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इरशाद कामिल को ना 'चेमली' से मिला नाम और ना ही 'शब्द' से दाम, पढ़ें दिलचस्प किस्से

इरशाद कामिल को ना 'चेमली' से मिला नाम और ना ही 'शब्द' से दाम, पढ़ें दिलचस्प किस्से

'काली औरत का ख़्वाब' इरशाद के गीतों और फिल्मी दुनिया की किस्से-कहानियों का संग्रह है. (Image- Irshad Kamil Face Book)

'काली औरत का ख़्वाब' इरशाद के गीतों और फिल्मी दुनिया की किस्से-कहानियों का संग्रह है. (Image- Irshad Kamil Face Book)

'काली औरत का ख़्वाब' किताब में इरशाद कामिल लिखते हैं, ‘शब्द’ (Shabd Movie) मेरे जीवन की पहली और शायद आख़िरी फ़िल्म है जिसमें मांगने पर भी निर्माता ने मुझे एक पैसा नहीं दिया था, और यह वही लोग थे जिन्होंने ‘चमेली’ बनायी थी.

  • News18Hindi
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    Irshad Kamil: इरशाद कामिल हिन्दी-उर्दू के कवि और गीतकार हैं. इन्होंने ‘जब वी मेट’ (Jab We Met), ‘चमेली’ (Chameli), ‘लव आज कल’ (Love Aaj Kal), ‘रॉकस्टार’ (Rockstar Movie) और ‘आशिकी 2’ (Aashiqui 2) सहित कई फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं. फिल्मी दुनिया में इरशाद कामिल पहली पंक्ति के गीतकार हैं.

    उन्हें अपने गीतों के लिए ‘फ़िल्मफेयर’, ‘आइफा’, ‘ज़ी सिने’ समेत लगभग हर फ़िल्मी पुरस्कार मिल चुका है. कई पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं.

    वाणी प्रकाशन‘ (Vani Prakashan) से उनकी एक किताब ‘काली औरत का ख़्वाब‘ (Kaali Aurat Ka Khwab) प्रकाशित हुई है. ‘काली औरत का ख़्वाब’ इरशाद के गीतों और फिल्मी दुनिया की किस्से-कहानियों का संग्रह है. इस किताब में उन्होंने फिल्मी दुनिया के कुछ रोचक प्रसंग प्रस्तुत किए हैं. किताब में इरशाद लिखते हैं, ‘शब्द’ (Shabd Movie) मेरे जीवन की पहली और शायद आख़िरी फ़िल्म है जिसमें मांगने पर भी निर्माता ने मुझे एक पैसा नहीं दिया था, और यह वही लोग थे जिन्होंने ‘चमेली’ बनायी थी.

    आप भी पढ़ें ‘शब्द’ फिल्म को लेकर उनके अनुभव- मुफ़्त में ‘शब्द’

    मुम्बई के जुहू में समन्दर किनारे एक बहुत ही बड़ा और ख़ूबसूरत-सा पांच सितारा होटल है नोवोटेल. लेकिन मैं तब की बात सुना रहा हूं जब मेरा संघर्ष विक्रम और बेताल की कहानी की तरह हर नये दिन के साथ नया मोड़ ले लेता था. तब नोवोटेल होटल का नाम अभी ‘हॉलीडे इन्न’ ही था. इसी ‘हॉलीडे इन्न’ में बुलाया गया था मुझे और सन्देश को ‘शब्द’ की कहानी सुनाने के लिए.

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    लीना यादव इस फ़िल्म का निर्देशन कर रही थीं जो ख़ुद बहुत अच्छी एडिटर और बेहतरीन कैमरामैन असीम बजाज की पत्नी हैं. लीना दिखने में बिन्दास, बातचीत में ख़ुशगवार और समझदार हैं. उनसे मैं एक-आध बार पहले भी मिल चुका था असीम भाई के साथ, क्योंकि असीम ‘चमेली’ के भी कैमरामैन थे और उन्हें उस फ़िल्म के लिए ‘फ़िल्मफेयर’ भी मिला था.

    मैं और सन्देश, दोनों सन्देश की नयी काली गाड़ी में हॉलीडे इन्न की तरफ़ जा रहे थे और सन्देश मुझे जानकारी भी देता जा रहा था. ‘लीना बहुत अच्छी इनसान हैं, एडिटर भी बहुत अच्छी हैं और निर्देशक भी अच्छी ही होंगी.’

    मैंने कहा, ‘बेशक, लेकिन इस फ़िल्म का निर्माता कौन है?’ सवाल सुनकर सन्देश थोड़ा मुस्कुरा दिया.
    मैंने फिर सवाल दागा, ‘क्या हुआ?’
    सन्देश बोला, ‘वही है जिससे तेरी नहीं बनती रोंगिता नन्दी.’
    मैंने कहा, ‘फिर मुझे क्यों ले जा रहे हो यार, हम दोनों के बीच 36 का आंकड़ा है, उसने ‘चमेली’ में मुझे गीतकारी का क्रेडिट नहीं दिया था.’
    उसने कहा, ‘इरशाद फ़िल्म इण्डस्ट्री में दोस्तियां और दुश्मनियां हमेशा की नहीं होतीं …हमने कौन-सा ज़मीन बांटनी है यार काम करना है, आगे बढ़ना है.’
    मैंने कहा, ‘हां मगर…’
    उसने कहा, ‘मैंने बात की थी रोंगिता से, रोंगिता चाहती है कि तुम ये फ़िल्म करो, उसको कोई एतराज़ नहीं है.’
    मैं बोला, ‘उसको क्यों होगा एतराज़, एतराज़ तो मुझे होगा न सन्देश भाई, जब वो मेरा नाम नहीं देगी काम करने के बावजूद.’
    सन्देश बोला, ‘बात करेंगे न उससे.’

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    चुस्त सफ़ेद पैण्ट, बिना बाजू की सफ़ेद टी-शर्ट, कमर पर काली बेल्ट और काला चश्मा लगाये रोंगिता और साथ में निर्देशक लीना यादव जब उस होटल की कॉफ़ी शॉप में पहुंचीं तो मैं और सन्देश पहले से बैठे हुए थे. रोंगिता ने मुझे देख कर कोई भाव नहीं बनाया चेहरे का और मैं भी बहुत सामान्य रहने की बहुत ज़ोर से कोशिश कर रहा था. हालांकि, काफ़ी असामान्यता और बेचैनी अन्दर करवटें बदल रही थी ‘चमेली’ के अनुभव के कारण.

    Irshad Kamil Books

    Image- Irshad Kamil Facebook

    ख़ैर लीना ने कहानी सुनानी शुरू की, मैं और सन्देश कहानी सुन कर सच में धराशायी हो गये. तय हो गया कि इस फ़िल्म का संगीत सन्देश देंगे और गीत मैं लिखूंगा. लेकिन उस मीटिंग के बाद न कोई और मीटिंग ही हुई, न किसी का कोई फ़ोन ही आया. न मुझे कोई जानकारी न शायद सन्देश को.

    एक दिन अचानक मुझे असीम भाई का फ़ोन आया कि घर आइये आपसे कुछ बात करनी है. मैं, लीना और असीम के घर गया तो मुझे लीना ने एक गाना सुनाया ‘खोया खोया’ और पूछा कैसा है. मुझे गाना बहुत अच्छा लगा. सुनाने के बाद उसने कहा मुझे इसमें लिखना है. यानी ये गीत उसकी फ़िल्म ‘शब्द’ का था और अब इसका संगीत विशाल और शेखर दे रहे थे.

    मैंने गीत सुनने के बाद लीना से कहा, ‘ये तो बहुत अच्छा लिखा हुआ गीत है इसमें क्या लिखना है.’
    लीना बोली, ‘इरशाद भाई गीत विशाल ने लिखा है, आपको इसके बीच-बीच में थोड़ी पोएट्री लिखनी है.’
    मैं थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गया, वो समझ गयी कि मैं क्या सोच रहा हूं. वो बोली, ‘इस फ़िल्म के साथ जुड़ने वाले लोगों में कई उतार-चढ़ाव हो गये आप चाहें तो सन्देश से पूछ लें.’

    मैंने सन्देश से बात की. एक पल शायद सन्देश को भी बुरा लगा फिर उसने कहा, ‘इरशाद तुम करो यार फ़िल्म, इस इण्डस्ट्री में ज़्यादा भावुक होकर नहीं चलती ज़िन्दगी. …लीना और असीम अच्छे इनसान भी हैं और दोस्त भी, हम सबको एक-दूसरे का साथ चाहिए. …मेरे हिस्से में ये नहीं तो कोई और फ़िल्म आ जायेगी.’

    सन्देश एक सच्चा दोस्त है और उसने मुझे हमेशा सही रास्ता दिखाने और सही बात समझाने की कोशिश की है. मैंने उसकी बात मानते हुए ‘शब्द’ शुरू कर दी. यह मेरे जीवन की पहली और शायद आख़िरी फ़िल्म है जिसमें मांगने पर भी निर्माता ने मुझे एक पैसा नहीं दिया था, और यह वही लोग थे जिन्होंने ‘चमेली’ बनायी थी. ख़ैर, ‘खोया खोया’ गीत संगीतकार विशाल ददलानी का लिखा हुआ है और बीच-बीच की पोएट्री मेरी है. यहां सिर्फ़ पोएट्री ही दे रहा हूं जो गीत के बीच-बीच में संजय दत्त बोलता है-

    आग कभी कभी रोशनी
    कहीं कहीं शोर रौनकें…

    कहीं आग आग कहीं धुआं धुआं
    कभी आस पास कभी यहां वहां
    कभी शोर हो तुम
    कभी मौन हो तुम
    कौन हो तुम?

    दर्द से गहरे, सोच से ऊंचे, प्यार से उजले
    नक़्श तुम्हारे ज़हन में मेरे धुंधले धुंधले

    तुम्हें नाम दिया है मैंने इक
    तुम्हें शक्ल दे रहा हूं मैं अब
    मासूम नज़र
    भोला चेहरा
    हंसते हुए लब

    इक शब्द हो तुम
    कोई सच हो तुम
    या उलझा हुआ ख़याल हो
    फ़िलहाल तुम इक सवाल हो

    जिसकी तस्वीर निगाहों में
    तस्वीर में देखे रंग कई
    रंगों में मौसम बहार का
    तेरी जीत का मेरी हार का
    इनकार का, इन्तज़ार का
    इकरार का, तकरार का
    फीका सा इक रंग प्यार का
    तेरी सादगी अनमोल है
    किरदार बेमिसाल है
    तू जो भी है कमाल है
    तू ख़याल है या सवाल है
    तेरे सामने जो भी आयेगा
    उसे तुमसे प्यार हो ही जायेगा.

    Tags: Books

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