वरिष्ठ कथाकार महेश दर्पण की कहानी 'क्या वह अब मान जाएगी!'

महेश दर्पण की कहानियों के केंद्र में आसपास घट रही छोटी किंतु जीवन को प्रभावित करने वाली चीजें, पात्र और स्थितियां होती हैं.

महेश दर्पण की कहानी पढ़ते हुए आप अपनी खुद की दुनिया में पहुंच जाते हैं. कहानी 'क्या वह अब मान जाएगी!' में कोरोना काल में लंबे समय से घर कैद बच्ची की उसकी मां और अम्मा के बीच नटखट संवाद तथा बच्ची की इंटेलिजेंसी आपको बांधे रखती है.

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    जंगले पर धूप क्या आती, वह ज़िद करने लग जाती, "चलो, वहां बैठेंगे!"
    उसने कह दिया, तो फिर कह दिया. दुनिया की कोई दूसरी ताकत ऐसी नहीं जो वहां बैठने से उसे रोक सके.
    पलक ने दो-एक बार काम का बहाना किया भी तो झट उसने पलक का हाथ थाम लिया, "चलो न अम्मा, धूप में बैठने से कोरोना नहीं होता."
    ऐसे में पलक भला क्या कर सकती थी! आगे-आगे मीठी, पीछे-पीछे पलक.

    कोरोना हॉरर की वज़ह से स्कूल तो बंद हुए ही, मीठी की ज़िद के चलते उसकी ममा ने ऑनलाइन क्लास से निबटने की तरकीब भी खोज ली. मीठी को कौन-सा टीचर का लेक्चर अटेंड करना है! जिस दिन फेस टु फेस हुआ, उठा दिया. नहीं तो मीठी का प्रोजेक्ट तैयार कर वीडियो बना टीचर को भेज दिया. हो गया काम! एक बार ‘गुड मॉर्निंग मैम’ किया और फिर रजाई में दुबक जाने वाली हुई मीठी. लाख कोशिश करो उठाने की, नहीं उठना है तो नहीं उठेगी.

    उसकी अम्मा भी कहती है, "अरे हो गई न पढ़ाई! इतने छोटे बच्चे को स्कूल भेजना, ठंड में जल्दी उठने को मजबूर करना ज्यादती हुई कि नहीं! हमारे समय में तो पांच साल से पहले स्कूल के दर्शन तक नहीं होते थे कहा. अब ये घर-घर स्कूल क्या खुल गए, पैदा होते ही भेज दो स्कूल. और अब स्कूल बंद हैं, फिर भी पढ़ाई चल रही है. ये भी कोई बात हुई भला!"

    अम्मा यानी दादी की शै पाकर मीठी और मनचाही करने लगती है. स्कूल खुले थे तो चलो रोज़ नए-नए खेल और नए फ्रेंड्स के बहाने चली भी जाने वाली हुई, लेकिन जब से ऑनलाइन का क्रम शुरू हुआ है वह बेमन से ही पढ़ने को राज़ी होती है.

    आज सुबह उसकी मम्मी ने अम्मा को बताया है, "थर्टी तक काउंटिंग करनी है इसे, पर इलैवन-ट्वैल्व के बाद खेल में मगन हो जाती है. मैं तो हार चुकी, अब आप ही कुछ कीजिए!"
    अम्मा को याद है बहू की बात. जंगले में बैठे-बैठे वह बहू को आवाज़ देती हैं, "सुन बेटी, ज़रा मीठी का गोटी वाला डिब्बा पकड़ा दीजो."

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    मीठी सुन रही है. समझ रही है कि अम्मा ने मम्मी को डिब्बा लाने को कहा है. मम्मी को न आता देख, वह जोर से आवाज़ देती है, "मम्मा ऽऽ ए मम्मा ऽऽ देखो अम्मा क्या कह रही हैं...."
    जब तक मीठी की मम्मी डिब्बा लेकर आए, तब तक मीठी अम्मा से जानकारी बढ़ाने लगती है, "अम्मा, ये दीजो क्या होता है?"
    "दीजो? क्या दीजो?"
    "अरे, अभी तुमने मम्मा से कहा न- ‘गोटी वाला डिब्बा पकड़ा दीजो’. मैं पूछ रही हूं- दीजो मीन्स?" मीठी ने अम्मा को समझाते हुए पूछा.
    अम्मा ने उसे बताया- "दीजो मतलब, दे दे!"
    "ओ के." मीठी संतुष्ट हो गई है.

    वह गली में खेलते बच्चों को देखने में लगी हुई थी कि उसकी मम्मी गोटी वाला डिब्बा अम्मा को थमा गई. अम्मा ने डिब्बा खोल, लाल, हरी, पीली, नीली, सफेद और काली गोट निकाल कर रख लीं. अभी वह डिब्बा बंद कर ही रही थीं कि मीठी पलटी, "अच्छा, तुम चुपके-चुपके मेरी गोटों से खेल रही हो अम्मा!"
    "सॉरी बेटा. चलो हम दोनों खेलते हैं!"

    अम्मा ने गलती स्वीकार करते हुए कहा तो मीठी बैठ गई. वह खुश थी कि अम्मा ने उसे सॉरी कहा है, "कोई बात नईं अम्मा. आप कौन-सी गोट लोगी?"
    "मुझे लाल वाली दे दो."
    "लाल क्यों?"
    "हरी हरावै लाल जितावै."
    "नहीं. तब तो लाल गोट मैं लूंगी." मीठी ने झट से लाल गोट एक तरफ रख लीं.
    "अच्छा तो मुझे हरी गोट दे दो बेटा."
    "हरी मीन्स?"
    "ग्रीन कलर वाली. जो हार जाती हैं."
    "ओ के. येल्लो, ये ग्रीन वाली, हरी गोट तुम ले लो!" मीठी ने पांच हरी गोट खुशी-खुशी अम्मा की तरफ सरका दीं.
    अम्मा ने भोली बनकर पूछा, "मीठी तुम्हारी लाल गोट कितनी हैं?"
    मीठी गिन रही है- "वन, टू, थ्री, फोर... फाइव. फाइव गोट हैं अम्मा."
    "और ये मेरी वाली ग्रीन गोट कितनी हैं?"
    "अरे बाबा, ये भी फाइव हैं!"
    "अच्छा! तुम्हारी और मेरी वाली मिलाकर कितनी हो जाएंगी बेटा?"
    मीठी खुश है कि अम्मा को ये भी नहीं पता. वह काउंट कर रही है, "वन, टू, थ्री... सिक्स, सेवन..नाइन, टैन." अम्मा, टैन हो जाएंगी. तुम्हारी-मेरी मिला कर टैन गोट."
    अम्मा खुशी से कह रही हैं- "वाओ! टैन मीन्स?"
    "अरे अम्मा, तुम्हें ये भी नहीं पता! वन, जीरो टैन. टैन मीन्स दस होता है बाबा!"
    "ओ के बेटा. चलो अब तुम यलो लोगी या ब्लू वाली?"
    "मैं ब्लू लूंगी, तुम लो यलो. मुझे यलो अच्छी नहीं लगती अम्मा."
    "ओ के. मुझे मेरी फाइव यलो गोट दे दो, तुम अपनी फाइव ब्लू ले लो."
    मीठी गिन रही है, "वन, टू, थ्री...फाइव. ये लो अम्मा, आपकी यलो गोट. वन, टू...फोर, फाइव. ये मेरी वाली ब्लू."

    अम्मा ने अपनी हरी गोट के साथ पीली गोट रख ली हैं. उन्हें ऐसा करता देख मीठी ने भी झट से अपनी रेड गोट के साथ ब्लू रख ली हैं.
    "मीठी, अब तुम्हारी कितनी गोट हो गईं?" मीठी खुश होकर काउंट कर रही है- "वन, टू, थ्री...एट, नाइन टैन. टैन हो गईं अम्मा. टैन मीन्स?"
    "दस."
    "यस." मीठी खुश है.
    अम्मा उसकी खुशी के बीच ही अपनी हरी-पीली गोट सरकाते हुए पूछती हैं, "अब मेरी और तुम्हारी मिलाकर कितनी हो गईं मीठी?"
    मीठी की काउंटिंग चालू हो गई है, "वन, टू...फाइव, सिक्स...टैन, इलैवन...सिक्सटीन, सैवनटीन...नाइनटीन एंड ट्वैंटी. टोटल ट्वैंटी हो गईं अम्मा!"
    अम्मा खुश हैं कि खेल-खेल में टास्क पूरा हुआ जा रहा है. वह बची हुई गोट खिसकाते हुए पूछ रही हैं, "तुम सफेद वाली लोगी या काली गोट?"
    "सफेद मीन्स?" मीठी पूछ रही है.
    "व्हाइट."
    "ओ के. मैं व्हाइट वाली लूंगी. तुम ब्लैक ले लो अम्मा."
    अम्मा ब्लैक गोट अपनी तरफ सरका रही हैं. मीठी फुर्ती से व्हाइट गोट अपनी तरफ कर रही है.
    अम्मा काउंट करने का नाटक कर रही है, "वन, टू ऽऽ"
    "नहीं. तुम नहीं. मैं करूंगी काउंट." मीठी साधिकार आंखें चढ़ाकर कहती है.
    "ओ के बेटा. तुम ये इतनी सारी गोट काउंट कर लोगी?"
    "यस. मैं कर लूंगी. तुम से इतनी सारी गोट काउंट नहीं होंगी अम्मा." मीठी सगर्व समझा रही है.
    "वाओ. मेरी बेटी तो सब काउंट कर लेती है." अम्मा समझ रही हैं कि मीठी उनकी चाल में फंसती जा रही है.

    मीठी की काउंटिंग चालू है- "वन-टू, थ्री-फोर...टैन-इलैवन, ट्वैल्व-थर्टीन...ट्वैंटी-ट्वैंटी वन, टवैंटी टू- ट्वैंटी थ्री....ट्वैंटी सेवन-ट्वैंटी एट, ट्वैंटी नाइन-थर्टी ऽऽ. अम्मा अब ये टोटल गोट हो गईं थर्टी."
    हरी गोट नीली में, पीली लाल में और काली सफेद में मिल गई हैं. मीठी ने सारी गोट अपनी तरफ सरका ली हैं- "अम्मा, अब ये सारी की सारी, थर्टी गोट मेरी हो गईं. ठीक है!"
    "ठीक है बेटा! ये सारी गोट कितनी काउंट की हैं तुमने?"
    "अरे अम्मा, तुम क्या ध्यान से नहीं सुनतीं. थ्री जीरो थर्टी हो गईं न! अब तुम्हारे पास बचा अंडा."
    "अंडा! कहां है अंडा?" अम्मा ने भोलेपन से पूछा.
    "अरे अंडा मीन्स जीरो!" मीठी अम्मा की नासमझी पर हैरान हो उन्हें बता रही है.
    "ओ के." अम्मा का समझ में आ जाने का नाट्य जारी है.
    धूप है. खुशी है. काउंटिंग है. गोट हैं. मीठी है. अम्मा हैं.
    "हो गई रिकार्डिंग अम्मा." भीतर से मीठी की मम्मी की आवाज़ आ रही है. वह बता रही है, "टीचर को मैंने ऑडियो सेंड कर दिया अम्मा."

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    गली में बच्चे खेल रहे हैं. पड़ोस का बच्चा अपनी सीढ़ी पर से कूद रहा है.
    पलक उसे देख घबरा रही हैं, "अरे, तुम कहीं गिर मत जाना बेटा!"
    वह एक बार फिर कूद जाता है, "अरे, मैं तो बहादुर हूं! बहादुर कभी नहीं गिरते अम्मा."
    "हां बेटा, पूरे हिन्दुस्तान में तू ही सबसे बहादुर है." अम्मा उससे सहज भाव से कह रही हैं. पर मीठी से यह कंप्लीमेंट दूसरे बच्चे के लिए बर्दाश्त नहीं होता, "नईं. वो नईं है हिन्दुस्तान में सबसे बहादुर. अम्मा, मैं हूं हिन्दुस्तान में सबसे बहादुर!"
    "ओ के बेटा. तू है सबसे बहादुर हिन्दुस्तान में. वो नहीं है. ठीक!" अम्मा घबरा गई हैं, अब कहीं मीठी भी उस बच्चे की तरह कूदने की ज़िद न करने लगे.
    बहादुरी का खिताब मिलते ही मीठी संतुष्ट हो गई है.
    कूदने वाला बच्चा अम्मा को देख रहा है. अम्मा मीठी को देख रही हैं. मीठी दरवाजे़ से झांकती अपनी मम्मी को देख रही है.

    मम्मी कह रही है, "चलो, अब ब्रश करेंगे मीठी."
    "नईं. मैं तुम्हारे साथ ब्रश नहीं करूंगी. मेरी पार्टनर तो अम्मा हैं. अम्मा, तुमने अभी ब्रश नहीं किया न!" मीठी अपने पक्ष में माहौल भी बनाने लगी है.
    मम्मी हथियार डाल देती है, "ओ के बाबा, तुम अम्मा के साथ ही कर लो ब्रश. लेकिन जरा जल्दी करना. ग्यारह बजे... ओह...."

    मीठी ब्रश कर रही है. अम्मा अपना ब्रश लेकर साथ में खड़ी हो गई हैं. मीठी की मम्मी अम्मा के कान में फुसफुसा रही हैं, "मांजी, मीठी की क्लास है ग्यारह बजे. मैडम आज उससे बात करेंगी. ब्रश कर ले, तो दूध पिलाकर ज़रा बाल बना दूं इसके! टोपा तो ये बार-बार उतार कर फेंक देती है!"
    सावधानी रखने के बावजूद मीठी ताड़ जाती है, "ममा, तुम अम्मा से मेरी शिकायत कर रही हो न!"
    "नहीं बेटी. तुम तो बहादुर हो सबसे ज्यादा... तुम्हारी शिकायत कैसे करूंगी मैं!" मीठी की मम्मी डिफेन्सिव मोड में हैं. अम्मा ने अंपायर की भूमिका अख्तियार कर ली है, "नहीं मीठी, ममा तो मुझे बता रही थी कि उसके सर में दर्द हो रहा है."
    "रात को जल्दी सोती नहीं न ममा. इसलिए तो हो रहा है दर्द! तुम जाओ ममा, लेट जाओ जा के." मीठी अपनी उम्र से भी आगे निकल कह रही है.
    ममा लेटने का नाट्य कर रही है. मीठी ब्रश कर के अम्मा को बता रही है, "अम्मा, रात को जब मैं सो रही थी न, तब मम्मी-पापा बातें किए जा रहे थे. मैंने कहा- ‘मुझे सोने दो. तुम दोनों बातें बंद करो.’ तब चुप हुए दोनों."

    अम्मा खुश है. अम्मा हैरान है- कैसे मीठी अपनी ममा का कहा वाक्य अपनी तरफ से बढ़ा रही है! परसों की ही तो बात है. रात के डेड़ बजे जब मीठी की आंखों में नींद का कहीं पता न था और वह अपने पापा से भूत की कहानी सुनाने का आग्रह कर रही थी. तभी मीठी की मम्मी ने सोने का अभिनय करते हुए कहा था- ‘मुझे सोने दो. बातें बंद करो...’.
    अम्मा देख रही हैं. अम्मा समझ रही हैं. अम्मा सोच रही हैं- ‘इस लड़की को कहीं नज़र न लग जाए किसी की! आज रात को नज़र जरूर उतारूंगी इसकी!"
    सब खामोश हैं. ममा दूध बना रही है. अम्मा मीठी की बातों पर कुछ सोच रही हैं- इसका पापा भी तो बनाता था खूब बातें! कैसे बात-बात पर पूछने लगता था ढेरों सवाल!
    अम्मा को खामोश देख मीठी पूछ रही है, "अम्मा, तुम कुछ सोच रही हो क्या? क्या सोच रही हो अम्मा! टेल मी. मैं तुम्हारा टेंशन दूर कर दूंगी झट से. बहादुर हूं न मैं!"
    अम्मा हंस देती हैं. मम्मी दूध ले आई है. मीठी चम्मच से दूध पी रही है. हर चम्मच पर उसे बहलाना पड़ता है. मीठी की मम्मी उसे दूध पिलाते हुए उसकी तारीफ अम्मा से कर रही है, "अम्मा, पता है आपको मीठी कितनी इंटेलीजेंट हो गई है!"
    "कितनी भला!" अम्मा हैरानी से पूछ रही हैं.
    "अब ये अपने पापा को समझाती है कि मोबाइल को सही जगह पर रखना चाहिए. इसके पापा कह रहे थे- मीठी तो बड़ी इंटेलीजेंट हो गई है."
    अम्मा समझ गई हैं. मीठी की मम्मी कौन-सी बात बताना चाह रही है.

