Home /News /literature /

कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल में मैथिली भाषा और साहित्य पर चर्चा

कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल में मैथिली भाषा और साहित्य पर चर्चा

भारत की लगभग 5.6 प्रतिशत आबादी मैथिली को मातृभाषा के रूप में प्रयोग करती है.

भारत की लगभग 5.6 प्रतिशत आबादी मैथिली को मातृभाषा के रूप में प्रयोग करती है.

कलिंग साहित्य महोत्सव के संस्थापक रश्मि रंजन परिदा और संचालक आशुतोष कुमार ठाकुर ने बताया कि मैथिली भारत के बिहार और झारखंड राज्यों और नेपाल के तराई क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :

    कलिंग लिटरेरी फेस्टिवल (Kalinga Literary Festival) के बैनर तले दो दिन के मैथिली लिटरेरी फेस्टिवल (Maithili Literary Festival) का आयोजन किया गया. इस आयोजन में देश-विदेश के मैथिली साहित्यकारों ने शिरकत की.

    कार्यक्रम के पहले दिन केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (Bharatiya bhasha sansthan) के पूर्व निदेशक उदयनारायण सिंह ‘नचिकेता’ के साथ वरिष्ठ मैथिली साहित्यकार प्रदीप बिहारी, अरविंद ठाकुर, श्री रमेश, रमेश रंजन, महेंद्र नारायण राम और मैथिली लेखक संघ के महासचिव विनोद कुमार झा ने मैथिली साहित्य तमाम पहलुओं पर चर्चा की. आयोजन के संयोजक कृष्ण मोहन ठाकुर ने मैथिली साहित्य के भविष्य पर रोशनी डाली. इस सत्र का संचालन अजीत आजाद ने किया.

    उदय नारायण सिंह ने अपने वक्तव्य में इटली के बीसवीं सदी के प्रसिद्ध रचनाकार के मेनिफेस्टो का जिक्र करते हुए कहा कि हम कैसा भविष्य चाहते हैं और उसके लिए युवाओं को क्या-क्या करना चाहिए? उन्होंने कहा कि मैथिली साहित्य का भविष्य आज जिन युवाओं के हाथ में है वह सुदृढ़ है और निश्चित रूप से एक बेहतर परिणाम की उम्मीद की जा सकती है.

    कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वक्ताओं ने समकालीन कविता के महत्वपूर्ण आयाम पर अपने वक्तव्यों को सामने रखा जिसमें विगत वर्षों में युवा कवि-कवयित्रियों की रचना में आए बिम्ब विधान, छन्द, प्रतीक, चेतना, ग्रामीण और शहरी परिवेश और नवताबोध को उनकी रचनाओं के साथ उल्लेख किया. इस सत्र में नारायण जी मिश्र, आदित्य भूषण मिश्र, मैथिल प्रशांत और पंकज कुमार मौजूद थे. सत्र का संचालन गुंजन श्री ने किया और सत्र की अध्यक्षता युवा कवयित्री शारदा झा ने की.

    तीसरे सत्र में साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित युवा कथाकार सोनू कुमार झा और जनकपुर, नेपाल की सुपरिचित लेखिका बिजेता चौधरी ने समकालीन कथा, उपन्यास और लघुकथा के विभिन्न आयामों पर अपने-अपने विचार रखे. लेखक दिलीप कुमार झा, कमलेश प्रेमेंद्र, पंकज प्रियांशु, प्रियरंजन झा और शैलेंद्र शैली ने भी मैथिली साहित्य के विभिन्न आयामों पर चर्चा की.

    KLF Maithili Literary Festival

    चौथा सत्र अनुवाद-विमर्श पर आधारित सत्र था, जिसमें वक्ताओं ने अनुवाद के लिए आवश्यक अवयव के साथ व्यवहारिक समस्याओं पर अपनी बातों को रखा. साहित्य के अनुवाद से ग्लोबल विलेज की परिकल्पना के साथ जोड़कर इसे एक आवश्यक उपक्रम बताया गया. इस सत्र का संचालन अंशुमान सत्यकेतु ने किया और अध्यक्षता निक्की प्रियदर्शिनी की.

    वक्ताओं के रूप में कृष्णानन्द मिश्रा, प्रभात झा, सदरे आलम गौहर, संजय झा, शैलेन्द्र मिश्रा आदि मौजूद थे.

    दूसरे दिन का सत्र
    समारोह के दूसरे दिन की शुरूआत बाल साहित्य विमर्श सत्र के साथ हुई. इस सत्र में बाल साहित्य की दशा और दिशा दोनों पर वक्ताओं ने अपना पक्ष रखा. समकालीन बाल साहित्य लेखन के लिए आवश्यक बाल मनोविज्ञान पर भी एक सार्थक विमर्श किया गया जिसमें बाल साहित्य के नियमित प्रकाशन के लिए पत्रिका की उपयोगिता पर भी चर्चा हुई. इस सत्र का संचालन रूपेश त्योंथ ने किया और सत्र की अध्यक्षता निवेदिता मिश्रा ने की. वक्ताओं के रूप में अक्षय आनन्द सन्नी, अमित मिश्र, चंदन कुमार झा, मनोज कामत, नारायण झा मौजूद थे.

    कलिंग साहित्य महोत्सव के ‘बुक अवॉर्ड्स 2020-21’ की घोषणा

    आलोचना-विमर्श पर चर्चा
    अगला सत्र आलोचना-विमर्श के नाम रहा, जिसमें वक्ताओं ने मैथिली साहित्य के आलोचना के इतिहास की चर्चा के साथ वर्तमान परिस्थितियों को भी सामने रखा. समकालीन मैथिली साहित्य में सर्वाधिक लिखी जाने वाली रचना ‘कविता’ पर आलोचना की स्थिति पर सार्थक विमर्श के बाद अन्य विद्या जैसे कथा, उपन्यास और नाट्य आलोचना की स्थिति की भी समीक्षा की गई.

    गीत-गजल पर विमर्श
    तीसरे सत्र के केन्द्र में गीत-गजल विमर्श था. इस आवश्यक विमर्श सत्र में विद्यापति काल से लेकर वर्तमान समय में गीत-गजल की स्थितियों पर बारीकी से बात की. आज के समय में मैथिली गीत-गजल की वास्तविक स्थिति, समृद्धि, आवश्यक परिवर्तन एवं समस्याओं पर विमर्श किया. सत्र का संचालन साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत दीप नारायण विद्यार्थी ने किया, अध्यक्ष के रूप में बिभा झा की उपस्थिति थीं.

    Maithili Literary Festival

    युवा वक्ताओं में आनन्द मोहन झा, किसलय कृष्ण, नवल श्री पंकज, रघुनाथ मुखिया, संस्कृति मिश्र मौजूद थे. समापन सत्र से पूर्व कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया था, जिसमें भारत और नेपाल के अतिरिक्त अन्य कई देशों के युवा कवि-कवयित्रियों ने समकालीन कविता, गीत, गजल आदि का पाठ कर आभासी रूप से देख रहे सभी दर्शकों को बांधकर रख दिया.

    कलिंग साहित्य महोत्सव के संस्थापक रश्मि रंजन परिदा और सहयोगी आशुतोष कुमार ठाकुर ने बताया कि मैथिली भारत के बिहार और झारखंड राज्यों और नेपाल के तराई क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा है. भारत की लगभग 5.6 प्रतिशत आबादी लगभग 7-8 करोड़ लोग मैथिली को मातृभाषा के रूप में प्रयोग करते हैं.

    मैथिली विश्व की सर्वाधिक समृद्ध, शालीन और मिठास पूर्ण भाषाओं में से एक मानी जाती है. मैथिली भारत तथा नेपाल में एक राजभाषा के रूप में सम्मानित है. मैथिली की अपनी लिपि है जो एक समृद्ध भाषा की प्रथम पहचान है.

    Tags: Books

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर