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जन्मदिन विशेष: सुभद्रा कुमारी चौहान अपने बेटे को सुनाती थीं ये कविता, पोते ने इस तरह किया याद

साहित्य जगत के साथ-साथ राजनीति तथा समाज के अन्य वर्गों से जुड़े लोगों ने अपनी प्रिय कवि सुभद्रा कुमारी चौहान को याद किया है.

साहित्य जगत के साथ-साथ राजनीति तथा समाज के अन्य वर्गों से जुड़े लोगों ने अपनी प्रिय कवि सुभद्रा कुमारी चौहान को याद किया है.

सुभद्रा कुमारी चौहान को बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक था. उन्होंने लेखन के साथ-साथ आज़ादी के लड़ाई में भी सक्रिय भूमि ...अधिक पढ़ें

Subhadra kumari chauhan Birthday: खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी,,कविता की लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान (Subhadra kumari chauhan) का आज 117वां जन्मदिवस है. कहानी-कविता लिखने के साथ-साथ वे स्वत्रंता संग्राम सेनानी भी थीं. उन्हें देशभक्ति से ओत-प्रोत कई कविताओं की रचना की. आज़ादी की लड़ाई में वे जेल भी गईं.

साहित्य जगत के साथ-साथ राजनीति तथा समाज के अन्य वर्गों से जुड़े लोगों ने अपनी प्रिय कवि सुभद्रा कुमारी चौहान (Poetess Subhadra Kumari Chauhan) को याद किया है.

सोशल मीडिया पर उनके चित्रों के साथ उनकी कविताएं लगाकार लोगों ने उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं. उनके जन्मदिन पर गूगल (Google) ने अपना डूडल (Doodle) समर्पित किया है.

सुभद्रा कुमारी चौहान के जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर किया नमन

इस गूगल डूडल (Google Doodle) को न्यूज़ीलैंड की कलाकार प्रभा माल्या ने तैयार किया है. कलाकार ने डूडल में हाथ में कलम लिए साड़ी पहने बैठीं सुभद्रा कुमारी चौहान को दिखाया है. सुभद्रा कुमारी चौहान की तस्वीर के पृष्ठभूमि में घोड़े पर सवार लक्ष्मीबाई (Rani Laxmi Bai) और आज़ादी की मांग में जुलूस निकालते लोगों की तस्वीर उकेरी गई हैं.

Subhadra Kumari Chauhan

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल पर सुभद्रा कुमारी चौहान की जयंती पर उन्हें इस तरह नमन किया है-

Subhadra Kumari Chauhan

राजकमल प्रकाशन समूह ने भी सुभद्रा कुमारी चौहान को याद किया है.

Subhadra Kumari Chauhan

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी उनकी एक कविता की पंक्तियां लिखकर उन्हें अपने श्रद्धा सुमन भेंट किए हैं.

Subhadra Kumari Chauhan

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने सुभद्रा कुमारी चौहान के पोते कार्तिक चौहान का एक वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में कार्तिक अपनी दादी की कविता ‘कदम्ब का पेड़’ का पाठ करते हुए और इस कविता से जुड़ी रोचक बातों को शेयर करते देखे जा सकते हैं.

कार्तिक चौहान ने ‘कदम्ब का पेड़’ कविता लिखने के पीछे का रोचक किस्सा भी शेयर किया. इस वीडियो में सुभद्रा कुमारी चौहान के परपोते ईशान चौहान भी ‘वीरों का कैसा हो वसंत’ कविता का पाठ किया.

सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय (Subhadra Kumari Chauhan Jivan Parichay)
सुभद्रा कुमारी चौहान का 16 अगस्त, 1904 को नागपंचमी के दिन इलाहाबाद के निकट निहालपुर नामक गांव में हुआ था. महज नौ साल की आयु में उन्होंने अपनी पहली कविता ‘नीम’ की रचना की. उन्होंने केवल 9वीं कक्षा तक की ही पढ़ाई की. वे एक रचनाकार होने के साथ-साथ स्वाधीनता संग्राम की सेनानी भी थीं. आज़ादी की लड़ाई में वह दो बार जेल गईं. 1921 में गांधी जी के असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाली वह पहली महिला थीं.

सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘झांसी की रानी’

सुभद्रा कुमारी चौहान की ‘झांसी की रानी’, ‘वीरों का कैसा हो वसंत’ और ‘कदम्ब का पेड़’ कविताएं हिंदी साहित्य जगत की कालजयी रचनाएं हैं.

आप भी पढ़ें उनकी प्रसिद्ध रचना ‘कदम्ब का पेड़’

यह कदंब का पेड़ अगर माँ , होता यमुना तीरे
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे–धीरे

ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली

तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके–चुपके आता
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता

वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता
अम्मा–अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हें बुलाता

सुन मेरी वंशी को माँ तुम इतनी खुश हो जातीं
मुझे देखने काम छोड़ तुम बाहर तक आतीं

तुमको आता देख बांसुरी रख मैं चुप हो जाता
पत्तों में छिपकर धीरे से फिर बांसुरी बजाता

गुस्सा होकर मुझे डांटती, कहती नीचे आजा
पर जब मैं ना उतरता, हंसकर कहतीं ‘मुन्ना राजा’

नीचे उतरो मेरे भैया तुम्हें मिठाई दूंगी
नए खिलौने, माखन-मिसरी, दूध-मलाई दूंगी

मैं हंस कर सबसे ऊपर टहनी पर चढ़ जाता
एक बार ‘माँ’ कह पत्तों में वहीं कहीं छिप जाता

बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता

तुम आँचल फैला कर अम्मा वहीं पेड़ के नीचे
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मींचे

तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे–धीरे आता
और तुम्हारे फैले आँचल के निचे छिप जाता

तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं

इस तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे–धीरे
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।

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