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    आजकल पूरा घर जब देखो तब मीठी की कारस्तानियों पर चर्चा करता रहता है. दफ्तर जाने की जल्दी में होने के बावजूद, उसका पापा रोज़ सुबह आकर सबसे पहले अम्मा को मीठी का एक नया किस्सा सुनाता है. आज सुबह ही तो उसने बताया था- "अम्मा, पता है कल रात क्या हुआ! मेरा मोबाइल बिस्तर पर पड़ा हुआ था. मीठी एक झटके से आई और मोबाइल पर पैर रखके खड़ी हो गई. मैंने बस इतना कहा- ‘बेटा, तुम देखकर क्यों नहीं चलतीं! देखो, तुम्हारा पैर मेरे मोबाइल के ऊपर है....’ उस समय तो मीठी ने फौरन मोबाइल पर से पैर हटाकर ‘सॉरी पापा’ कह दिया, पर दो मिनट बाद ही मेरा चेहरा अपनी तरफ घुमाते हुए बोली, "पापा, आप अपनी चीजें जगह पर क्यों नहीं रखते? मैडम कहती हैं- ‘चीजें राइट प्लेस में रखनी चाहिए. नहीं तो समय पर मिलती नहीं. बेड पर मोबाइल रखते हैं क्या?’ मैं तो उसका चेहरा देखता रह गया. कौन कह सकता है, यह लड़की अभी तीसरे साल में चल रही है!"

    "इसकी तो तुम बस बातें सुनते रहो. हंसते रहो और दंग होते रहो." अम्मा खुश हैं. पापा परास्त होकर भी विजयी अनुभव कर रहा है. बस, मीठी की मम्मी थोड़ा अपसेट है कि अम्मा को उनकी पोती की कारस्तानी पहले से मालूम है.

    मीठी अभी सो रही है. जैसे-जैसे शाम ढल रही है, उसकी मम्मी घबरा रही है. उसे डर है कि ये लड़की अगर और देर तक सोती रही, तो रात को तो इसके साथ फिर देर तक जागना ही पड़ेगा.

    "आइडिया... एक आइडिया है!" यही तो कहती है मीठी आजकल बात-बात पर! लेकिन यह तो उसकी मम्मी है. वह अम्मा से कह रही है- "एक आइडिया है अम्मा! आप न, इसकी बगल में लेट जाओ. मैं इसके लिए दूध लेकर आ जाती हूं. फिर आप इससे कहना, ‘मीठी, देख तेरा फ्रेंड सिद्धांत आया है.’ उसके नाम से यह फौरन उठ बैठेगी. और जब उठ जाएगी, तो इसके दादा जी को पकड़ लाएंगे नीचे से. कल कैसे घंटों उन्हें सिद्धांत बनाकर खेल रही थी न मीठी!"

    अम्मा मीठी की बगल में लेट गई हैं. उसकी मम्मी दूध लेने अभी सीढ़ियां उतर ही रही थी कि मीठी आंख खोल कर अम्मा से कह रही है- "अम्मा, तुम बिल्कुल खामोश रहना अच्छा! ममा दूध लेकर आएगी और कहेगी न कि आप मुझसे कहो- ‘मीठी, देख तेरा फ्रेंड सिद्धांत आया है’ तो मैं ममा को खूब चिढ़ाऊंगी- ‘अच्छा, तो तुम दादा जी को सिद्धांत बनाओगी हैं!"

    अम्मा खामोश लेट गई हैं. मीठी बेसब्री से ममा का वेट कर ही है. वह आए और अम्मा से कहे. फिर देखो, कैसे ममा को चिढ़ाएगी वह- ‘बुलाओ सिद्धांत को! मुझे तो असली वाला सिद्धांत चाहिए जो स्कूल में मेरे साथ पढ़ता है!’
    ममा को दूध लाने में देर हो गई है. अम्मा को गर्म बिस्तर में लेटे-लेटे नींद आ गई है. मीठी उन्हें सोता देख हिला रही है- "अम्मा...अम्मा, उठो न. तुम तो सच्ची में सो गईं. प्लीज़, उठो न अम्मा. मम्मी दूध ले के आने वाली है."
    "खेल में कोई सच्ची में थोड़े ही सोता है! मैं तो ऐक्टिंग कर ही हूं ऐक्टिंग." अम्मा मीठी को बहला रही हैं.
    तभी सीढ़ी से किसी के आने की आवाज़ सुन मीठी चौकन्नी हो गई है- "अम्मा, सोना मत. अब मैं आंखें बंद कर लेती हूं... ममा दूध लेकर आ रही है. ठीक है!"

    "ओ के बेटा. मैं अब जगी रहूंगी. ठीक है!" पलक ने कह तो दिया पर वह सोच रही है- ‘क्या वह अब मान जाएगी? मम्मी के आते ही फिर उसकी नई शैतानियां शुरू हो जाएंगी.’

    Mahesh Darpan

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