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राजस्थानी साहित्य और भाषा को संरक्षित करेगा 'अंजस', रेख़्ता फाउंडेशन की अनूठी पहल

29-30 अक्टूबर को होने वाले अंजस महोत्व में राजस्थानी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़ी हस्तियां, कलाकार, साहित्यकार और कारीगर हिस्सा लेंगे.

29-30 अक्टूबर को होने वाले अंजस महोत्व में राजस्थानी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़ी हस्तियां, कलाकार, साहित्यकार और कारीगर हिस्सा लेंगे.

राजस्थानी भाषा में मौखिक और लिखित साहित्य, कला और परंपरा की अनमोल धरोहर जीवंत है. राजस्थानी भाषा का जिक्र सबसे पहले 8वी ...अधिक पढ़ें

Anjas Mahotsav News: रेख़्ता फाउंडेशन ने राजस्थानी भाषा की लिखित और मौखिक-साहित्यिक परंपरा के संरक्षण के लिए राजस्थानी भाषा के पहले डिजिटल साहित्यकोष अंजस डॉट ओआरजी (Anjas.org) नामक वेबसाइट तैयार की है. यह वेबसाइट 29-30 अक्टूबर को जोधपुर में होने वाले अंजस महोत्सव में लॉन्च की जाएगी. Anjas.org राजस्थानी भाषा में अपनी किस्म का पहला और एक बड़ा ऑनलाइन साहित्य कोष है.

अंजस की वेबसाइट पर अब तक चंदबरदाई और विजयदान देथा जैसे प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक के 400 से रचनाकारों की रचनाएं प्रेषित की जा चुकी हैं. इस वेबसाइट का लॉन्च अंजस महोत्सव में किया जाएगा. अंजस महोत्सव रेख़्ता फाउंडेशन का प्रतिनिधि आयोजन है.

राजस्थानी भाषा में मौखिक और लिखित साहित्य, कला और परंपरा की अनमोल धरोहर जीवंत है. राजस्थानी भाषा का जिक्र सबसे पहले 8वीं शताब्दी की पांडुलिपियों में पाया जाता है. इसके लिखित साहित्य का इतिहास 13वीं शताब्दी पुराना है. राजस्थान की विभिन्न बोलियों में कविता और गद्य, दोनों ही विधाओं में भरपूर साहित्य मौजूद है.

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रेख़्ता फाउंडेशन के संस्थापक संजीव सर्राफ ने बताया कि संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं होने के कारण मां की गोद ही राजस्थानी भाषा की इकलौती पाठशाला है. राजस्थानी भाषा और परंपरा की विविधता तथा प्रचूरता किसी संस्थानिक संरचना के अभाव के कारण समय के साथ नष्ट होती जा रही है.

उन्होंने कहा कि हम विकास के एक अहम् मोड़ पर खड़े हैं जब संरक्षण के तौर-तरीकों में बदलाव आ रहे हैं. आधुनिक तकनीक की मदद से किसी भी भाषा और साहित्य का संरक्षण और प्रचार-प्रसार पहले से कई गुना सरल हो गया है. अंजस की बुनियाद राजस्थानी जनता द्वारा राजस्थानी भाषा और परंपरा के पुनर्जागरण तथा पुनरोत्थान की यात्रा में एक मील का पत्थर है.

अंजस नामक इस पहल पर रेख़्ता फाउंडेशन नवंबर 2001 से काम कर रहा है. इस पहल की शुरुआत में लिखित साहित्य का डिजिटलीकरण किया जा रहा है.

अंजस महोत्सव
रेख़्ता फाउंडेशन के प्रमुख संजीव सर्राफ ने बताया कि अंजस महोत्सव राजस्थानी भाषा का अपनी किस्म का पहला महोत्सव है. 29-30 अक्टूबर को होने वाले इस महोत्व में राजस्थानी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़ी हस्तियां, कलाकार, साहित्यकार और कारीगर हिस्सा लेंगे.

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अंजस महोत्व में इला अरुण, राजेश तैलांग, अर्जुन देव चारण, मामे खान, महेशराम मेघवाल, मधु आचार्य, बार्मर बॉयज, अरुणा रॉय, आईदान सिंह भाटी, रामस्वरूप किसान, शारदा कृष्णा, सीपी देवल समेत कई बड़ी हस्तियां शिरकत करेंगी.

रेख़्ता फाउंडेशन
उर्दू भाषा और साहित्य को संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध उद्योगपति संजीव सर्राफ ने 2012 में रेख़्ता फाउंडेशन की नींव रखी थी. रेख़्ता फाउंडेशन उर्दू भाषा से जुड़ी एक वेबसाइट भी चलाती है. इस वेबसाइट पर 60 हजार से अधिक गज़ल, लगभग 12 हज़ार नज़्में संग्रहित हैं. वेबसाइट पर 8-8000 ऑडियो-वीडियो और सवा लाख से अधिक ई-बुक्स उपलब्ध हैं.

रेख़्ता फाउंडेशन द्वारा प्रत्येक वर्ष तीन दिवसीय महोत्सव ‘जश्न-ए-रेख़्ता’ का आयोजन किया जाता है. इस महोत्सव में चर्चित शायर, लेखक, फिल्म निर्माता, गायक और कलाकार शरीक होते हैं.

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