Home /News /literature /

NAZMS OF MEERAJI: पढ़ें, मीरा जी की नज़्में 'क्लर्क का नग़्मा-ए-मोहब्बत' और 'दूर किनारा'

NAZMS OF MEERAJI: पढ़ें, मीरा जी की नज़्में 'क्लर्क का नग़्मा-ए-मोहब्बत' और 'दूर किनारा'

मीरा जी की नज्में

मीरा जी की नज्में

Meera Ji Ki Nazmein: मीरा जी का का मूल नाम सनाउल्लाह सानी डार था. कहा जाता है कि उन्होंने अपनी काल्पनिक प्रेमिका 'मीरा सेन' के नाम पर अपना नाम 'मीरा' जी रखा था. पढ़ें, उनकी लिखी 2 नज्में- 'क्लर्क का नग़्मा-ए-मोहब्बत' और 'दूर किनारा'

अधिक पढ़ें ...

    Meera Ji Ki Nazmein: आधुनिक उर्दू नज़्म (Urdu Nazm) के संस्थापकों में शामिल ‘मीरा’ जी का जन्म 25 मई 1912 को लाहौर (Lahore) में हुआ था. उनका मूल नाम सनाउल्लाह सानी डार था. कहा जाता है कि उन्होंने अपनी काल्पनिक प्रेमिका ‘मीरा सेन’ के नाम पर अपना नाम ‘मीरा’ जी रख लिया था. जानकारी के मुताबिक मीरा जी का नाम उर्दू में आज़ाद नज़्म और प्रतीकात्मक शायरी (Shayari) को प्रचलित करने के लिए याद रखा जाता है.

    पढ़ें, उनकी लिखी 2 नज्में- ‘क्लर्क का नग़्मा-ए-मोहब्बत’ और ‘दूर किनारा’

    मीराजी की नज़्में (Nazms Of MeeraJi)

    क्लर्क का नग़्मा-ए-मोहब्बत

    सब रात मिरी सपनों में गुज़र जाती है और मैं सोता हूँ
    फिर सुब्ह की देवी आती है
    अपने बिस्तर से उठता हूँ मुँह धोता हूँ
    लाया था कल जो डबल-रोटी
    उस में से आधी खाई थी
    बाक़ी जो बची वो मेरा आज का नाश्ता है
    दुनिया के रंग अनोखे हैं
    जो मेरे सामने रहता है उस के घर में घर-वाली है
    और दाएँ पहलू में इक मंज़िल का है मकाँ वो ख़ाली है
    और बाएँ जानिब इक अय्याश है जिस के हाँ इक दाश्ता है
    और इन सब में इक मैं भी हूँ लेकिन बस तू ही नहीं
    हैं और तो सब आराम मुझे इक गेसुओं की ख़ुशबू ही नहीं
    फ़ारिग़ होता हूँ नाश्ते से और अपने घर से निकलता हूँ
    दफ़्तर की राह पर चलता हूँ
    रस्ते में शहर की रौनक़ है इक ताँगा है दो कारें हैं
    बच्चे मकतब को जाते हैं और तांगों की क्या बात कहूँ
    कारें तो छिछलती बिजली हैं तांगों के तीरों को कैसे सहूँ
    ये माना इन में शरीफ़ों के घर की धन-दौलत है माया है
    कुछ शोख़ भी हैं मासूम भी हैं
    लेकिन रस्ते पर पैदल मुझ से बद-क़िस्मत मग़्मूम भी हैं
    तांगों पर बर्क़-ए-तबस्सुम है
    बातों का मीठा तरन्नुम है
    उकसाता है ध्यान ये रह रह कर क़ुदरत के दिल में तरह्हुम है
    हर चीज़ तो है मौजूद यहाँ इक तू ही नहीं इक तू ही नहीं
    और मेरी आँखों में रोने की हिम्मत ही नहीं आँसू ही नहीं
    जूँ तूँ रस्ता कट जाता है और बंदी-ख़ाना आता है
    चल काम में अपने दिल को लगा यूँ कोई मुझे समझाता है
    मैं धीरे धीरे दफ़्तर में अपने दिल को ले जाता हूँ
    नादान है दिल मूरख बच्चा इक और तरह दे जाता हूँ
    फिर काम का दरिया बहता है और होश मुझे कब रहता है
    जब आधा दिन ढल जाता है तो घर से अफ़सर आता है
    और अपने कमरे में मुझ को चपरासी से बुलवाता है
    यूँ कहता है वूँ कहता है लेकिन बेकार ही रहता है
    मैं उस की ऐसी बातों से थक जाता हूँ थक जाता हूँ
    पल-भर के लिए अपने कमरे को फ़ाइल लेने आता हूँ
    और दिल में आग सुलगती है मैं भी जो कोई अफ़सर होता
    इस शहर की धूल और गलियों से कुछ दूर मिरा फिर घर होता
    और तू होती
    लेकिन मैं तो इक मुंशी हूँ तू ऊँचे घर की रानी है
    ये मेरी प्रेम-कहानी है और धरती से भी पुरानी है

    दूर किनारा

    फैली धरती के सीने पे जंगल भी हैं लहलहाते हुए
    और दरिया भी हैं दूर जाते हुए
    और पर्बत भी हैं अपनी चुप में मगन
    और सागर भी हैं जोश खाते हुए
    उन पे छाया हुआ नीला आकाश है
    नीले आकाश में नूर लाते हुए दिन को सूरज भी है
    शाम जाने पे है चाँद से सामना
    रात आने पे नन्हे सितारे भी हैं झिलमिलाते हुए
    और कुछ भी नहीं
    अब तक आई न आइंदा तो आएगी बस यही बात है
    और कुछ भी नहीं
    एक तू एक मैं दूर ही दूर हैं
    आज तक दूर ही दूर हर बात होती रही
    दूर ही दूर जीवन गुज़र जाएगा
    लहर से लहर टकराए कैसे कहो
    और साहिल से छू जाए कैसे कहो
    लहर को लहर से दूर करती हुई बीच में सैंकड़ों और लहरें भी हैं
    और कुछ भी नहीं
    छाई मस्ती जो दिल पर मिरे भूल की
    एक ही बात रह रह के कहता है
    एक ही ध्यान के दर्द में दिल को लज़्ज़त मिली
    आरज़ू की कली कब खिली
    एक ही मौज पर मैं तो बहता रहा
    अब तक आई न आइंदा तू आएगी
    चाहे धरती के सीने पे जंगल न हूँ
    चाहे पर्बत न हों चाहे दरिया न हों चाहे सागर न हों
    नीले आकाश में चाँद-तारे न हों कोई सूरज न हो
    रात-दिन हों न दुनिया में शाम-ओ-सहर
    कोई पर्वा नहीं
    एक ही ध्यान है
    दूर ही दूर जीवन गुज़र जाएगा और कुछ भी नहीं

    Tags: Lifestyle, Literature

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर