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गांधी जयंती पर विशेष: महात्मा गांधी के उच्‍चादर्श और हम

गांधी जी ने जीवन में ऐसे काम किए जिन्होंने पूरी विश्‍व मानवता पर प्रभाव डाला. उनका निजी जीवन भी जैसे सामाजिक जीवन था.

गांधी जी ने जीवन में ऐसे काम किए जिन्होंने पूरी विश्‍व मानवता पर प्रभाव डाला. उनका निजी जीवन भी जैसे सामाजिक जीवन था.

गांधी जी कहीं न कहीं गीता से भी गहरे प्रभावित रहे. इसलिए कि महाभारत धर्मयुद्ध कहा जाता है. भाई-भाई महासमर में सम्‍मुख ह ...अधिक पढ़ें

(ओम निश्‍चल/Om Nishchal)

पिछली पूरी शताब्‍दी और आज तक भारत और विश्‍व में जिस एक शख्‍स की बात बहुधा की जाती है वे महात्‍मा गांधी हैं. कैसे एक साधारण मनुष्‍य से वे भारत की आजादी के नायक बने, कैसे राष्ट्रपिता बने, उनके जीवन मूल्‍य आम भारतीय के जीवन मूल्‍य बन गए. ये सब बहुत असाधारण बात हैं. उनका जीवन विविधताओं की मिसाल है. संघर्ष की मिसाल है. एक जिद की मिसाल है. आइये उनके जीवन की बड़ी घटनाओं का जायजा लेते हैं-

गांधीजी का जन्‍म पोरबंदर में हुआ. 13 वर्ष में विवाह कस्‍तूरबा से हुआ. बुनियादी तालीम के बाद 1988 के बाद वे लंदन गए और बैरिस्‍टर बन कर लौटे. 1894 में एक विवाद के संबंध में दक्षिण अफ्रीका गए और वहां होने वाले अन्‍याय के विरुद्ध लामबंद हो गए. वहां के नागरिकों को मताधिकार दिलाया. दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने वहां के लोगों के साथ मिल कर अवज्ञा आंदोलन चलाया. वे वहां गए तो कुछ ही समय के लिए थे पर जब देखा कि दक्षिण अफ्रीका के नागरिकों पर घोर अत्‍याचार हो रहा है तो उस अन्‍याय के विरुद्ध प्रतिकार में शामिल हो गए. उनके जीवन की एक महत्‍वपूर्ण कालावधि दक्षिण अफ्रीका में ही बीती.

1916 में मोहनदास करमचंद गांधी भारत वापस आए तो भारत में भी अंग्रेजों का जुल्‍म चरम पर था. फलत: यहां होने वाले आजादी के संघर्ष में शामिल हो गए. बालगंगाधर तिलक के बाद 1920 में गांधी आजादी की लड़ाई के अगुवा और मार्गदर्शक बने.

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1914 से 1919 तक प्रथम विश्‍वयुद्ध चला. गांधी ने अंग्रेजों से मांग की कि वे भारत को आजाद करें. अंग्रेजों ने कहा भी पर माने नहीं. न मानने पर गांधी ने आजादी के लिए सिलसिलेवार आंदोलनों का अभियान छेड़ दिया-
1918 चंपारन और खेड़ा सत्‍याग्रह सत्‍याग्रह.
1919 खिलाफत आंदोलन.
1920 असहयोग आंदोलन.
1930 अवज्ञा आंदोलन- नमक सत्‍याग्रह और दांडी यात्रा.
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन.

चंपारण में 1918 में नील उत्‍पादन के विरुद्ध चलाया गया गांधी जी का आंदोलन सफल रहा और अंग्रेजों को उनकी बात माननी पड़ी. खेड़ा गुजरात में बाढ़ के बावजूद अंग्रेजों ने जो टैक्‍स लगाया था उसकी वापसी के विरुद्ध आंदोलन चलाया गया जिसके फलस्‍वरूप अंग्रेज टैक्‍स वापस लेने को बाध्‍य हुए. ‘खिलाफत आंदोलन’ मुस्‍लिम समाज को समर्थन देने के लिए चलाया गया. इसके माध्यम से उन्‍होंने देश के मुसलमानों को एक जुट करने का प्रयास किया. हिंदू मुसलमानों को एकता के सूत्र में बांधने का यत्‍न किया. यह और बात है कि दोनों समुदायों के बीच फासले बढ़ते गए. 1920 में चलाए गए ‘असहयोग आंदोलन’ के पीछे अंग्रेजों द्वारा वहसी जलियांवाला बाग हत्‍याकांड था. आंदोलनों से निपटने के लिए अंग्रेज सरकार ने रौलेट ऐक्‍ट पारित किया था. इस सबके विरोध में असहयोग आंदोलन ने आजादी की लड़ाई में नींव का काम किया. इसी बीच चौरी-चौरा कांड भी हुआ जहां हिंसक वारदातें भी हुईं. बीसियों सिपाही जीवित जल गए. गांधी जी इससे द्रवित हो उठे. फलत: इस हिंसा से सहमत न होने के कारण गांधी ने चौरी-चौरा कांड की भर्त्‍सना की तथा इस आंदोलन को वापस लिया.

1930 आजादी की लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ था. यह दौर सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक सत्‍याग्रह आंदोलन का था. ब्रिटिश कानूनों को नहीं मानने का निर्णय उन्‍होंने लिया तथा अंग्रेजों के इस आदेश कि कोई भी नमक नहीं बनाएगा, के खिलाफ गांधी जी ने दांडी मार्च किया और वहां जाकर नमक बना कर अंग्रेजों के इस कानून को ठेंगा दिखाया. नमक आंदोलन की शुरुआत 1930 में साबरमती आश्रम से की गयी.

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26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस ने पूर्ण स्‍वराज की घोषणा की. 24 दिनों की यह यात्रा साबरमती से दांडी तक की थी. 240 मील की यात्रा. यहां हजारों की संख्‍या में लोगों के साथ पहुंच कर अपने 78 स्‍वयंसेवकों की मदद से गांधीजी ने नमक बना कर ही दम लिया और अंग्रेजों के कानून की हवा निकाल दी. समुद्री तटों पर नमक बनाने को लेकर यात्रा करते हुए वे गिरफतार भी किए गए. इस सत्‍याग्रह के कारण लगभग 80,000 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई. धरसाणा में हजारों लोगों को मार दिया गया. पर चूंकि यह आंदोलन सत्‍य के आग्रह पर आधारित था, गांधी के इस रुख से मार्टिन लूथर किंग आदि कुछ विश्‍व के नेताओं पर अनूकूल मानवीय प्रभाव पड़ा.

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ तक आते-आते भारतीयों में अपनी स्‍वतंत्रता के प्रति चेतना आग की तरह फैल चुकी थी. करो या मरो की स्‍थिति थी. अलग-अलग तिथियों में बिखरे होने कारण यह आंदोलन बहुत सफल भले नहीं कहा जा सकता पर इससे अंग्रेजों में यह बात बैठ गई कि देर सबेर भारत छोड़ कर जाना होगा.

गांधी जी ने जीवन में कुछ ऐसे काम किए जिन्होंने पूरी विश्‍व मानवता पर प्रभाव डाला. उनका निजी जीवन भी जैसे सामाजिक जीवन था. सादा जीवन उच्‍च विचार में उनकी आस्‍था थी. अपने इसी स्‍वभाव के कारण वे महात्‍मा कहे जाने लगे. सत्‍य और अहिंसा दो बड़े हथियार उनके पास थे. छुआछूत दूर करने को उन्‍होंने अपने जीवन का उद्देश्‍य बनाया. स्‍वदेशी आंदोलन गांधी की देन है. आत्‍मिक शुद्धि के लिए उपवास को उन्‍होंने अहमियत दी. हिंदू-मुस्‍लिम एकता के लिए जीवन भर प्रयास किया. पहली बार सुभाष चंद बोस ने उन्‍हें राष्‍ट्रपिता कह कर पुकारा. तब से पूरा राष्‍ट्र उन्‍हें राष्‍ट्रपिता कह कर पुकारने लगा.

उनकी 150वीं जयंती पर उनके दस विचारों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया —
1- व्यक्ति अपने विचारों के सिवाय कुछ नहीं है. वह जो सोचता है, वह बन जाता है.
2- कमजोर कभी क्षमाशील नहीं हो सकता है. क्षमाशीलता ताकतवर की निशानी है.
3- ताकत शारीरिक शक्ति से नहीं आती है. यह अदम्य इच्छाशक्ति से आती है.
4- धैर्य का छोटा हिस्सा भी एक टन उपदेश से बेहतर है.
5- गौरव लक्ष्य पाने के लिए कोशिश करने में हैं, न कि लक्ष्य तक पहुंचने में.
6- आप जो करते हैं वह नगण्य होगा. लेकिन आपके लिए वह करना बहुत अहम है.
7- कोई कायर प्यार नहीं कर सकता है; यह तो बहादुर की निशानी है.
8- स्वास्थ ही असली संपत्ति है, न कि सोना और चांदी.
9- किसी देश की महानता और उसकी नैतिक उन्नति का अंदाजा हम वहां जानवरों के साथ होने वाले व्यवहार से लगा सकते हैं.
10- हम जो करते हैं और हम जो कर सकते हैं, इसके बीच का अंतर दुनिया की ज्यादातर समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त होगा.

