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Deepawali 2021: 'मन के भीतर हुआ उजाला, दीवाली तब खूब मनी'

Deepawali 2021: 'मन के भीतर हुआ उजाला, दीवाली तब खूब मनी'

हिंदी की प्रसिद्ध कवि और कथाकार अलका सिन्हा (Hindi writer Alka Sinha) के कविता संग्रह 'काल की कोख से', 'मैं ही तो हूँ ये', 'मैं तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' साहित्य जगत की चर्चित कृति हैं. उनके संस्मरण, यात्रा वृतांत और बाल कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं. उनका उपन्यास ‘जी–मेल एक्सप्रेस’ काफी चर्चित रहा है. यह उपन्यास पुरुष वेश्यावृत्ति पर आधारित है.

हिंदी की प्रसिद्ध कवि और कथाकार अलका सिन्हा (Hindi writer Alka Sinha) के कविता संग्रह 'काल की कोख से', 'मैं ही तो हूँ ये', 'मैं तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' साहित्य जगत की चर्चित कृति हैं. उनके संस्मरण, यात्रा वृतांत और बाल कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं. उनका उपन्यास ‘जी–मेल एक्सप्रेस’ काफी चर्चित रहा है. यह उपन्यास पुरुष वेश्यावृत्ति पर आधारित है.

हिंदी की प्रसिद्ध कवि और कथाकार अलका सिन्हा (Hindi writer Alka Sinha) के कविता संग्रह 'काल की कोख से', 'मैं ही तो हूँ ये', 'मैं तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' साहित्य जगत की चर्चित कृति हैं. उनके संस्मरण, यात्रा वृतांत और बाल कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं. उनका उपन्यास ‘जी–मेल एक्सप्रेस’ काफी चर्चित रहा है. यह उपन्यास पुरुष वेश्यावृत्ति पर आधारित है.

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    दीप चौमुखी

    भीड़ भरे महानगर की चौराहा सड़क पर
    भाग-सुहाग से भरी कोई स्त्री
    रख आई है एक दीप चौमुखी

    पति और बच्चों के स्वास्थ्य की कामना
    चिरंजीवी होने की प्रार्थना
    सुमंगल भावनाओं का प्रतीक
    यह चौमुखी दीप

    अंधेरों के विरुद्ध करता है युद्ध
    उजड्ड आंधियों से जूझती दीपक की बत्ती
    लौ जगमगाती है रोशनी से नहाती है
    गाड़ियों की तेज रफ्तार धीमी पड़ जाती है
    सौभाग्य दीप के आगे सिर नवाती है

    ठहरकर, संभलकर निकलने लगती हैं गाड़ियां
    सुरक्षित राहगीर, सुरक्षित सवारियां

    भीड़-भाड़ से बेपरवाह
    सड़क के चौराहे पर रखा दिया
    गर्व से मुस्करा रहा है
    सबकी सलामती का गीत गा रहा है…

    मन के भीतर हुआ उजाला, दीवाली तब खूब मनी

    मन के भीतर हुआ उजाला, दीवाली तब खूब मनी।
    क्या बतलाऊं कितना भाया मिट्टी में मिलना मुझको
    डटकर लड़ना अंधियारे से, दीपक-सा जलना मुझको
    रौंदा, गूंदा मिट्टी का तन और चाक पर चढ़ा दिया
    थपकी दे-दे सुगढ़ बनाया, चकरी जैसा घुमा दिया
    रही सुलगती मेरी भी लौ, तेज हवा से खूब ठनी।

    पी ने आकर आप सजाया, तब मेरा श्रृंगार हुआ
    रंग सुनहला निखर के आया, खुद अपने से प्यार हुआ
    रोम-रोम में छुअन पिया की, लौ में थी उसकी छाया
    मेरे भीतर छुपा रहा पर कितना मुझको भटकाया
    आज समझ आया तो जाना, मेरे जैसा कौन धनी।

    घना अंधेरा, रात अमावस पर मन में उजियारा था
    मन के भीतर जो प्रकाश था, अद्भुत रूप तुम्हारा था
    तिल-तिल कर जलना भी भाया, जीने का आधार मिला
    हुई दिए की जीत तिमिर पर, रात गए तक खूब जला
    जलकर भले खत्म हो गया, बाती उसकी रही तनी।

    Hindi Author Alka Sinha

    Tags: Diwali 2021, Hindi Literature

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