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कथाकार शिवमूर्ति को इस वर्ष का श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान

कथाकार शिवमूर्ति को इस वर्ष का श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान

शिवमूर्ति (Shivmurti) का जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक अत्यंत पिछड़े गांव कुरंग में हुआ था.

शिवमूर्ति (Shivmurti) का जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक अत्यंत पिछड़े गांव कुरंग में हुआ था.

श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में यह पुरस्कार शुरू किया गया था. यह सम्मान हर साल ऐसे हिन्दी लेखक को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन के लोग होते हैं. सम्मान स्वरूप कथाकार को 11 लाख की धनराशि, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिह्न दिया जाता है. सम्मान समारोह हर वर्ष 31 जनवरी को होता है.

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    IFFCO Sahitya Samman News: देश के प्रतिष्ठित श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान- 2021 (Sri Lal Shukla Smiriti IFFCO Sahitya Samman) के लिए हिंदी साहित्य के वरिष्ठ कथाकार कथाकार शिवमूर्ति को चुना गया है. इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको-IFFCO) की ओर से चयन समिति के निर्णय के साथ शिवमूर्ति के नाम की घोषणा की गई.

    इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कथाकार शिवमूर्ति को पुरस्कार के लिए बधाई दी है. राजकमल प्रकाशन समूह ने भी शिवमूर्ति को इफको साहित्य सम्मान के लिए बधाई दी है.

    शिवमूर्ति ने कसाईबाड़ा, अकालदण्ड, तिरिया चरित्तर आदि कहानियों में उन्होंने महिलाओं, दलितों और कमजोर वर्ग के लोगों के संघर्षों को बड़े ही मार्मिक और सजीव ढंग से प्रस्तुत किया है. उनकी रचनाओं में त्रिशूल, तर्पण, आखिरी छलांग और केसर कस्तूरी प्रमुख हैं.

    शिवमूर्ति की उनकी रचनाओं में सामंती व्यवस्था की विद्रुपता व कटु यथार्थ की प्रस्तुति रहती है. उन्होंने अपने कथा साहित्य में ग्रामीण जीवन की विशेषताओं, विषमताओं और अंतर्विरोधों का यथार्थ चित्रण किया है.

    Hindi Author Shivmurti

    श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान
    श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में यह पुरस्कार शुरू किया गया था. यह सम्मान हर साल ऐसे हिन्दी लेखक को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन के लोग होते हैं. सम्मान स्वरूप कथाकार को 11 लाख की धनराशि, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिह्न दिया जाता है. सम्मान समारोह हर वर्ष 31 जनवरी को होता है.

    पहले श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान से वरिष्ठ साहित्यकार विद्यासागर नौटियाल (Vidyasagar Nautiyal) को सम्मानित किया गया था. इनके बाद वर्ष 2012 में शेखर जोशी (Shekhar Joshi), वर्ष 2013 में कथाकार संजीव (Sanjeev), वर्ष 2014 में मिथिलेश्वर (Mithileshwar), वर्ष 2015 अष्टभुजा शुक्ल (Ashta Bhuja Shukla), वर्ष 2016 में कमलाकांत त्रिपाठी (Kamalakant Tripathi), वर्ष 2017 में रामदेव धुरंधर (Ramdeo Dhoorundhur) और वर्ष 2018 में रामधारी सिंह दिवाकर (Ramdhari Singh Diwakar) को इस सम्मान से अलंकृत किया गया.

    कथाकार शिवमूर्ति
    शिवमूर्ति (Shivmurti) का जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक अत्यंत पिछड़े गांव कुरंग में हुआ था. ‘कसाईबाड़ा’, ‘सिरी उपमा जोग’, ‘भरत नाट्यम्’, ‘तिरिया चरित्तर’ आदि उनकी प्रसिद्ध कहानियां हैं. उनका कहानी संग्रह ‘केशर कस्तूरी’ काफी चर्चित रहा है. ‘त्रिशूल’ और ‘तर्पण’ उनके चर्चित उपन्यास हैं.

    उनकी कहानी ‘कसाईबाड़ा’ पर पांच हजार से ज्यादा मंचन हो चुके हैं और एक फीचर फिल्म भी बनी है. ‘तिरिया चरित्तर’ पर बासु चटर्जी ने फिल्म का निर्माण किया है.

    Tags: Hindi Literature

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