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मृदुला गर्ग ने अपना विमर्श खुद विकसित किया है- अशोक वाजपेयी

प्रसिद्ध लेखिका मृदुला गर्ग के सम्मान में 'स्त्री दर्पण' और 'रजा फाउंडेशन' द्वारा एक समारोह का आयोजन किया गया.

प्रसिद्ध लेखिका मृदुला गर्ग के सम्मान में 'स्त्री दर्पण' और 'रजा फाउंडेशन' द्वारा एक समारोह का आयोजन किया गया.

प्रसिद्ध लेखिका मृदुला गर्ग के लेखन के 50 साल पूरे होने के अवसर पर 'स्त्री दर्पण' और 'रजा फाउंडेशन' द्वारा एक समारोह आय ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली: हिंदी की साहित्यिक बिरादरी ने प्रख्यात लेखिका मृदुला गर्ग के लेखन के पांच दशक पूरे होने पर उनका विशेष अभिनंदन किया. ‘स्त्री दर्पण’ और ‘रजा फाउंडेशन’ द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में सुप्रसिद्ध कवि और संस्कृति कर्मी अशोक वाजपेयी ने मृदुला गर्ग को सम्मानित किया.

अशोक वाजपयी ने कहा कि यह संभवत पहला आयोजन है जिसमें किसी लेखक के लेखन के 50 साल पूरे होने पर कोई आयोजन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि लेखिकाओं के बारे में हिंदी समाज कम चिंता करता है. 50 साल तो बहुत लेखक लिखते हैं लेकिन सभी वह छाप नहीं छोड़ते. बड़ा लेखक वही होता है जो अपना विमर्श, अपने लेखन से खुद तैयार करता है.

अशोक वाजपेयी ने कहा कि मृदुला गर्ग स्त्री विमर्श की लेखिका नहीं बल्कि उन्होंने अपना विमर्श खुद विकसित किया है यानी मृदुला विमर्श किया है. उन्होंने कहा कि 50 साल निरंतर लिखना केवल निरंतरता नही है बल्कि खुद को परिवर्तित करते रहना भी है. क्योंकि केवल लेखक नहीं बदलता बल्कि समय और समाज भी बदलता है.

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उन्होंने मृदुला गर्ग के उपन्यासों का जिक्र करते हुए विश्व प्रसिद्ध लेखक मिलान कुंदरा को उद्धरित करते हुए कहा कि उपन्यास का जन्म तब होता है जब वह हंसता है. हंसने का तात्पर्य समाज के बेहतर होने खुश होने से है. पर भारतीय संदर्भ में जब ईश्वर हंसता है और रोता है उसके बीच कहीं उपन्यास जन्म लेता है. मृदुला गर्ग के उपन्यास हंसने और रोने के बीच हैं. यानी उपन्यास लेखन में एक आत्मालोचना, आत्म विश्लेषण, संशय, नवाचार और समाज भी होता है.

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पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि मृदुला गर्ग के लेखन का फलक बहुत बड़ा है. मैं उनको तब से पढ़ रहा हूं जब 1972 में उनकी कहानी ‘कहानी पत्रिका’ में पुरस्कृत हुई थी. उनकी रचनाओं में एक गहरी मानवीयता के साथ सामाजिक मूल्य भी हैं. वह रूढ़ अर्थों में स्त्री विमर्श की कथाकार नहीं हैं बल्कि उनका लेखन उससे आगे का है.

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प्रोफेसर शिल्पी झा ने समारोह का संचालन करते कहा कि मृदुला गर्ग की नायिकाएं बहुत मजबूत पात्र हैं. उनका लेखन स्त्री सशक्तिकरण का नहीं बल्कि उनके पात्र खुद सशक्त हैं. अंग्रेजी लेखक अमित रंजन ने मृदुला गर्ग के लेखन पर अपने विचार व्यक्त किए.

चर्चित कथाकार वन्दना राग ने मृदुला गर्ग को भेंट किए गए अभिनंदन पत्र का पाठ किया. कवयित्री सविता सिंह और शास्त्रीय गायिका मीनाक्षी प्रसाद ने मृदुला गर्ग का स्वागत और सम्मान किया. वास्तुकार विजय नारायण ने उन्हें प्रतीक चिह्न भेंट किए.

समारोह में वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया, कवयित्री सुमन केसरी, कवि पीयूष दहिया, गीताश्री, अणुशक्ति सिंह, पूनम अरोड़ा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार मौजूद थे.

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