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हिंदी साहित्य जगत की मशहूर लेखिका मन्नू भंडारी का निधन

हिंदी साहित्य जगत की मशहूर लेखिका मन्नू भंडारी का निधन

बासु चटर्जी ने Mannu Bhandari की कहानी ‘यही सच है’ पर ‘रजनीगंधा’ फिल्म बनाई थी.

बासु चटर्जी ने Mannu Bhandari की कहानी ‘यही सच है’ पर ‘रजनीगंधा’ फिल्म बनाई थी.

सुप्रसिद्ध साहित्यकार राजेंद्र यादव (Rajendra Yadav) की पत्नी मन्नु भंडारी का जन्म 3 अप्रैल, 1931 को मध्य प्रदेश के मंदसौर हुआ था. उनके बचपन का नाम महेंद्र कुमारी था. मन्नू नाम से वह लेखन करती थीं और इसी नाम से मशहूर हुईं.

    हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका मन्नू भंडारी (Mannu Bhandari) का निधन हो गया. वह 90 वर्ष की थीं. ‘महाभोज’ और ‘आपका बंटी’ जैसी कालजयी रचनाओं की लेखिका मन्नू भंडारी ने सोमवार की सुबह अंतिम सांस ली.

    मन्नू भंडारी के निधन से साहित्य (Hindi Sahitya) जगत में शोक की लहर व्याप्त है. तमाम साहित्यकारों, पत्रकारों, फिल्मी दुनिया और राजनीति से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है. सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वाले लोगों का तांता लग गया है.

    मन्नू भंडारी के पिता सुख सम्पतराय भी जाने माने लेखक थे. वर्तमान में वह गुडगांव में अपनी बेटी रचना यादव के पास रहती थीं. बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं. रचना यादव प्रसिद्ध डांसर हैं. पिता राजेंद्र यादव (Rajendra Yadav) की मृत्यु के बाद हंस पत्रिका (Hans Magazine) का संचालन और प्रबंधन रचना यादव ही कर रही हैं.

    मन्नू भंडारी ने हिंदी साहित्य जगत को एक से बढ़कर एक रचनाएं दीं.  प्रसिद्ध निर्देशक बासु चटर्जी ने उनकी कहानी ‘यही सच है’ पर 1974 में ‘रजनीगंधा’ (Rajnigandha Movie) फिल्म बनाई गई.

    Mannu Bhandari Books

    वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार क्षमा शर्मा (Kshama Sharma) ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मन्नू जी अपने समय की सुपर स्टार थीं. अपने समकालीन रचनाकारों में वह एक आदर्श लेखिका थीं.

    Rajkamal

    वरिष्ठ बाल साहित्यकार क्षमा शर्मा कहती हैं कि साहित्य जगत में यह आमतौर पर कहा जाता है कि स्थापित साहित्यकार बच्चों के लिए नहीं लिखता, लेकिन मन्नुजी ने बच्चों के लिए भी खूब लेखन किया.

    क्षमा शर्मा उन्हें याद करती हुई बताती हैं कि मन्नूजी समय से आगे सोचती और लिखती थीं. आज से करीब 50 वर्ष पहले उनका उपन्यास ‘आपका बंटी’ बहुत ही चर्चित हुआ. यह उपन्यास टूटते परिवारों के बीच बच्चों को किस मानसिक यातना से गुजरने की पीड़ा को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है.

    Vani Prakashan

    ‘आपका बंटी’ (Aapka Bunty) को लेकर 1986 में ‘समय की धारा’ नाम से फिल्म बनी थी. हालांकि इस फिल्म के अंत को लेकर मन्नूजी ने अदालत में मामला भी दर्ज कराया था. मुकदमे का फैसला मन्नूजी के पक्ष में आया था. इस फिल्म के अंत में बंटी की मृत्यु दिखाई गई थी, जोकि उनके उपन्यास से अलग थी.

    राजनीति पृष्ठभूमि पर लिखा गया उपन्यास ‘महाभोज’ (Mahabhoj) भी काफी चर्चित रहा है. राजकमल प्रकाशन समूह के राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित महाभोज के अबतक बत्तीस संस्करण आ चुके हैं. इसका पहला संस्करण 1979 में प्रकाशित हुआ था.

    ‘महाभोज’ विद्रोह का राजनीतिक उपन्यास है. यह उपन्यास भ्रष्ट भारतीय राजनीति के नग्न यथार्थ को प्रस्तुत करता है. देश-विदेश की कई भाषाओं में ‘महाभोज’ का अनुवाद हुआ है. ‘महाभोज’ नाटक तो दर्जनों भाषाओं में सैकड़ों बार मंचित हो चुका है.

    ‘बन्दी’, ‘मैं हार गई’, ‘तीन निगाहों की एक तस्वीर’, ‘एक प्लेट सैलाब’, ‘यही सच है’, ‘आंखों देखा झूठ’ और ‘त्रिशंकु’ संग्रहों की कहानियों से उनके व्यक्तित्व की झलक मिलती है. ‘एक कहानी यह’ भी मन्नूजी की आत्मकथ्यात्मक कृति है. बिना दिवारों के घर, उजली नगरी चतुर राजा उनके प्रसिद्ध नाटक हैं.

    बच्चों के लिए उन्होंने ‘आसमाता’, ‘आंखों देखा झूठ’ और ‘कलावा’ जैसी रचनाएं रचीं. पति राजेंद्र यादव के साथ लिखा गया उपन्यास ‘एक इंच मुस्कान’ दुखभरी प्रेमगाथा की कहानी है.

    मन्नूजी को हिन्दी अकादमी, दिल्ली का शिखर सम्मान, बिहार सरकार, भारतीय भाषा परिषद, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, व्यास सम्मान और उत्तर-प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया था.

    Tags: Hindi Literature

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