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भारतीय समाजवाद के पितामह 'आचार्य नरेन्द्रदेव ग्रंथावली' का लोकार्पण

भारतीय समाजवाद के पितामह 'आचार्य नरेन्द्रदेव ग्रंथावली' का लोकार्पण

'आचार्य नरेन्द्रदेव ग्रंथावली' का प्रकाशन के. एल. पचौरी प्रकाशन द्वारा किया गया है.

'आचार्य नरेन्द्रदेव ग्रंथावली' का प्रकाशन के. एल. पचौरी प्रकाशन द्वारा किया गया है.

आचार्य नरेन्द्रदेव का पूरा रचना-कर्म केवल साहित्य से जुड़ा नहीं है, बल्कि पुरातत्व, दर्शन, धर्म, साहित्य आदि पर भी आचार्यजी ने अपना विचार प्रकट किया. आचार्य नरेन्द्रदेव केवल राजनीतिज्ञ ही नहीं थे, बल्कि शिक्षाविद् भी थे. नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ‘आचार्य नरेन्द्रदेव ग्रंथावली’ के विमोचन कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि ग्रंथावली का पहला तीन भाग ‘अभिधर्म कोश’ से संबंधित है.

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    Hindi Sahitya News: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि जिस प्रकार सागर की गहराई नहीं नापी जा सकती है, उसी प्रकार आचार्य नरेन्द्रदेव की विद्वता को नहीं मापा जा सकता है. आचार्य नरेन्द्रदेव ने भारतीय राजनीति में नैतिकता का वह आदर्श स्थापित कर दिया, जो अतुलनीय है.

    नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ‘आचार्य नरेन्द्रदेव ग्रंथावली’ के विमोचन कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि ग्रंथावली का पहला तीन भाग ‘अभिधर्म कोश’ से संबंधित है. आचार्य जी कितनी भाषाएं जानते थे! अभिधर्म कोश इसकी एक बानगी है. इसका अनुवाद उन्होंने फ्रेंच भाषा से किया है. आचार्य नरेन्द्रदेव बौद्ध धर्म से प्रभावित थे और ग्रंथावली का चौथा खंड बौद्ध धर्म-दर्शन को समेटे हुये है.

    पूर्व सांसद एवं समाजवादी चिंतक के. सी. त्यागी ने कहा कि आचार्य नरेन्द्रदेव के विचारों का ही प्रभाव था कि चंपारण सत्याग्रह के बाद कांग्रेस का किसानों और गरीबों के प्रति अधिक झुकाव हुआ. उन्होंने कहा कि यदि आचार्य नरेन्द्रदेव ने अपनी कलम से मजबूत वैचारिक जमीन तैयार नहीं की होती तो राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण भी नहीं होते.

    समाजवादी चिंतक डॉ. सुरेंद्र प्रताप ने कहा कि आचार्य नरेन्द्रदेव का समाजवाद लोकतांत्रिक समाजवाद है. उन्होंने कहा कि नरेन्द्रदेव जैसा गहरे चिंतन वाला समाजवादी व्यक्ति दूसरा नहीं हुआ.

    ग्रंथावली के संपादक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र के अध्यक्ष प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि भारत में समाजवाद के सिद्धांतकार के रूप में एक आचार्यजी ही दिखते हैं, जो अपने विचारों, सिद्धांतों पर अटल रहते हैं. कभी समझौता नहीं करते.

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    उन्होंने कहा कि आचार्य नरेन्द्रदेव का पूरा रचना-कर्म केवल साहित्य से जुड़ा नहीं है, बल्कि पुरातत्व, दर्शन, धर्म, साहित्य आदि पर भी आचार्यजी ने अपना विचार प्रकट किया. आचार्य नरेन्द्रदेव केवल राजनीतिज्ञ ही नहीं थे, बल्कि शिक्षाविद् भी थे.

    ram bahadur rai

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला न्यास बोर्ड के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा कि राष्ट्रमंडल की सदस्यता को लेकर पंडित नेहरू और आचार्य नरेन्द्रदेव दो छोर पर खड़े थे. पंडित नेहरू ने राष्ट्रमंडल की सदस्यता के लिये उन्होंने बहुत तैयारियां की थी. लेकिन, नरेन्द्रदेव ने अलग राह चुनी.

    Acharya Narendra Deva

    रामबहादुर राय ने कहा कि आचार्य नरेन्द्रदेव बड़े विनोदप्रिय थे. विनोदप्रियता उनकी बड़ी ताकत थी.

    कार्यक्रम में आचार्य नरेन्द्रदेव की पौत्रवधु मीरा वर्धन ने कहा कि आचार्यजी का परिवार आप सब के लिये कृतज्ञ है कि उन्हें स्मरण किया जा रहा है. हमारे लिये आज भी वे जीवित हैं और परिवार उनके बताये रास्ते पर चल रहा है.

    Tags: Hindi Literature

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