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जन्मदिन विशेष: भूपेन हज़ारिका के गीतों में असम की खुशबू और गंगा की निर्मलता

जन्मदिन विशेष: भूपेन हज़ारिका के गीतों में असम की खुशबू और गंगा की निर्मलता

भूपेन हजारिका ऐसे विलक्षण कलाकार थे कि वे खुद ही अपने गीत लिखते थे, उन्हें संगीतबद्ध करते और गाते थे.

भूपेन हजारिका ऐसे विलक्षण कलाकार थे कि वे खुद ही अपने गीत लिखते थे, उन्हें संगीतबद्ध करते और गाते थे.

कम्युनिकेशन में पी.एचडी की पढ़ाई के दौरान भूपेन दा की मुलाकात विख्यात अमरीकी अश्वेत गायक पॉल राब्सन (Paul Robeson) से हुई. उन दिनों पॉल राब्सन का लिखा मिसीसिपी नदी पर लिखा गीत ‘ओल्ड मैन रिवर’ (ol man river) धूम मचा रहा था.

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Bhupen Hazarika Birth Anniversary: ‘ओ गंगा तुम बहती हो क्यों’, ‘दिल हूम हूम करे’ जैसे बेहतरीन गानों को अपनी आवाज देने वाले दिग्गज गायक, संगीतकार और गीतकार भूपेन हजारिका (Bhupen Hazarika) का आज जन्मदिन है. भारत रत्न से सम्मानित भूपेन हजारिका ने अपनी खूबसूरत आवाज से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज किया.

भूपेन हजारिका ऐसे विलक्षण कलाकार थे कि वे खुद ही अपने गीत लिखते थे, उन्हें संगीतबद्ध करते और गाते थे. हजारिका ने गीत-कविता लेखन, गायन, फिल्म निर्माण और पत्रकारिता समेत कई विधाओं में काम किया. असमिया साहित्य और संस्कृति को उन्होंने विश्व मंच तक पहुंचाने का काम किया. उन्हें असम रत्न (Assam Ratna) से भी सम्मानित किया गया था.

भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितम्बर, 1926 को असम के सदिया (Sadiya, Assam) में हुआ था. उनके पिता का नाम नीलकांत हजारिका और माता का नाम शांतिप्रिया हजारिका था. भूपेन सात भाइयों और तीन बहनों में सबसे बड़े थे.

प्रारंभिक शिक्षा गुवाहाटी (Guwahati) से पूरी करने के बाद उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के लिए बनारत हिंदू विश्वविद्यायल (Banaras Hindu University) में दाखिला लिया. 1944 में ऑनर्स से स्नातक करने के बाद उन्होंने 1946 में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन में पी. एचडी. की उपाधि प्राप्त की.

भूपेन हजारिका ने 1950 में न्यूयॉर्क में प्रियम पटेल के साथ शादी की.

पहला ब्रेक
भूपेन हजारिका ने कम उम्र से ही गीत लिखना और गाना शुरू कर दिया था. उन्होंने 10 वर्ष की उम्र में पहला गीत लिखा.

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कहा जाता है कि तेज़पुर में एक कार्यक्रम में साल के भूपेन असमिया लोकगीत बोरगीत गा रहे थे. कलागुरू के नाम से विख्यात ज्योति प्रसाद अगरवाला उनके गीत से बहुत प्रभावित हुए. ज्योति प्रसाद अगरवाला ने उनकी 1939 में बनी असमिया फिल्म इन्द्रामालोटि (इंद्रमालती) में 12 वर्ष की आयु में भूपेन हज़ारिका से दो गीत रिकॉर्ड करवाए.

ओ गंगा बहती हो क्यों
हजारिका का नाम आते ही उनका गीत ‘ओ गंगा बहती हो क्यों’ (O Ganga Behti ho kyun) कानों में गूंजने लगता है. बताते हैं कि कम्युनिकेशन में पी.एचडी की पढ़ाई के दौरान भूपेन दा की मुलाकात विख्यात अमरीकी अश्वेत गायक पॉल राब्सन (Paul Robeson) से हुई. उन दिनों पॉल राब्सन का लिखा मिसीसिपी नदी पर लिखा गीत ‘ओल्ड मैन रिवर’ (ol man river) धूम मचा रहा था.

साहित्यकार पंकज राग (Pankaj Rag) ‘धुनों की यात्रा’ पुस्तक में लिखते हैं कि अमेरिका के नीग्रो गायक पॉल रॉब्सन के साथ गाना सीखने जाने पर भूपेन हजारिका को सात दिन की जेल हो गई थी. दरअसल, पॉल रॉबसन अश्वेतों के अधिकारों पर लड़ने वाले एक्टिविस्ट थे.

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पॉल राब्सन के सानिध्य में भूपेन हजारिका ने उसी गीत को बंगाल के शब्दों और संगीत में ढाल के एक यादगार गीत तैयार किया ‘ओ गंगा बहिचे केनो’. हिंदी में यह गीत ‘ओ गंगा बहती हो क्यों’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

यह गीत इस प्रकार है-
नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई
निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यूं ?
इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूं ?

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूं ?

अनपढ़ जन, अक्षरहिन
अनगीन जन, खाद्यविहीन
नेत्रविहीन दिक्षमौन हो क्यूं ?

इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूं ?

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूं ?

व्यक्ति रहे व्यक्ति केंद्रित
सकल समाज व्यक्तित्व रहित
निष्प्राण समाज को छोड़ती न क्यूं ?

इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूं ?

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूं ?

रुदस्विनी क्यूं न रहीं ?
तुम निश्चय चितन नहीं
प्राणों में प्रेरणा देती न क्यूं ?
उनमद अवमी कुरुक्षेत्रग्रमी
गंगे जननी, नव भारत में
भीष्मरूपी सुतसमरजयी जनती नहीं हो क्यूं ?

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार, निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूं?
ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम
गंगा तुम, ओ गंगा तुम
गंगा… बहती हो क्यूं ?

भूपेन हजारिका की आवाज़ में जादू है. जिस किसी के कानों में उनके गीत घुलते, वह उनका दीवाना हो जाता है. ‘रूदाली’ फिल्म का गीत ‘दिल हूम हूम’ करे कानों से होता हुआ सीधे दिल पर असर करता है. उन्होंने आसामी के अलावा हिंदी, बंगाला समेत कई भाषाओं में गीत गाए.

भूपेन हजारिका ने ‘रुदाली’, ‘मिल गई मंजिल मुझे’, ‘साज’, ‘दरमियां’, ‘गजगामिनी’, ‘दमन’ और ‘क्यों’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में गीत दिए. उन्होंने एक हजार से अधिक गाने और 15 किताबें लिखीं.

गीतकार गुलज़ार ने उनके बंगाली और असमिया गीतों का हिंदी में अनुवाद किया. इन गीतों को भूपेन दा ने अपनी एलबम ‘मैं और मेरा साया’ में प्रस्तुत किया.

सम्मान
फिल्मों में उत्कृष्ठ योगदान के लिए उन्हें 1975 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 1992 में फिल्मी दुनिया का सर्वोच्च सम्मान ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ (Dada Saheb Phalke), 2009 में ‘असम रत्न’ और 2011 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया. वर्ष 2019 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna Award) से सम्मानित किया गया.

भूपेन और कल्पना लाजमी (Bhupen Hazarika and Kalpana Lajmi)
भूपेन हजारिका और अभिनेत्री कल्पना लाजमी (Kalpana Lajmi) की प्रेम कहानी भी खूबसूरत और चर्चित रही है. खास बात ये है कि भूपेन के निधन के बाद दोनों की प्रेम कहानी दुनिया के सामने आई.

हिंदी फिल्म ‘आरोप’ (1974) के सेट पर उनकी मुलाक़ात कल्पना लाज़मी से हुई. जानकार बताते हैं कि कल्पना को देखते ही भूपेन उन्हें अपना दिल दे बैठे. जबकि उस समय कल्पना लाजमी की उम्र 17 साल के आसपास रही होगी और भूपेन 40 के पार थे. इस फ़िल्म एक गीत ‘नैनों में दर्पण है, दर्पण है कोई देखूं जिसे सुबहो शाम’ काफी लोकप्रिय रहा.

1985 में कल्पना लाज़मी ने ‘एक पल’ निर्देशित की. इसका संगीत भूपेन दा का ही था.

भूपेन की सबसे ज़्यादा चर्चित फिल्म कल्पना लाज़मी की ‘रुदाली’ (Rudaali Movie 1994) थी. इसके सभी गीत मशहूर हुए. इसका बेहद चर्चित गीत ‘दिल हुम हुम करे’ (Dil Hoom Hoom Kare) भूपेन के असमिया गीत ‘बुकु हुम हुम करे’ का हिंदी अनुवाद था. इस गीत में बोल गुलज़ार के थे.

भूपेन के अंतिम दिनों को याद करते हुए कल्पना लाजमी अपनी किताब ‘भूपेन हज़ारिका : ऐज आई न्यू हिम’ (Bhupen Hazarika: As I Knew Him) में लिखती हैं, ‘उस दिन शनिवार था. मैं कुछ पलों के लिए उन्हें अस्पताल के कमरे में छोड़कर कॉफी पीने गई थी कि डॉक्टर ने आकर बताया कि वे जा रहे हैं. पर कुछ है, जो उन्हें रोक रहा है. मैं भागकर पंहुची, तो देखा भूपेन तड़प रहे थे. चिल्लाकर बोली, ‘जा भूपसु (भूपेन) जा. शक्ति बटोर और जा. मैं तुम्हें आज़ाद कर रही हूं. अपनी मां के पास जाओ.’ भूपेन के शरीर ने उसी पल प्राण त्याग दिए. यह पांच, नवंबर, 2011 की शाम चार बजकर 13 मिनट की बात है.

कल्पना ने इस किताब में बताया है कि वह और भूपेन हजारिका करीब 40 साल तक एकसाथ एक-दूसरे के हमराह और मार्गदर्शक बनकर रहे थे.

2018 में कल्पना लाजमी ने भी 64 साल की उम्र दुनिया को अलविदा कह दिया था.

Tags: Books

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