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साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2020: हिंदी में अंकित और मैथिली में सोनू कुमार झा सम्मानित

साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2020: हिंदी में अंकित और मैथिली में सोनू कुमार झा सम्मानित

साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मैथिली साहित्य के लिए युवा लेखक सोनू कुमार झा को दिया गया.

साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मैथिली साहित्य के लिए युवा लेखक सोनू कुमार झा को दिया गया.

साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 35 वर्ष से कम आयु के लेखकों को उनकी प्रकाशित पुस्तक के चयन पर दिया जाता है. इसके तहत विजेता को स्मृति चिह्न तथा 50,000 रुपए की राशि प्रदान की जाती है.

    lSahitya Akademi Puraskar 2020: साहित्य अकादमी द्वारा इस वर्ष के साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2020 वितरित किए गए. इस बार युवा पुरस्कारों के लिए विभिन्न भाषाओं के 23 युवा साहित्यकारों को प्रदान किया गया. बेंगलुरु के भारतीय विद्या भवन में ये पुरस्कार प्रदान किए गए.

    साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवास राव ने बताया कि साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 35 वर्ष से कम आयु के लेखकों को उनकी प्रकाशित पुस्तक के चयन पर दिया जाता है. इसके तहत विजेता को स्मृति चिह्न तथा 50,000 रुपए की राशि प्रदान की जाती है.

    साहित्य अकादमी के अध्यक्ष तथा प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. चंद्रशेखर कांबर ने चयनित युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार विभिन्न भारतीय भाषाओं में लिखे जा रहे साहित्य और साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने का काम करते हैं.

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी के प्रसिद्ध कवि प्रो. अरुण कमल ने कहा कि आज के युवा साहित्यकारों के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं.

    युवा लेखक सम्मानित
    साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2020 (Sahitya Akademi Yuva Puraskar 2020) के लिए द्विजेन कुमार दास (असमिया साहित्य), श्याम बंध्योपाध्याय (बंगाली), न्यूटन के. बसुमतारी (बोडो साहित्य), गंगा शर्मा (डोगरी साहित्य), याशिका दत्त (अंग्रेजी साहित्य), अभिमन्यु आचार्य (गुजराती साहित्य), अंकित नरवाल (हिंदी साहित्य), के.एस. महादेवस्वामी (कन्नड साहित्य के लिए), मसरूर मुजफ्फर (कश्मीरी साहित्य), सम्पदा कुंकलकार (कोंकणी साहित्य), अबिन जोसफ (मलयालम साहित्य), रामेश्वर शरूंगबम (मणिपुरी साहित्य), मराठी साहित्य के लिए प्रजाक्त देशमुख, नेपाली साहित्य के लिए अंजन बासकोट, ओड़िया साहित्य के लिए चंद्रशेखर होता, पंजाबी साहित्य के लिए दीपक कुमार धालेवान, राजस्थानी साहित्य के लिए महेन्द्र सिंह सिसोदिया, संस्कृत साहित्य के लिए ऋषिराज पाठक, संथाली साहित्य के लिए अंजलि किश्कु, सिंधी साहित्य के लिए कोमल जगदीश दयालनी, तमिल साहित्य के लिए शक्ति, तेलगु साहित्य के लिए मनसा येन्दुलरी और उर्दू साहित्य के लिए सैय्यद मोहम्मद साकिब फरीदी का चयन किया गया था.

    Saquib Faridi Urdu

    उर्दू भाषा में उत्कृष्ट रचना ‘मैं अपनी बात का मफूम दूसरा चाहूँ’ के लिए साकिब फरीदी को यह पुरस्कार प्राप्त हुआ है.

    Ankit Narwal Hindi

    हिंदी साहित्य के लिए युवा लेखक अंकित नरवाल (Ankit Narwal) को उनकी पुस्तक ”यू आर अनन्तमूर्ति प्रतिरोध का विकल्प” के लिए साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2020 प्रदान किया गया. अंकित पंजाब यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं.

    हिंदी के प्रसार में अनुवाद की भूमिका महत्‍वपूर्ण : अनिल जोशी

    यशिका दत्त के संस्मरण कृति ‘कमिंग आउट एज दलित’ को अंग्रेजी भाषा के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

    मैथिली साहित्य के लिए सोनू कुमार झा सम्मानित
    वर्ष 2020 का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मैथिली साहित्य (Maithili sahitya) के लिए युवा लेखक सोनू कुमार झा को दिया गया. यह पुरस्कार उनकी कहानी संग्रह ‘गस्सा’ के लिए दिया गया. सोनू कुमार झा (Sonu Kumar Jha) बिहार के मधुबनी जिले के हरिनगर गांव निवासी हैं.

    Ganga Sharma Dogri

    डोगरी साहित्य के लिए युवा लेखिका गंगा शर्मा को सम्मानित किया गया.

    सोनू कुमार झा ने मैथिली विषय से एमए और पीएच.डी की डिग्री हासिल की है. इनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. सोनू अपनी कहानियों में समाज में घट रही हर घटना का आकलन करते हैं और समाज को आइना दिखाने का काम करते हरैं.

    सोनू कुमार झा के कहानी संग्रह ‘गस्सा’ में कुल 16 कहानियां हैं. उनकी कहानियां जीवन के विभिन्न पक्षों को उद्घाटित करती हुई आधुनिक समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं.

    ‘गस्सा’ कहानी संग्रह में ‘निश्चय’, ‘उड़ान’, ‘बोध’ और ‘सम्बन्ध’ कहानी के माध्य्म से नारी विमर्श को दिखाया गया है. वहीं पश्चिमी हवा के झोंके में उड़ते हुए अपने संस्कार को ‘कोन दुनियाँ’, ‘बाजार’ और ‘खंडित विश्वास’में दिखाया गया है. आज हमारे देश में वृद्धा आश्रम की संख्या बढ़ रही है और लोग ‘मदर डे’, ‘फादर डे’ मानते हैं. अगर वास्तव में हम अपने माता-पिता से प्रेम करते तो शायद इतने वृद्धाश्रम नहीं खुलते. ‘ओल्ड एज होम’ में समाज के इन हालात को दिखाया गया है. इस तरह इनकी सभी कहानियां रोचक और प्रेणादायक हैं.

    Tags: Hindi Literature

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