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भोजपुरी लेखक डॉ. अशोक द्विवेदी और अनिल ओझा 'नीरद' को साहित्य अकादमी भाषा सम्मान

साहित्य अकादमी भाषा सम्मान में एक लाख रुपये की नकद राशि, ताम्रफलक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा.

साहित्य अकादमी भाषा सम्मान में एक लाख रुपये की नकद राशि, ताम्रफलक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा.

अकादमी के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर कंबार की अध्यक्षता में अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में गैर-मान्यता प्राप्त भाषाओं के लेखकों और विद्वानों को साहित्य अकादमी भाषा सम्मान पुरस्कार के लिए चयन किया गया.

  • News18Hindi
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    साहित्य अकादमी (Sahitya Akademi) ने भाषा सम्मानों की घोषणा कर दी है. साहित्य अकादमी ने भोजपुरी भाषा (Bhojpuri Language) के लिए जानेमाने लेखक डॉ. अशोक द्विवेदी और अनिल ओझा ‘नीरद’ को संयुक्त रूप से भाषा सम्मान देने का ऐलान किया है. तिवा भाषा (Tiwa Bhasha) के लिए होरसिंह खोलर को यह सम्मान दिया जाएगा.

    साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवासराव (K. Sreenivasarao) ने बताया कि अकादमी के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर कंबार की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में गैर-मान्यता प्राप्त भाषाओं के लेखकों और विद्वानों को साहित्य अकादमी भाषा सम्मान पुरस्कार के लिए चयन किया गया.

    सचिव डॉ. के. श्रीनिवासराव ने बताया कि भोजपुरी भाषा के पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया जा रहा है. इसके लिए डॉ. अशोक द्विवेदी (Dr Ashok Dwivedi) और अनिल ओझा ‘नीरद’ के नाम पर कार्यकारी मंडल की सहमति बनी. तिवा भाषा के लिए होरसिंह खोलर को चुना गया है.

    साहित्य अकादमी भाषा सम्मान (Sahitya Akademi Bhasha Samman) में एक लाख रुपये की नकद राशि, ताम्रफलक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा.

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    डॉ. अशोक द्विवेदी भोजपुरी और हिंदी भाषाओं के प्रख्यात लेखक और संपादक हैं. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की. डॉ. द्विवेदी की भोजपुरी और हिंदी में 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में घनानन्द और उनकी कविता, अढाई आखर, रामजी के सगुना और बनचरी आदि हैं. डॉ. द्विवेदी भोजपुरी की पत्रिका पाती के संपादक हैं.

    अनिल ओझा ‘नीरद’ (Anil Ojha Nirad) एक प्रसिद्ध भोजपुरी विद्वान हैं. उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से हिंदी में परास्नातक की डिग्री हासिल की है. भोजपुरी में उनकी रचनाएं माटी के दीया, वीर सिपाही मंगल पांडे, पिंजरा के मोल, गुरु दक्षिणा और कहत कबीर आदि हैं.

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    भोजपुरी भाषा (Bhojpuri Bhasha) के लिए यह सम्मान सबसे पहले धरीक्षण मिश्र को 1996 में दिया गया था. इनके बाद 2013 में कवि हरिराम द्विवेदी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

    तिवा भाषा में पुरस्कार के लिए चुने गए होरसिंह खोलर की आठ रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं. उनकी कुछ रचनाएं तिवा भाषा हमें हैं. इनमें पलांग्शी, सिगारुने संजुली, चोंगमई, अदला रे थेनदुने सदरा और पनत शाला शामिल हैं.

    होरसिंह खोलर पिछले दो दशकों के तिवा भाषा के संवर्धन में लगे हुए हैं.

    तिवा भाषा (Tiwa Bhasha)
    तिवा भाषा (Tiwa language) या लालुंग भाषा (Lalung language) असम में तिवा समुदाय द्वारा बोली जाने वाली एक ब्रह्मपुत्री भाषा है. यह भाषा असम के पूर्व और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले, नागांव (नाम्बोर), मोरीगांव, कामरूप और मेघालय के
    खासी हिल्स जिले में बोली जाती है.

    पूर्वोत्तर के पहाड़ी जनजातियों की अधिकांश भाषाओं की तरह, पहाड़ी तिवा की अपनी लिपि नहीं है और यह रोमन वर्णमाला में लिखी जाती है, कभी-कभी अंग्रेजी और असमिया लिपि में भी इसे लिखा जाता है. इस भाषा को बोलने वालों की संख्या 40 हजार से भी कम है.

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