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बरेली के शारिक कैफी और खालिद जावेद 'उर्दू अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित

बरेली के शारिक कैफी और खालिद जावेद 'उर्दू अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित

मशहूर कथाकार खालिद जावेद और शायर शारिक कैफी को  Urdu Akademi Awards से सम्मानित किया गया है.

मशहूर कथाकार खालिद जावेद और शायर शारिक कैफी को Urdu Akademi Awards से सम्मानित किया गया है.

Uttar Pradesh Urdu Akademi की ओर से लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए और उर्दू लेखन के लिए राष्ट्रीय और अन्य प्रदेश स्तर के पुरस्कार दिये जाते हैं जिसमें उपन्यास, ड्रामा, हास्य, काल्पनिक, बाल साहित्य, आलोचना, मेडिकल, पत्रकारिता, रिसर्च, व्यंग्य, आत्मकथा, जीवनी आदि विधाएं शामिल होती हैं.

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    Urdu Akademi Awards 2020: उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने उत्तर प्रदेश अकादमी अवॉर्ड 2020 का ऐलान कर दिया है. यह घोषणा 16 दिसंबर 2021 को उर्दू अकादमी (UP Urdu Akademi) में चेयरमैन चौधरी कैफुल वरा की अध्यक्षता में कार्यकारिणी समिति की बैठक में की गई है. बैठक में कई श्रेणियों में पुरस्कार घोषित किए गए हैं.

    उर्दू अदब में बरेली (Bareilly City) ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. इस साल उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी ने उर्दू के जिन दो रचनाकारों को सम्मानित किया है, दोनों का वास्ता बरेली शहर से है. इस बार यह पुरस्कार उर्दू कथाकार खालिद जावेद (Urdu Author Khalid Jawed) और जाने-माने शायर शारिक कैफी (Urdu Shayar Shariq Kaifi) को मिला है. दोनों रचनाकारों को पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी.

    खालिद जावेद उर्दू कथा-साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं. उनका बयानिया उनको दूसरे अफ़सानानिगारों से अलग करता है. उनकी कहानियों और नावेल में जिंदगी और क़ायनात के सियाह हिस्सों और इंसानी अस्तित्व को देखने का एक नया नज़रिया मिलता है.

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    9 मार्च, 1963 को उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में जन्मे खालिद जावेद दर्शनशास्त्र और उर्दू साहित्य पर समाज अधिकार रखते हैं. इन्होंने रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पांच साल तक दर्शनशास्त्र का अध्यापन कार्य किया है और वर्तमान में जामिया मिलिया इस्लामिया में उर्दू के प्रोफेसर हैं.

    खालिद जावेद के तीन कहानी संग्रह और तीन उपन्यास ‘मौत की किताब’, ‘ने’मतख़ाना’ तथा ‘एक ख़ंजर पानी में’ प्रकाशित हो चुके हैं. कहानी ‘बुरे मौसम में’ के लिए लिए उनको कथा अवॉर्ड मिल चुका है. वर्जीनिया में आयोजित वर्ल्ड लिटरेचर कॉन्फ्रेंस-2008 में उनको कहानी पाठ के लिए आमंत्रित किया गया था. 2012 में कराची लिटरेचर फेस्टिवल में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था. खालिद की कहानी अमेरिका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी के साउथ एशियन लिटरेचर डिपार्टमेंट के कोर्स में शामिल है. आपकी कहानियों का अनुवाद हिंदी, अंगरेजी और जर्मन समेत कई भाषाओं में हो चुका है. खालिद की दो आलोचना पुस्तकें ‘गैब्रियल गार्सिया मारकेज़’ और ‘मिलान कुंदेरा’ भी प्रकाशित हो चुकी हैं.

    शायर शारिक कैफी (Urdu Shayar Shariq Kaifi)
    शारिक कैफ़ी उर्दू के जाने-माने शायर हैं और अपनी शायरी के खास मिजाज के चलते युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं. शारिक कैफ़ी की शायरी में जीवन की छोटी-बड़ी सचाइयों का कुछ इस तरह बयान होता है कि वे फ़लसफ़े की शक्ल ले लेती हैं. उनके अश’आर ठहरकर कुछ सोचने को मजबूर करते हैं.

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    शारिक बरेली में 1961 में पैदा हुए और वहीं से बीएससी और एमए उर्दू की शिक्षा हासिल की. शायरी उन्हें विरासत मे हासिल हुई है. उनके पिता कैफ़ी विज्दानी (सय्यद रिफ़अत हुसैन) भी एक मशहूर शायर थे. शारिक का पहला संग्रह ‘आम सा रद्द-ए-अमल’ 1989 में प्रकाशित हुआ. इसके बाद सन् 2008 में उनका दूसरा ग़ज़ल संग्रह ‘यहाँ तक रोशनी आती कहाँ थी’ और 2010 में नज़्मों का संग्रह ‘अपने तमाशे का टिकट’ प्रकाशित हुआ. बीते सालों में उनके दो संग्रह और आए हैं, जिनके शीर्षक ‘खिड़की तो मैंने खोल ही ली’ (2017) और ‘देखो क्या भूल गए हम’ (2019) हैं. शारिक देश-विदेश के मुशायरों में एक जाना-माना नाम हैं. उनको जश्न-ए-अदब अवॉर्ड और पंजाब केसरी अवार्ड मिल चुका है.

    उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी (Uttar Pradesh Urdu Akademi)
    उर्दू अकादमी की ओर से लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए और उर्दू लेखन के लिए राष्ट्रीय और अन्य प्रदेश स्तर के पुरस्कार दिये जाते हैं जिसमें उपन्यास, ड्रामा, हास्य, काल्पनिक, बाल साहित्य, आलोचना, मेडिकल, पत्रकारिता, रिसर्च, व्यंग्य, आत्मकथा, जीवनी आदि विधाएं शामिल होती हैं. यह पुरस्कार सिर्फ ऊर्दू लेखन पर ही दिए जाते हैं. इस बार उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार 2020 जीतने वाले विजेताओं को 25,000 से लेकर 50,000 रुपए तक के इनाम से सम्मानित किया जाएगा.

    Tags: Hindi Literature, Literature, Uttar pradesh news

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