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फिराक गोरखपुरी की मोहब्बत भरी शायरी- 'छिड़ गई उन आंखों की बात, दुनिया में अब दिन हो कि रात'

मोहब्बत के इस मौसम में फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी

मोहब्बत के इस मौसम में फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी

वसंत उत्सव चल रहा है. कुदरत से लेकर इनसान तक हर ओर प्यार की खुमारी-सी बिखरी हुई है. साहित्य की दुनिया में भी इश्क-मोहब् ...अधिक पढ़ें

वो चुप-चाप आंसू बहाने की रातें
वो इक शख्स के याद आने की रातें

शब-ए-मह की वो ठंडी आंचें वो शबनम
तिरे हुस्न के रस्मसाने की रातें

फुवारें सी नामों की पड़ती हों जैसे
कुछ उस लब के सुनने-सुनाने की रातें

मुझे याद है तेरी हर सुबह-ए-रुख़्सत
मुझे याद हैं तेरे आने की रातें

पुर-असरार सी मेरी अर्ज-ए-तमन्ना
वो कुछ जेर-ए-लब मुस्कुराने की रातें
(जेर-ए-लब= दबे होंठों से)

हम-आगोशियां शाहिद-ए-मेहरबां की
जमाने के गम भूल जाने की रातें
(हम-आगोशियां= आलिंगनबद्ध, शाहिद-ए-मेहरबां= मेहरबान माशूक)

‘फिराक’ अपनी क्रिस्मत में शायद नहीं थे
ठिकाने के दिन या ठिकाने की रातें।

बाजी-ए-इश्क की पूछ न बात
जीत की जीत है मात की मात

छिड़ गई उन आंखों की बात
दुनिया में अब दिन हो कि रात

कटते कटते कटती है
हिज्र की घटती बढ़ती रात

पानी का तो बहाना है
आग लगाती है बरसात

कातिल उसको कौन कहे
हंस-मुख आंखें कोमल गात

जीने वाले जी ही लेंगे
अब न मिलोगे अच्छी बात

पोंछ ये जलते जलते अश्क
देख ये भीगी भीगी रात

उड़ी नींद से पूछ फ़िराक़
आई होगी कितनी रात।

Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Literature, Valentine Day, Valentine Day Special, Valentine week

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