छोटी, सहायक कहानियां और किरदार हैं. मगर सारे किरदार एक-दूसरे से आश्चर्यजनक रूप से जुड़े हुए हैं. एक बार सस्पेंस शुरू होता है तो वह आखिरी पेज तक बरकरार रहता है. अंत करने के लिए लेखिका ने जिस कल्पनाशीलता का परिचय दिया है उसके लिए वह बधाई की पात्र हैं.

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आज के समय में आत्माओं पर भरोसा करने वाले बहुत कम लोग है. ऐसे में पास्ट लाइफ रिग्रेशन थैरेपी को आधार बनाकर लेखिका ने एक दूसरे दुनिया की, मगर विश्वसनीय लगने जैसी कहानी लिखी है.

“मैनेजर ने मोबाइल में गैलरी खोल कर मयंक के सामने रखा. मयंक के रोंगटे खड़े हो गए. बस उसके सामने दो चमकती हुई आंखें थीं. मयंक बुदबुदाया, “यह क्या है देखो?”

मैनेजर ने देखा तो उसके मुंह से चीख निकल गई. “सर मैंने जब फोटो खींची थी तो एकदम साफ थी. गोल चेहरा था. काले घुंघराले बाल. होठों के ऊपर एक बड़ा तिल. चमकती हुई आंखें. उसने लंबा सा गाउन पहना था.”
“कितने बजे होंगे तब.”
“सर मेरा स्टाफ जा चुका था. इसका मतलब है बारह बज गए होंगे. साढ़े ग्यारह तक तो सब रहते हैं यहां.”

बारह बजे. इसी के आसपास उसकी बस छूटी थी मधु मलाय रिसॉर्ट से.

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कहानी में बेवजह के उल-जलूल थ्रिल पैदा करने की कोशिश नहीं की गई है. सब कुछ रहस्यात्मक होते हुए भी इसी दुनिया से जुड़ा रहा. यही इसे पठनीय बनाता है और विश्वसनीय भी.

उपन्यास की कहानी कई मोड़ों से गुजरती है. फिर भी कहीं भटकती नहीं. हालांकि किरदारों के इस जन्म और पिछले जन्म के कनेक्शन थोड़ा चक्कर में जरूर डालते हैं. कहानी का अंत बढ़िया और मजबूत है. पाठक को मध्य में भी थोड़ा और उतार-चढ़ाव की अपेक्षा हो सकती है. मारिया, उमा और रोजर का किरदार भी रुचिकर हैं. संवाद बढ़िया हैं. हिंदी के पाठकों को थोड़ा थ्रिल होने का मौका.

किताब- शैडो
लेखक- जयंती रंगनाथन
प्रकाशक- हिन्द युग्म
कीमत- 199 रुपये

Tags: Books, Hindi Literature, Literature

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