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राजेंद्र गौतम की प्रेम कविताओं में आज का सन्दर्भ भी है और व्यवहारिकता भी- अलका सिन्हा

गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार राजेंद्र गौतम की तीन रचनाओं का लोकार्पण किया गया.

गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार राजेंद्र गौतम की तीन रचनाओं का लोकार्पण किया गया.

संगोष्ठी में पुस्तक चर्चा के बाद अनिल श्रीवास्तव, राजपाल यादव, मंजू भारती, मेघना शर्मा, सुषमा सिंह, कुसुम सिंह, राजेश प ...अधिक पढ़ें

सुरुचि साहित्य कला परिवार के तत्त्वावधान में एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. गुरुग्राम के सीसीए स्कूल में आयोजित इस संगोष्ठी में पुस्तक लोकार्पण, काव्य-पाठ और कथा चर्चा का आयोजन किया गया. इस अवसर पर प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. राजेंद्र गौतम की तीन पुस्तक ‘आवाज मौसम की’ (गीत संग्रह), ‘ठहरे हुए समय में (कविता संग्रह) और ‘कुछ दोहे इस दौर के ‘(दोहा संग्रह) का लोकार्पण किया गया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता दूरदर्शन के पूर्व निदेशक अमरनाथ ‘अमर ‘ ने की. गजलकार विज्ञान व्रत, साहित्यकार अलका सिन्हा, गीतकार वेद प्रकाश शर्मा और डॉ. राजेंद्र गौतम ने पुस्तकों पर अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम का संचालन मदन साहनी ने किया.

वेद प्रकाश शर्मा ने ‘आवाज मौसम की ‘ संग्रह के विषय पर लेखक के गहन अध्ययन, गीतों की समझ और सामर्थ्य की सराहना की. उन्होंने कहा कि इस संग्रह में प्रकृति के त्रास और सौन्दर्य, दोनों पक्षों की रचनाएं हैं. आरोह, अवरोह और क्रम का ध्यान रखते हुए सन्दर्भ के साथ जोड़कर गीत के प्रति न्याय करने में सहज और स्वाभाविक रचनाकार राजेंद्र गौतम सफल हुए हैं. उन्होंने कहा कि नाद-सौंदर्य और बिम्ब प्रभावशाली बन पड़े हैं. गीतों में प्रेम की शुचिता सराहनीय है. रचनाकार गीतों में डूबा हुआ तो दिखायी देता है, परन्तु रचना पर हावी नहीं होता.

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विज्ञान व्रत ने दोहा संग्रह ‘कुछ दोहे इस दौर के’ पर कहा कि ‘झरबेरी’, ‘कोथली’ और ‘पाला’ जैसी शब्दावली का प्रयोग कर रचनाकार ने नई पीढ़ी पर उपकार किया है. संग्रह से एक दोहा- “पाकर मां की कोथळी, भूल गई सब क्लेश, मन पीहर में जा बसा, तन था इस देश.” उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा राजेंद्र गौतम ने बीते समय को अपनी कविताओं में जिया है. वर्षों महानगरीय जीवन जीने के बावजूद गांव से उनके जुड़ाव और उससे उपजी, रची-बसी संवेदनाओं के लिए वे बधाई के पात्र हैं.

प्रसिद्ध साहित्यकारक अलका सिन्हा ने ‘ठहरे हुए समय में’ कविता संग्रह के विषय पर कहा कि सिद्धहस्त समीक्षक, भाषाविद डॉ. राजेंद्र गौतम ने बीत चुके समय को बटोरने-टटोलने का प्रयास इन प्रेम कविताओं में बखूबी किया है, जिसमे आज का सन्दर्भ भी है और व्यवहारिकता भी. संग्रह को दो खंडो में बांटा गया है- ‘कुछ खुला-खुला’ और ‘कुछ बँधा- बँधा’. दोनों खंडों के भाषागत, शैलीगत और विषयगत बदलाव को महसूस किया जा सकता है. एक तरफ नैसर्गिक प्रेम है तो दूसरी तरफ लौकिक प्रेम. कविताओं में शब्दों का गुंफन, शैली और संवाद देखते बनता है.

त्रिलोक कौशिक ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ‘ठहरे हुए समय में’ संग्रह की कवितायें रचनाकार ने परकाया में प्रवेश कर लिखी हैं. भाषा प्रमाणिक है, जो सहज रूप से विकसित हुई है.

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डॉ. राजेंद्र गौतम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मैंने ईमानदारी से कविता लिखने की कोशिश की है. अपने अनुभव को वाणी देने की कोशिश की है. सामाजिक दायित्व से बचने का प्रयास मैंने नहीं किया है.

अमरनाथ ‘अमर’ ने जहां वक्ताओं के गहराई और बारीकी से किए गए अध्ययन, रचनाओं के मूल्यांकन व सार्थक अभिव्यक्ति की सराहना की, वहीं पुस्तक की सारगर्भित भूमिका के लिए डॉ. कुसुम सिंह को भी बधाई दी . उन्होंने डॉ. गौतम के रचना संसार की विविधता, बिम्ब, सौंदर्य-बोध, अभिव्यक्ति, संवेदात्मक सन्दर्भ और गांव की मिट्टी से जुड़ाव की उन्मुक्त कंठ से सराहना की. उन्होंने नई पीढ़ी को सार्थक मंच प्रदान करने, साहित्य के विशाल जन-समुदाय को जोड़ने के लिए सुरुचि साहित्य कला परिवार के पदाधिकारियों व सदस्यों को साधुवाद दिया.

Tags: Books, Hindi Literature, Hindi Writer, Literature

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