Home /News /literature /

बाल मंच: वरिष्ठ साहित्यकार क्षमा शर्मा की कहानी 'तितली ने कहा'

बाल मंच: वरिष्ठ साहित्यकार क्षमा शर्मा की कहानी 'तितली ने कहा'

बाल मनोविज्ञान हो या स्त्री विमर्श साहित्यकार-पत्रकार क्षमा शर्मा की कलम हर मुद्दे पर बड़ी बेकाकी से चलती है.

बाल मनोविज्ञान हो या स्त्री विमर्श साहित्यकार-पत्रकार क्षमा शर्मा की कलम हर मुद्दे पर बड़ी बेकाकी से चलती है.

क्षमा शर्मा बाल साहित्य की वरिष्ठ लेखिकाओं में से एक हैं. बच्चों के मन को समझकर और उनकी जिज्ञासाओं का निदान करते-करते कहानी गढ़ देना क्षमा शर्मा की सबसे बड़ी विशेषता है.

    पत्रकार और साहित्यकार क्षमा शर्मा (kshama sharma) बाल साहित्य (Bal Sahitya) की वरिष्ठ लेखिकाओं में से एक हैं. बच्चों के मन को समझकर और उनकी जिज्ञासाओं का निदान करते-करते कहानी गढ़ देना क्षमा शर्मा की सबसे बड़ी विशेषता है. आप परियों के माध्यम से, पेड़-पौधे-फूलों के माध्यम से, पशु-पक्षियों के माध्यम से बच्चों की परवरिश की नींव में शिक्षा और संस्कार भरने का काम करती हैं.

    'तितली ने कहा' कहनी में क्षमा शर्मा (Baal Sahityakar Kshama Sharma) बच्चों को बड़ों का सम्मान करने और किसी के रंग-रूप पर टिप्पणी नहीं करने की शिक्षा देती हैं.

    'तितली ने कहा'
    -क्षमा शर्मा

    पार्क की घास के बीच अन्न के दाने, कुछ चिप्स, ब्रेड और बर्गर के टुकड़े बच्चों ने खाते-खाते गिरा दिए थे. खा-पीकर, जी भरकर खेलकर, दोपहर के वक्त जब बच्चे अपने-अपने घरों को चले गए थे, तो उन दानों को चुगने के लिए गौरैय्या, गुरसलें और गिलहरियां आ पहुंची थीं. इन सबमें ज्यादा से ज्यादा खाने की होड़ लगी थी. वे घास में इधर-उधर मुंह मारकर खाने की कोशिश कर रही थीं. कोई एक-दूसरे का हिस्सा न हड़प ले, इसके लिए वे एक-दूसरे को डराकर भगाने की कोशिश भी कर रही थीं.

    गौरैय्या और गुरसलों को गिलहरियां पीछा करके दूर तक भगा आतीं, लेकिन वे फिर से आ पहुंचतीं. चिड़ियां पेड़ पर जा बैठतीं तो गिलहरियां उनके पीछे जातीं, तनों पर उछलती कूदतीं शाखों पर पहुंचने की कोशिश करतीं.

    गिलहरी और चिड़ियों की इस लड़ाई को रंग-बिरंगी तितली देख रही थी. उसकी समझ में नहीं आया कि वे सब आपस में क्यों लड़ रहे हैं. तितली दाना चुगती गिलहरी के पास पहुंची और बोली-मौसी क्या बात हो गई. वे चिड़ियां तुमसे क्या कह रही हैं, जो तुम उनके पीछे भाग रही हो.

    अरे कहेंगी क्या, जैसे-तैसे आज इतने दिनों बाद अनाज के कुछ दाने मिले हैं खाने को. न जाने कब से खेतों का मुंह तक नहीं देखा. खेत तो हैं भी इतनी दूर यहां से. फिर खेत तक जाने के लिए उस सड़क को कैसे पार करें, जिस पर इतनी कारें दौड़ती हैं कि हम तो उनके नीचे पिचकर ही मर जाएंगे. इसलिए यहीं कुछ दाना-पानी ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं. अब आज यहां कुछ अन्न के दाने मिल रहे हैं, तो ये नासपीटी चिड़ियां आ मरीं.

    क्या कहा मौसी नासपीटी, नासपीटी हा..हा..हा..हा. चिड़ियां तुम्हें चाहे जितनी लड़ाका समझें, मगर हो तो तुम बहुत प्यारी.–कहती हुई तितली उड़ गई. वहां से वह एक नीबू के पौध पर जा बैठी. वहां एक कौआ पहले से बैठा था. उसने तितली से पूछा –उस गिलहरी से क्या गुपचुप बातें कर आईं. लगता है, कोई अच्छी बात पता चली है, तभी इतनी हंसती हुई लौटी हो.

    गुपचुप बातें करूं या कुछ और तुझे इससे मतलब, तू क्या हमारी बातों पर कान लगाए था, कलमुंहे. नासपीटा कहीं का. -तितली ने गिलहरी की नकल उतारी.

    गिलहरी से अच्छी बातें सीखने की बजाए, तू उससे गाली देना सीख आई. तुझ जैसी चमकदार तितली को क्या यह शोभा देता है कि ऐसी भाषा बोले. सही कहा है न कि बुरी संगत का बुरा नतीजा.

    मुझे क्या शोभा देता है क्या नहीं, तू बताने वाला कौन. पहले मुझ जैसे चमकीले रंग तो ले आ, तब मुझे टीचर की तरह समझाना. चला है बड़ा दुनिया को अकल सिखाने. काला-कलूटा कहीं का.

    कौए को तितली की बातें सुनकर बहुत दुख हुआ. आखिर वह काला है तो क्या हुआ, यह रंग तो उसे प्रकृति या भगवान ने दिया है. बिल्कुल वैसे ही जैसे तोते को हरा बनाया है और बत्तख को सफेद. रंग से कोई छोटा-बड़ा थोड़े ही होता है. मगर कौआ तितली से लड़ना नहीं चाहता था. वह तो उसे अच्छी बात बता रहा था. अब वह नहीं सुनना चाहती, तो उसकी मर्जी, कोई बात नहीं.

    कौआ उड़कर अशोक के पेड़ पर जा बैठा. तितली ने यह देखा तो वहीं आ पहुंची-क्यों डर गया. मुझ जैसी जरा सी तितली से डर गया तो और किसी से क्या लड़ेगा. वैसे बनता है बड़ा भारी पहलवान।– कौए को चिढ़ाती हुई तितली वहां से उड़ गई. उड़ते-उड़ते वह एक गुलाब के फूल पर जा पहुंची.

    आ गई फ्री का रस चूंसने.–गुलाब ने सोचा और तितली से बचने के लिए मुंह दूसरी ओर फेर लिया. तितली ने उसकी तरफ मुड़ने की कोशिश की तो गुलाब के कांटे में उसका पंख उलझ गया. वह जोर से चीखी तो गुलाब को बहुत अफसोस हुआ. न वह मुंह फेरता, न तितली उसकी तरफ आती, न उसे कांटा चुभता, चोट लगती. बेचारी अब दर्द से कराह रही है. क्या पता अब उड़ भी पाएगी या नहीं.

    दूर बैठा कौआ भी यह देख रहा था. हालांकि, तितली ने अभी-अभी उसे चिढ़ाया था, उसका मजाक उड़ाया था, लेकिन वह उसकी तरफ उड़ा. उसे लगा, माना कि तितली ने उसके साथ बुरा बर्ताव किया था, मगर इस वक्त वह मुश्किल में थी. उसे मदद की जरूरत थी. तितली की चीख पास ही दाना चुगती गुरसल, गौरैय्या और गिलहरियों ने भी सुनी थी, वे सब भी उसके पास आ पहुंचीं.

    कौए ने अपनी चोंच की मदद से तितली के कांटे में उलझे हुए पंख को निकाला. गिलहरी ने उसके सिर पर अपना हाथ फेरा. चिड़ियों ने कहा कि उसके पंख में चोट लगी है, उसे उड़ने में दिक्कत होगी, वह उनमें से किसी की पीठ पर बैठ जाए. वे उसे उसके घर पहुंचा देंगी.

    उनकी बातें सुनकर तितली अपना दर्द भूल गई. उसने कहा-माफ करना कौए भाई मैंने आपका दिल दुखाया था. अब मैं कभी किसी का दिल नहीं दुखाऊंगी. जल्दी ही उसने अपने अंदर ताकत महसूस की और सबको धन्यवाद देती उड़ गई.

    साहित्यकार क्षमा शर्मा (Hindi Writer Kshama Sharma)
    क्षमा शर्मा की बच्चों के लिए 40 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनकी किताबों का अनेक भाषाओं में प्रकाशन हुआ है. आपने मशहूर बाल पत्रिका 'नंदन' में 37 वर्षों तक काम किया और लंबे समय संपादक रहीं. हिन्दी अकादेमी-दिल्ली क्षमा शर्मा को तीन बार तीन बार सम्मानित कर चुकी है. भारत सरकार के सूचना मंत्रालय ने उन्हें 'भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार' से पुरस्कृत किया है. क्षमा शर्मा के लेखन पर एक विश्वविद्यालय में शोधकार्य सम्पन्न हो चुका है और छह विश्वविद्यालयों में शोधकार्य जारी है. रेडियो-दूरदर्शन पर आपकी कई कहानियों का नाट्य रूपातंरण प्रसारित हो चुका है. आप देशभर में प्रत्यक्ष तथा बच्चों के लिए स्टोरी टेलिंग करती रही हैं.

    Tags: Books

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर