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गज़लकार दुष्यंत कुमार की पत्नी राजेश्वरी देवी का निधन, साहित्य जगत में शोक

गज़लकार दुष्यंत कुमार की पत्नी राजेश्वरी देवी का निधन, साहित्य जगत में शोक

राजेश्वरी देवी का विवाह गज़ल सम्राट दुष्यंत कुमार के साथ 30 नवंबर, 1949 को हुआ था.

राजेश्वरी देवी का विवाह गज़ल सम्राट दुष्यंत कुमार के साथ 30 नवंबर, 1949 को हुआ था.

सहारनपुर की रहने वाली राजेश्वरी देवी चार बहन-भाई थे. राजेश्वरी देवी भोपाल के टीटीनगर स्थित शासकीय मॉडल स्कूल में हिंदी की शिक्षिका थीं.

    Kavi Dushyant Kumar: सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार की पत्नी राजेश्वरी देवी (Rajeshwari Devi) का निधन हो गया है. 93 वर्षीय राजेश्वरी देवी का निधन रविवार देर रात भोपाल (Bhopal) में हुआ. ब्रेम हेमरेज के चलते पिछले कई दिनों से वह अस्पताल में भर्ती थीं. भोपाल में वह अपने बेटे आलोक त्यागी के साथ रह रही थीं. उनका अंतिम संस्कार सोमवार को भदभदा विश्राम घाट पर किया गया.

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) समेत कई राजनेताओं और साहित्यकारों ने राजेश्वरी देवी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है.

    राजेश्वरी देवी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) से थीं. सहारनपुर के डंघेड़ा गांव की रहने वाली राजेश्वरी देवी का विवाह गज़ल सम्राट दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar) के साथ 30 नवंबर, 1949 को हुआ था.

    सहारनपुर की रहने वाली राजेश्वरी देवी चार बहन-भाई थे. उनके दो भाइयों बिजेन्द्र कुमार और सुरेन्द्र कुमार का निधन पहले ही हो चुका था. उनकी छोटी बहन मिथले ग्वालियर में अपने परिवार के साथ रहती हैं. राजेश्वरी देवी भोपाल के टीटीनगर स्थित शासकीय मॉडल स्कूल में हिंदी की शिक्षिका थीं.

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    दुष्यंत कुमार का जन्‍म उत्तर प्रदेश में बिजनौर (Bijnor) जनपद की तहसील नजीबाबाद के ग्राम राजपुर नवादा में हुआ था. उन्होंने दसवीं कक्षा से कविता लिखना शुरू कर दिया था. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी में बीए और एमए किया. इंटरमीडिएट करने के दौरान ही राजेश्वरी कौशिक से विवाह हुआ.

    मुरादाबाद से बीएड करने के बाद 1958 में आकाशवाणी दिल्ली (Akashvani Delhi) में आये. वे मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग के अंतर्गत भाषा विभाग में रहे. 30 दिसंबर, 1975 की रात हृदयाघात से उनकी मृत्यु हो गई.

    shivraj

    दुष्यंत कुमार का गज़ल संग्रह ‘साये में धूप’ (Saye Mein Dhoop) हिंदी साहित्य की एक कालजयी रचना माना जाता है. 1975 में गज़ल संग्रह ‘साये में धूप’ का प्रकाशन हुआ था.

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    निदा फाज़ली (Nida Fazli), दुष्यंत कुमार के बारे में लिखते हैं, “दुष्यंत की नज़र उनके युग की नई पीढ़ी के ग़ुस्से और नाराज़गी से सजी बनी है. यह ग़ुस्सा और नाराज़गी उस अन्याय और राजनीति के कुकर्मो के ख़िलाफ नए तेवरों की आवाज़ थी, जो समाज में मध्यवर्गीय झूठेपन की जगह पिछड़े वर्ग की मेहनत और दया की नुमानंदगी करती है.”

    दुष्यंत कुमार की अलग-अलग गजलों की कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं-

    एक जंगल है तेरी आंखों में, मैं जहां राह भूल जाता हूं,
    तू किसी रेल-सी गुजरती है, मैं किसी पुल-सा थरथराता हूं.

    होने लगी है जिस्म में जुम्बिश तो देखिए,
    इस परकटे परिंदे की कोशिश तो देखिए.

    कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
    मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिंदुस्तान है.

    कहां तो तय था चिरागां हरेक घर के लिए,
    कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए.

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