• Home
  • »
  • News
  • »
  • literature
  • »
  • जन्माष्टमी 2021: श्रीवल्लभाचार्य के 'मधुराष्‍टकम्' में है श्रीकृष्ण के सौन्दर्य का अद्भुत वर्णन

जन्माष्टमी 2021: श्रीवल्लभाचार्य के 'मधुराष्‍टकम्' में है श्रीकृष्ण के सौन्दर्य का अद्भुत वर्णन

श्रीवल्लभाचार्यजी (Vallabhacharya) द्वारा रचित 'मधुराष्टकम्' बहुत ही अनूठी रचना है.

श्रीवल्लभाचार्यजी (Vallabhacharya) द्वारा रचित 'मधुराष्टकम्' बहुत ही अनूठी रचना है.

‘मधुराष्टक’ स्तोत्र में वल्लभाचार्यजी ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप, गुण, चरित्र, लीला आदि के माधुर्य को अत्यंत मधुर शब्दों और भावों से निरूपित किया है.

  • Share this:

Krishna Jayanti 2021: महायोगी भगवान कृष्ण का आज जन्मदिवस है. भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि को 64 कलाओं में निपुण भगवान श्रीकृष्ण (Shrikrishna) ने मथुरा में जन्म लिया था. यह दिन हर वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में बड़ी ही धूमधाम और भक्तिभाव से मनाया जाता है. लोग अपने आराध्य देव श्रीकृष्ण की अनेक विधियों से पूजा-अर्चना और वंदना करते हैं.

श्रीकृष्ण को किसी ने किसी ने अपना आराध्य देव माना है तो किसी ने सखा, कोई प्रेमी के रूप में इनकी आराधना करता है तो कोई बालक (लड्डू गोपल-Laddu Gopal) के रूप में. श्रीकृष्ण की भक्ति में अनेकानेक ग्रंथ, साहित्य, गीत, भजन, मंत्र, स्तोत्र आदि लिखे गए हैं.

इस क्रम में श्रीवल्लभाचार्यजी (Vallabhacharya) द्वारा रचित ‘मधुराष्टकम्’ (Madhurashtakam) बहुत ही अनूठी रचना है. श्रीवल्लभाचार्य भक्तिकालीन सगुणधारा की कृष्णभक्ति शाखा के आधारस्तंभ एवं पुष्टिमार्ग (pushtimarg) के प्रणेता थे. वर्तमान में इसे वल्लभसम्प्रदाय या पुष्टिमार्ग (pushtimarg) सम्प्रदाय के नाम से जाना जाता है.

श्रीवल्लभाचार्य (Sri Vallabhacharya) ने अनेक भाष्यों, ग्रंथों, नामावलियों, एवं स्तोत्रों की रचना की है, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित ये सोलह सम्मिलित हैं, जिन्हें ‘षोडश ग्रन्थ’ के नाम से जाना जाता है. इन्हीं रचनाओं में से एक है ‘मधुराष्टक’ स्तोत्र.

‘मधुराष्टक’ स्तोत्र में वल्लभाचार्यजी ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप, गुण, चरित्र, लीला आदि के माधुर्य को अत्यंत मधुर शब्दों और भावों से निरूपित किया है.

वर्तमान में भी यह बहुत ही लोकप्रिय भजन, वंदना है. मधुराष्टकम् स्‍तोत्र संस्‍कृत में होने के बावजूद गाने और समझने में बहुत आसान है. इसमें कृष्‍ण और उनकी मनोहारी लीलाओं का वर्णन किया गया है. इसमें बताया गया है कि प्रभु श्रीकृष्ण का हर अंग, हर छवि और हर कार्य बहुत ही सुंदर है, मधुर है. उनके संपर्क में आने से अन्य सजीव और निर्जीव वस्तुएं भी मधुरता को प्राप्त कर लेती हैं. इसलिए वे सौन्दर्य में सर्वश्रेष्ठ मधुराधिपति हैं.

जन्माष्टमी (janmashtami) के अवसर पर आप भी मधुराष्टकम् स्‍तोत्र से अपने इष्ट देव की आराधना करें-

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरं॥

मधुराधिपति का सब कुछ मधुर (अति सुंदर, मनोहर) है. उनके होठ मधुर हैं, मुख मधुर है, नेत्र मधुर हैं और उनका हंसना भी मधुर है. श्रीकृष्ण का ह्रदय बहुत ही मधुर है और उनकी गति भी बहुत ही मनोहारी है. मधुराधिपति का सभी कुछ मधुर है.

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरं॥

श्रीकृष्ण के वचन मधुर हैं, उनका चरित्र मधुर है, उनके वस्त्र बहुत ही मधुर हैं, उनका तिरछा खड़ा होना मधुर है. आपका चलना मधुर है, धूमना मधुर है. आप मधुरता के ईश हैं, आपका सब कुछ मधुर है.

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरं॥

हे प्रभु! आपकी बांसुरी मधुर है, आपके श्रृंगार में चढ़ाए गए पुष्प मधुर हैं, आपके हाथ मधुर हैं, आपके चरण मधुर हैं. आपका नृत्य मधुर है, आपकी मित्रता भी बहुत मधुर है. मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है.

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरं।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं॥

आपके गीत मधुर हैं, आपका पीना मधुर है, खाना मधुर है, आपका सोना भी मधुर है. श्रीकृष्ण का रूप मधुर है, आपके माथे पर लगा तिलक भी मधुर है. सौन्दर्य के ईश्वर श्रीकृष्ण आपका सब कुछ मधुर है.

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरं।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरं॥

आपके कार्य मधुर हैं. आपका तरण करना (दुखों से पार लगाना) मधुर है, आपका हरण (दुखों को दूर) करना भी मधुर है. आपका रमण करना, किसी में वास करना मधुर है, उद्धार करना मधुर है, आपका शांत रहना मधुर है. हे कृष्ण, श्री मधुराधिपति का सभी कुछ मधुर है.

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतरखिलं मधुरं॥

आपकी गुंजा मधुर है, माला भी मधुर है. यमुना मधुर है, उसकी लहर मधुर हैं, उसका जल मधुर है और कमल भी अति मधुर है. मधुराधिपति श्रीकृष्ण का सभी कुछ मधुर है.

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरं।
दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरं॥

आपकी गोपियां मधुर हैं. आपकी लीलाएं बहुत मधुर हैं. उनका संयोग (साथ) मधुर हैं और उनसे मुक्त होकर भी आप मधुर हैं. आपका देखना मधुर है, आपका शिष्टाचार मधुर है. श्रीकृष्ण आप सभी प्रकार से मधुर हैं.

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरं॥

आपके सखा मधुर हैं. आपकी गाय मधुर हैं, आप हाथ में जो छड़ी लिए हुए हैं वह भी बहुत मधुर है. आपकी रचना मधुर है तो आपका विनाश करना भी मधुर है. हे भगवान् कृष्ण, मधुराधिपति आप सभी प्रकार से मधुर हैं.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज