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फिल्म लेखिका कामना चंद्रा की पुस्तक ‘प्रेम-रोग तथा अन्य कहानियां’ का लोकार्पण

कामना चंद्रा के इस कहानी संग्रह में उनकी लिखी गई अब तक कहानियां का सफर समेटकर प्रकाशित किया गया है.

कामना चंद्रा के इस कहानी संग्रह में उनकी लिखी गई अब तक कहानियां का सफर समेटकर प्रकाशित किया गया है.

कामना चंद्रा की छोटी बेटी तनुजा चंद्रा फिल्म निर्देशक और लेखिका हैं. तनुजा चंद्रा ने जख्म, तमन्ना, दिल तो पागल है आदि फ ...अधिक पढ़ें

‘प्रेम-रोग’, ‘चांदनी’, ‘1942 : ए लव स्टोरी’, ‘क़रीब’ और ‘करीब करीब सिंगल’ जैसी फिल्मों की लेखिका कामना चंद्रा का कहानी संग्रह ‘प्रेम-रोग तथा अन्य कहानियां’ हुआ है. वाणी प्रकाशन से आए इस संग्रह का मुंबई में लोकार्पण किया गया. लोकार्पण समारोह में निर्माता-निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा, फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा, लेखक विक्रम चंद्रा, फिल्म निदेशक तनुजा चंद्रा और वाणी प्रकाशन ग्रुप की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल उपस्थित थीं.

पुस्तक के बारे में विधु विनोद चोपड़ा ने कहा कि कामना चन्द्रा ने ये कहानियां मेरी फिल्मों में लिखने से बहुत पहले लिखी थीं. जीवन को देखने का कामना चंद्रा का अपना एक विशिष्ट नजरिया है जिसमें भावनाएं हैं, संवेदनशीलता है और रिश्तों की अहमियत है. उनकी ये कहानियां जीवन के इन्हीं विविध रंगों को अभिव्यक्त करती हैं.

उन्होंने कहा कि कामना चंद्रा के लेखन की यह विशेषता है कि उनका व्यक्तित्व उनकी कहानियों से झलकता है. इस संग्रह की कहानियों में मनुष्य और मनुष्य के बीच के रिश्तों, मनुष्य और समाज के बीच के अन्तर्द्वन्द्वों को जिस गहराई और सूक्ष्मता से अभिव्यक्त किया है वह अद्भुत है. इन कहानियों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और मानवीय सम्बन्धों जैसे जटिल विषयों पर लिखने के बावजूद इन कहानियों में दुरूहता नहीं आने दी गई है. कहानीकार की यह विशेषता है कि वह कहानियों में पठनीयता, मनोरंजकता और नाटकीयता का निर्वाह भलीभांति कर पाया है. यही कारण है कि उनकी ये कहानियां पाठकों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं और लम्बे समय तक याद रह जाती हैं.

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वाणी प्रकाशन ग्रुप की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल ने कहा कि कामना चंद्रा के साहित्य ने फिल्मी दुनिया को समृद्ध किया है. एक महिला होने के नाते पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने जिस प्रकार से एक खूबसूरत पारी खेली वह आने वाली पीढ़ी की लेखिकाओं और लेखकों के लिए विशेष मायने रखती है.

कामना चंद्रा: सरिता से फिल्मी दुनिया का सफर
कामना चंद्रा कथाकार हैं, कवि हैं और नाटककार हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी, अंग्रेजी साहित्य में स्नातक और फिर हिंदी साहित्य में एम.ए. करने के पश्चात् विवाह और घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी उठाने के साथ ही, अपने अनुभवों और हृदय की भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए उन्होंने कलम का सहारा लिया और लिखना शुरू कर दिया. ‘सरिता’, ‘सारिका’, ‘फेमिना’, ‘धर्मयुग’ आदि पत्रिकाओं में लेख तथा कहानियां प्रकाशित हुईं. साथ ही वे ऑल इंडिया रेडियो के लिए वार्ता, कहानी और नाटक लिखने लगीं.

तेजेंद्र शर्मा ने ‘टेम्स नदी के तट से’ लिखा- ‘ये कैसा पंजाब हैं लोग’

पति नवीन चंद्रा का तबादला दिल्ली से मुम्बई हुआ कामना चंद्रा ने मुंबई में अपने रचनाकर्म को नई दिशा और नया आकार दिया. ऑल इंडिया रेडियो, मुम्बई के लिए नाटक, कहानी, वार्ता, लिखने के अलावा ‘विविध भारती’ के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘हवामहल’ के लिए अनेक नाटक लिखे. ‘मुम्बई दूरदर्शन’ के कई कार्यक्रमों में शिरकत की.

कामना चंद्रा ने ‘प्राइड एंड प्रैजूडिस ‘ उपन्यास पर आधारित ‘तृष्णा’ और ‘कशिश’ धारावाहिक लिखे, जिनका प्रसारण ‘मुम्बई दूरदर्शन’ द्वारा किया गया. इसके बाद ‘कुछ इस तरह’, ‘औलाद’, ‘तमन्ना’, ‘वो रहने वाली महलों की’ आदि धारावाहिक टी.वी. पर प्रसारित हुए. मायावी नगरी के शोमैन राज कपूर ने उनकी एक कहानी पर फ़िल्म बनाने का निर्णय ले लिया और ‘प्रेम-रोग’ के रूप में कामना चंद्रा की कहानी ने लोकप्रियता की नई मिसाल कायम की. इसके बादज यश चोपड़ा की ‘चांदनी’ की कामयाबी ने कामना चंद्रा के लेखन को पंख दे दिए. कामना चंद्रा ने विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘1942 : ए लव स्टोरी’ और ‘करीब’ के लिए कहानी के अलावा पटकथा और संवाद भी लिखे. अरुणा राजे की फिल्म ‘भैरवी’ की कहानी, पटकथा तथा संवाद लिखने का अवसर मिला. तनुजा चंद्रा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ कामना के लिखे एक रेडियो नाटक पर आधारित है.

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