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धीमी आंच पर पकी हुई कविताएं हैं ‘अन्तस की खुरचन’- प्रो. शंभुनाथ

धीमी आंच पर पकी हुई कविताएं हैं ‘अन्तस की खुरचन’- प्रो. शंभुनाथ

‘अन्तस की खुरचन’ यतीश कुमार का पहला कविता-संग्रह है.

‘अन्तस की खुरचन’ यतीश कुमार का पहला कविता-संग्रह है.

लेखक यतीश कुमार (Yatish Kumar) के पहले काव्य संग्रह ‘अन्तस की खुरचन’ (Antas Ki Khurchan) का कोलकाता के रविंद्र सदन परिसर में लोकार्पण किया गया. राजकमल प्रकाशन समूह (Rajkamal Prakashan Group) से प्रकाशित इस काव्य संग्रह पर हिंदी जगत के स्थापित हस्ताक्षरों ने अपने-अपने मत प्रकट किए. इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. शंभुनाथ ने कविता दबी हुई मनुष्यता की अभिव्यक्ति है. यह यतीश कुमार की पहली किताब अवश्य है पर धीमी आंच पर पकी हुई कविताएं हैं. लंबी यात्रा में पक कर ये कविताएं आई हैं.

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    Hindi Sahitya News: किसी कविता की पुस्तक का लोकार्पण दबी हुई मनुष्यता का लोकार्पण है. कविता दबी हुई मनुष्यता की अभिव्यक्ति है. खुर्चन का स्वाद इस पर निर्भर करता कि आपका अन्तस कितना बड़ा है. यहां कविता का काम मनुष्य की अन्तस को बड़ा बनाना है.

    ये बातें वरिष्ठ लेखक-आलोचक शंभुनाथ ने यतीश कुमार (Yatish Kumar) के कविता संग्रह ‘अन्तस की खुरचन’ के विमोचन के अवसर पर कहीं. राजकमल प्रकाशन (Rajkamal Prakashan) समूह और राधाकृष्ण पेपरबैक्स के तत्वावधान में बांग्ला अकादमी (रविंद्र सदन परिसर) में यतीश कुमार के पहले कविता-संग्रह के विमोचन एवं परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया.

    समारोह में प्रतिष्ठित आलोचक प्रो. शंभुनाथ की अध्यक्षता में साहित्य एवं संगीत मर्मज्ञ मृत्युंजय कुमार सिंह, वरिष्ठ कवि एवं आलोचक डॉ. आशुतोष, वरिष्ठ कवि एवं आलोचक प्रियंकर पालीवाल, वरिष्ठ आलोचक नीलकमल एवं लेखक-आलोचक राकेश बिहारी ने भी पुस्तक पर अपनी बात रखी.

    पुस्तक पर परिचर्चा सत्र से पहले कविता-संग्रह ‘अन्तस की खुरचन’ (Antas Ki Khurchan) के लिए देश भर के ख्याति प्राप्त साहित्यकारों से मिले शुभकामना संदेशों की विजुअल प्रस्तुति भी की गई. कविता संग्रह से ‘किऊल: मेरी कविताओं की धौंकनी’ के योगेश तिवारी द्वारा किए पाठ पर काव्यात्मक प्रस्तुति, नीलांबर के सदस्यों एवं हावड़ा नवज्योति के बच्चों द्वारा इस संग्रह की कविताओं पर आधारित कविता कोलाज की प्रस्तुति दी गई.

    इस अवसर पर कवि यतीश कुमार के रचनात्मक सफर की सहयात्री पत्नी स्मिता गोयल ने ‘अन्तस की खुरचन’ के सृजन प्रक्रिया और कविता-संग्रह में समाहित अपनी स्मृतियों से लोगों को अवगत करवाया.

    Yatish Kumar

    कवि की राजनीतिक चेतना पर बात करते हुए लेखक-समीक्षक राकेश बिहारी ने कहा, ‘यतीश की कविता बाहर से भीतर की यात्रा करती है. इस संग्रह को पढ़ते हुए मुझे लगातार लगा कि इसकी लगभग सभी कविताओं में एक अच्छी कविता होने की संभावना है. पहले संग्रह में यदि कोई कवि अपनी हर कविता में आपको कुछ ऐसे दृश्य दिखा जाता है जहां एक मुकम्मल कविता होने की संभावना तलाश सकते हैं, तो इसे बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिए.

    उन्होंने कहा कि अमूनन हम सुनते आए हैं कि कला की हर विधा निजता से सामाजिकता की ओर की यात्रा होती है. अपनी प्रस्तुति में यह किताब इस मान्यता के विपरीत है. पहले यहां सामाजिकता से जुड़ी कविताएं हैं फिर निजता से संबंधित.

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    कवि एवं आलोचक नीलकमल ने ‘अंतस की खुरचन’ में कई अच्छी कविताओं को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि आलोचक का दायित्व है फर्क करना कि कहां कविता लहू से सींची गई कविता है और कौन कविता है जो फ्रॉड कविता है. इन्ही बातों को आधार बनाकर मैंने इस संग्रह की कई कविताओं पर एक धारणा बनाने की कोशिश की तो पाया कि इस किताब में ऐसी कुछ कविताएं हैं जो खरी उतरती हैं. संग्रह के दूसरे खंड में संकलित कविता ‘मेरी बच्ची’ और ‘सबसे प्यारी हँसी‘ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कविता में पिता-पुत्री के बीच के आत्मीय संबंध औ वात्सल्य को उकेरा और कहा यहां कवि की दृष्टी आत्मदृष्टि है.

    ‘सुविधा और आजादी’ कविता का जिक्र करते हुए नीलकमल ने कहा कि साइबर क्राइम, डेटा प्राइवेसी जैसे मुद्दों को उन्होंने छुआ है और नया विषय उठाया है. यह कविता की उपलब्धि होती है कि नई कविता पढ़ते हुए आपको बड़े कवि की कोई पुरानी कविता याद आ जाएॉ. इस संग्रह से बारिश जैसी कविताएं पढ़ते हुए मुझे ऐसी ही अनुभूति हुई. कवि की पहले संग्रह में अगर आठ दस कविताओं में सम्भावनाएं है तो काव्य संग्रह वाकयी महत्वपूर्ण हो जाता है. इस मायने में भी यह एक संभावना जगाती किताब है.

    अपने संबोधन में वरिष्ठ लेखक-आलोचक प्रियंकर पालीवाल ने यतीश की कविताओं में आये टटके शब्दों की अर्थध्वनियों पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि ऐसे कवि जो हिंदी पढ़ने-पढ़ाने से अलग क्षेत्र और सोच के साथ आते हैं उनकी रचनाओं में नयापन रहता है.

    उन्होंने वरिष्ठ कवि विनोद शुक्ल और अष्टभुजा शुक्ल की मार्फत काव्य संग्रह की प्रस्तावना को महत्वपूर्ण बताया है. उन्होंने संग्रह में प्रयुक्त इलैक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड जैसे शब्दों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब विशुद्ध साहित्यिक परिवेश से अलग के रचनाकार आते हैं तो कुछ नए शब्द लिए आते हैं. यह शब्दावली हिन्दी कविता को एक अलग सुगन्ध देता है. ओसारा कविता के जिक्र में ओसारे को सामुहिकता का प्रतीक बताते हुए कविता के बिंब की सराहना की.

    अपने वक्तव्य में वरिष्ठ कवि-आलोचक आशुतोष सिंह ने कहा, ‘अन्तस को खुरचना कठिन होता है और यह तभी संभव है जब कवि खुद ईमानदार हो. काव्य संग्रह के प्रकाशन से पहले कवि यतीश को हम नीलांबर के कार्यक्रम में कविता पाठ करते हुए समझ चुके हैं. उन्होंने कहा कि कविता पढ़ते हुए मेरा ध्यान काव्य भाषा पर जाता है. नयी शब्दावली के आने से एक ताजापन मिलता है. यतीश की कविता नवीनता पैदा करती है. यहां उनकी कविताओं में रूह झुलसी नहीं है बल्कि शुलगती और चीखती हुई है. यतीश ने दोस्त के कंधे को खादी का कंधा कहा है. खादी के कंधे पर आंसू सूख जाते हैं पर अब रेशम के लिवास हैं जहाँ आसू नहीं सूख पाते हैं. ‘बस अपना जवाब चाहिए’ कविता का उदाहरण देते हुए उन्होंने उपेक्षितों और सत्ता पर आसीन लोगों की तुलना कर आज के यथार्थ को दर्शाया। कवि के बोलने में और कर्म में को फर्क नहीं है.’

    अपने वक्तव्य में वरिष्ठ कवि मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा, ‘यतीश की कविता पढ़ते हुए हमारा ध्यान उनकी काव्य भाषा पर जाता है. यतीश कुमार की कविता नवीनता से भरी हुई है. दो खण्ड में विभाजित इस संग्रह की कविताओं में कवि ने एक में स्व का और दूसरे में जगत की सुंदर व्याख्या की है. कवि की स्व से जुड़ी कविताओं के माध्यम से कह कहते है कि रूमानियत पर कविता नहीं लिखता कोई पर यतीश की कविताओं में रूमानियत है प्रेम का यथार्थ रूप है.

    लेखकीय वक्तव्य में यतीश कुमार ने कविता लिखने के सूत्रों और प्रेरणाओं पर बात की. उन्होंने पुस्तक की सफलता पाठकों को सौंपते हुए कहा कि जिस तरह से इस कविता-संग्रह को पाठक प्यार दे रहे हैं और वरिष्ठ लेखक-आलोचक इस पर बात कर रहे हैं, यह मेरे लिए अप्रत्याशित है.

    प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि किसी कविता की पुस्तक का लोकार्पण दबी हुई मनुष्यता का लोकार्पण है. कविता दबी हुई मनुष्यता की अभिव्यक्ति है. यह यतीश कुमार की पहली किताब अवश्य है पर धीमी आंच पर पकी हुई कविताएं हैं. लंबी यात्रा में पक कर ये कविताएं आई हैं. किताब की भूमिका से ‘मेरे बचपन का शहर जैसे-जैसे विकास कर रहा है, रेत नदी पर काबित होती जा रही है. वह बहुत खामोश हो गई है. पतली सी दो धार और बीच में बातुओं का दोआब, मानी जैसे आँखों से नीर बह रहा हो और फिर भी यह मुस्करा रही हो‘ का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वर्षों से शहर में रहते हुए भी कवि का नगरीकरण नहीं हो पाया है. उन्होंने यतीश को प्रेम का कवि कहते हुए उनकी प्रेम कविताओं की सराहना की.

    कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. विनय मिश्र ने यतीश कुमार की कविताओं के कई अंश पढ़े.

    लेखक यतीश कुमार
    बिहार के मुंगेर जिले से आनेवाले यतीश कुमार ने पिछले कुछ वर्षों में साहित्य-जगत में अपनी विशेष रचनात्मक उपस्थ‍िति दर्ज कराई है. उनकी कविताएं और संस्मरण तमात प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं. ‘अन्तस की खुरचन’ उनका पहला कविता-संग्रह है.

    Tags: Books, Hindi Literature

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