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जन्मदिन विशेष: संसार रुलाने वालों को याद रखता है, हंसाने वालों को नहीं- सुरेंद्र शर्मा

जन्मदिन विशेष: संसार रुलाने वालों को याद रखता है, हंसाने वालों को नहीं- सुरेंद्र शर्मा

हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा का जन्म हरियाणा के नांगल चौधरी गांव, जिला महेंद्रगढ़ के एक वैद्य परिवार हुआ.

हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा का जन्म हरियाणा के नांगल चौधरी गांव, जिला महेंद्रगढ़ के एक वैद्य परिवार हुआ.

बीते साल उनका व्यंग्य संग्रह 'मुझसे भला न कोय' (Mujhse Bhala Na Koy) पढ़ने का मौका मिला. इस संग्रह में उन्होंने खुद अपने ऊपर तमाम व्यंग्य लिखे हैं. अपने जन्मदिन के बारे में भी उन्होंने मजेदार किस्सा लिखा है.

Hasya Kavi Surendra Sharma: हिंदी के विख्यात हास्य कवि और व्यंग्यकार सुरेंद्र शर्मा का आज जन्मदिन है. सुरेंद्र शर्मा आज भी उतने ही सक्रिय हैं जितना वे 80 के दशक में अपनी ‘चार लाईना’ के लिए हुआ करते थे. पद्म श्री से सम्मानित सुरेंद्र शर्मा की कविताओं के दिवाने जितने भारत में हैं, विदेशों में भी उससे कम कतई नहीं हैं.

सुरेंद्र शर्मा (Surendra Sharma) जब हिंदी अकादमी, दिल्ली (Hindi Academy Delhi) के उपाध्यक्ष बने तो उन्हें पहली बार प्रत्यक्ष रूप से देखने और मिलने का मौका मिला. जैसी छवि 1984-85 में उनकी ऑडियो कैसेट चार लाईना (Chaar Laina) के कवर पर देखी थी, साक्षता उसी मूरत को अपने सामने पाया. मानो उम्र ने तो उन्हें छूआ तक ना हो.

उनके सानिध्य में लगातार दो साल काम करने का मौका मिला. हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए इतने गंभीर कि न जाने कितने ही फैसले करा डाले. बच्चों को हिंदी में गिनती-पहाड़ों के ज्ञान के लिए दिल्ली सरकार को कई पत्र लिखे.

हिंदी कवि और लेखकों को प्रमोट करने के लिए सदैव आगे दिखे. हिंदी अकादमी में हिंदी कवि और लेखकों का मानदेय बढ़वाने से लेकर वहां तैनात कर्मचारियों के हक़ में तमाम फैसले बिना बहस के लिए. इस दौरान उन्हें और नजदीक से जानने का मौका मिला.

यह भी पढ़ें- मुझसे भला न कोय: हास्य की मीठी पुड़िया में व्यंग्य की तीखी डोज

जिन दिनों कोरोना अपने चरम था, चारों ओर हा-हाकार मचा हुआ था, ऐसे में सुरेंद्र शर्मा लोगों की मदद के लिए सैदव तैयार रहते थे. हालांकि वे खुद कोरोना की चपेट में आए, लेकिन अपनी परवाह किए बिना वे किसी को ऑक्सीजन तो किसी को अस्पताल में बिस्तर मुहैया कराने के लिए लगातार अपने संपर्कों का इस्तेमाल करते दिखाई दिए. देर रात वे लोगों की सेवा में लगे रहते.

Surendra Sharma Poet

साभार- मुझसे भला न कोय

उनके शिष्य कहें या मित्र कवि चिराग जैन बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सुरेन्द्र जी को फोन किया तो पता चला कि वे रात को एक-डेढ़ बजे एनसीआर के दूर-दराज इलाकों में ऑक्सीजन की तलाश में निकलते हैं और सुबह-सुबह घर लौटते हैं.

चिराग बताते हैं, ‘कोविड के विकराल रूप को देखते हुए मैंने उन्हें ऐसा करने को मना किया. लेकिन उनका उत्तर सुनकर मेरे तर्क ख़ामोश हो गये. वे लापरवाही से बोले – “मैंने अपना जीवन जी लिया है. अब जाते-जाते कुछ लोगों का जीवन बचा जाऊँ तो मरना भी बेकार नहीं होगा.”

kavi surendra sharma

साभार- मुझसे भला न कोय

बीते साल उनका व्यंग्य संग्रह ‘मुझसे भला न कोय’ (Mujhse Bhala Na Koy) पढ़ने का मौका मिला. इस संग्रह में उन्होंने खुद अपने ऊपर तमाम व्यंग्य लिखे हैं. अपने जन्मदिन के बारे में भी उन्होंने मजेदार किस्सा लिखा है.

हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा (Kavi Surendra Sharma) का जन्म 29 जुलाई, 1945 को हुआ था. ‘मुझसे भला न कोय’ (Mujhse Bhala Na Koy) में अपने जन्मदिन के महत्व को वे कुछ इस तरह बताते हैं- ”मैंने 29 जुलाई, 1945 को जन्म लिया था. मैं सदा सहज ही रहा हूं. इसलिए अवतार शब्द का प्रयोग नहीं कर रहा हूं. मेरा जन्म आज के हरियाणा के नांगल चौधरी गांव, जिला महेंद्रगढ़ के एक वैद्य परिवार हुआ. लोकेशन इसलिए बतानी पड़ रही है कि सरकार को अगर मेरे जन्मस्थान को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना पड़े तो उसे किसी तरह की दिक्कत न हो.”

surendra sharma ki kavita

अपने जन्मदिन के महत्व के बारे में भी उन्होंने बहुत ही सुंदर तरीके से व्यंग्य लिखा है.

वे लिखते हैं, ”माधुरी दीक्षित किन फिल्मों में पहले आई, बाद में किन में आई, सब याद है, लेकिन किसी से पूछ लो- भाई उनतीस जुलाई क्यों महत्वपूर्ण है, सब मौन हो जाएंगे.”

‘उनतीस जुलाई के पूरे अखबार छान मारे. कहीं कोई जिक्र नहीं, कहीं कोई शोर-शराबा नहीं, कहीं उत्सव नाम की कोई चीज नहीं. देश में चौबीसों घंटे समाचारों का प्रसारण होता है, कहीं यह नहीं बताया गया कि उनतीस जुलाई इस देश में क्यों महत्वपूर्ण है.’

सुरेंद्र शर्मा आगे लिखते हैं- ’30 जुलाई, 1945 को सुबह का सूर्य कुछ अलौकिक चमक लिए हुए था, सुबह-शाम सुहावनी हो गई थी. उस दिन की आज भी याद आती है तो आंखों से आंसू टपक पड़ते हैं. संसार क्या जानेगा इस तारीख का महत्व, जब देश ही नहीं जान पाया.’

इस देश का शिक्षा विभाग ज़रा भी जागरुक होता तो पाठ्य-पुस्तकों में यह बताया जाता- ‘जानते हो बालको! 29 जुलाई, 1945 का देश के लिए क्या महत्व है?’

सुनते ही सभी बच्चे हाथ खड़ा कर देते और बताते- ‘इस दिन देश के लोकप्रिय हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा का जन्म हुआ था.’

और अंत में लिखते हैं-‘संसार रुलाने वालों को याद रखता है, हंसाने वालों को नहीं.’

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