महात्‍मा गांधी के अनमोल विचार
– हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें.
– हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा.
– अपने आपको पाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि अपने आपको दूसरो की सेवा में खो दो.
– मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है. सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन.
– पाप से घर्णा करो, पापी से प्रेम करो.
– हर रात जब मैं सोने जाता हूं, तब मर जाता हूं और अगली सुबह जब मैं उठता हूं, मेरा पुनर्जन्म होता है.
– आप मेरे शरीर को नष्ट कर सकते हैं, मुझे जंजीरों में जकड सकते हैं लेकिन मेरे विचारो को कैद नहीं कर सकते.
– अक्लमंद इंसान काम करने से पहले सोचता है और मुर्ख इंसान काम करने के बाद.
– सत्य एक है, मार्ग अनेक हैं.
– पुस्तकों का मूल्य रत्नों से भी कही अधिक होता है, क्योकि पुस्तकें भविष्य को उज्ज्वल करती हैं.
– कुछ लोग सफलता के सिर्फ सपने देखते हैं जबकि कुछ लोग मेहनत करते हैं और सफलता को हासिल करते हैं.
गांधी जी के जीवन के कुछ प्रेरक प्रसंग-

गांधी जी देश भर में भ्रमण कर चरखा संघ के लिए धन इकठ्ठा कर रहे थे. अपने दौरे के दौरान वे ओडिसा में एक सभा को संबोधित करने पहुंचे. उनके भाषण के बाद एक बूढ़ी गरीब महिला खड़ी हुई. उसके बाल सफेद थे. कपडे़ फटे हुए. वह कमर झुका कर चल रही थी. किसी तरह वह भीड़ से होते हुए गांधी जी के पास तक पहुंची. ‘मुझे गांधी जी को देखना है.’ उसने आग्रह किया और उन तक पहुंच कर उनके पैर छुए.

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बूढ़ी महिला अपनी साड़ी के पल्लू में बंधा एक ताम्बे का सिक्का निकाला और गांधी जी के चरणों में रख दिया. गांधी जी ने सावधानी से सिक्का उठाया और अपने पास रख लिया. उस समय चरखा संघ का कोष जमनालाल बजाज संभाल रहे थे. उन्होंने गांधी जी से वह सिक्का मांगा, लेकिन गांधी जी ने उसे देने से मना कर दिया.

‘मैं चरखा संघ के लिए हजारों रुपये के चेक संभालता हूं’, जमनालाल जी हंसते हुए कहा, ‘फिर भी आप मुझ पर इस सिक्के को लेके यकीन नहीं कर रहे हैं?’
‘यह तांबे का सिक्का उन हजारों से कहीं कीमती है,’ गांधी जी बोले.
‘यदि किसी के पास लाखों हैं और वह हजार-दो हजार दे देता है तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन ये सिक्का शायद उस औरत की कुल जमा-पूंजी थी. उसने अपना सारा धन दान दे दिया. कितनी उदारता दिखाई उसने…कितना बड़ा बलिदान दिया उसने!!! इसीलिए इस तांबे के सिक्के का मूल्य मेरे लिए एक करोड़ से भी अधिक है.’
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रात बहुत काली थी और मोहन डरा हुआ था. हमेशा से ही उसे भूतों से डर लगता था. वह जब भी अंधेरे में अकेला होता उसे लगता की कोई भूत आस-पास है और कभी भी उसपे झपट पड़ेगा. और आज तो इतना अंधेरा था कि कुछ भी स्पष्ट नहीं दिख रहा था, ऐसे में मोहन को एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना था.
वह हिम्मत कर के कमरे से निकला. उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा और चेहरे पर डर के भाव आ गए. घर में काम करने वाली रम्भा वहीं दरवाजे पर खड़ी यह सब देख रही थी.
‘क्या हुआ बेटा?’ , उसने हंसते हुए पूछा.
‘मुझे डर लग रहा है दाई,’ मोहन ने उत्तर दिया.
‘डर, बेटा किस चीज का डर?’
‘देखिये कितना अंधेरा है! मुझे भूतों से डर लग रहा है!’ मोहन सहमते हुए बोला.
रम्भा ने प्यार से मोहन का सर सहलाते हुए कहा, ‘जो कोई भी अंधेरे से डरता है वह मेरी बात सुने: राम जी के बारे में सोचो और कोई भूत तुम्हारे निकट आने की हिम्मत नहीं करेगा. कोई तुम्हारे सर का बाल तक नहीं छू पायेगा. राम जी तुम्हारी रक्षा करेंगे.’

रम्भा के शब्दों ने मोहन को हिम्मत दी. राम नाम लेते हुए वह कमरे से निकला और उस दिन से मोहन ने कभी खुद को अकेला नहीं समझा और भयभीत नहीं हुआ. उसका विश्वास था कि जब तक राम उसके साथ हैं उसे डरने की कोई जरुरत नहीं.
इस विश्वास ने गांधी जी को जीवन भर शक्ति दी, और मरते वक़्त भी उनके मुख से राम-नाम ही निकला.

कलकत्ता में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़के हुए थे. तमाम प्रयासों के बावजूद लोग शांत नहीं हो रहे थे. ऐसी स्थिति में गांधी जी वहां पहुंचे और एक मुस्लिम मित्र के यहां ठहरे. उनके पहुंचने से दंगा कुछ शांत हुआ लेकिन कुछ ही दिनों में फिर से आग भड़क उठी. तब गांधी जी ने आमरण अनशन करने का निर्णय लिया और 31 अगस्‍त, 1947 को अनशन पर बैठ गए.

इसी दौरान एक दिन एक अधेड़ उम्र का आदमी उनके पास पहुंचा और बोला, ‘मैं तुम्हारी मृत्यु का पाप अपने सर पर नहीं लेना चाहता, लो रोटी खा लो.’
और फिर अचानक ही वह रोने लगा, ‘मैं मरूंगा तो नरक जाऊंगा!!’
‘क्यों ?’, गांधी जी ने विनम्रता से पूछा.
‘क्योंकि मैंने एक आठ साल के मुस्लिम लड़के की जान ले ली.’
‘तुमने उसे क्यों मारा ?’ गांधी जी ने पूछा.
‘क्योंकि उन्होंने मेरे मासूम बच्चे को जान से मार दिया.’ आदमी रोते हुए बोला.
गांधी जी ने कुछ देर सोचा और फिर बोले, ‘मेरे पास एक उपाय है.’
आदमी आश्चर्य से उनकी तरफ देखने लगा.
‘उसी उम्र का एक लड़का खोजो जिसने दंगो में अपने माता-पिता खो दिए हो और उसे अपने बच्चे की तरह पालो. लेकिन एक चीज सुनिश्चित कर लो कि वह एक मुस्लिम होना चाहिए और उसी तरह बड़ा किया जाना चाहिए.’ गांधी जी ने अपनी बात ख़त्म की.
यह थी गांधी की दृष्‍टि. ये प्रसंग हमें क्‍या सीख देते हैं इस ओर हमें ध्‍यान देना चाहिए.

गांधी का जीवन मानवता के लिए संदेश है. गांधी ने सच पूछिए तो एक सदगृहस्‍थ का जीवन जिया. पुत्र कलत्र से भरे पूरे रहे. उनकी अपनी जीवनचर्या के लिए धन की कमी न थी. क्‍योंकि उन्‍हें जरूरत ही कितनी थी. जीवन भर सत्‍य के प्रति आग्रही रहे. सहिष्‍णु बने रहे. अन्‍याय का प्रतिकार करते रहे. सत्‍य और न्‍याय के लिए प्राणों का भी बलिदान किया. उनके विचारों से सनातन भारतीय संस्‍कृति की खुशबू आती है. गीता हिंदुओं का मान्‍य ग्रंथ है- ‘कर्मण्‍येवाधिकारस्‍ते मा फलेष कदाचन.’ कर्म करना आपका अधिकार है, उसका क्या फल मिलेगा इस पर ध्‍यान नही देना है. सत्‍य और न्‍याय के प्रति डटे रहने का संस्‍कार भी उन भारतीय मूल्‍यों को जाता है जिसमें कहा गया है-
निन्‍दन्‍तु नीतिनिपुणा: यदि वास्‍तुवन्‍तु
लक्ष्‍मी समाविशतु गच्‍छतु वा यथेष्‍टम्
अद्यैव मरणमस्‍तु युगांतरेSवा
न्‍यायात्‍पथ: प्रविचन्‍ति पदं न धीरा:।

वे आजीवन न्‍याय के पथ पर चले. सत्‍य के मार्ग पर चले. हमारी संस्‍कृति में कहा गया है:

सत्‍येन वायवो वान्‍ति सत्‍येन तपते रवि:
सत्‍येन धार्यते पृथ्‍वी, सर्वम् सत्‍ये प्रतिष्‍ठितम्

गांधी ने इस सनातन विचार की रक्षा की. उसे जाग्रत जीवन मूल्‍य के रूप में अपने जीवन और कर्म में प्रतिष्‍ठित किया. गांधी जी कहीं न कहीं गीता से भी गहरे प्रभावित रहे. इसलिए कि महाभारत धर्मयुद्ध कहा जाता है. भाई-भाई महासमर में सम्‍मुख हैं और व्‍यामोह में घिरे हैं. अर्जुन के इस व्‍यामोह कि कैसे अपने ही अग्रजों अनुजों पर बाण संधान करूं. कृष्‍ण उन्‍हें उपदेश देते हैं. धर्म के लिए अपने भाइयों से भी युद्ध करना पड़े तो वह अनीति नहीं है. वही युगधर्म है. गांधी के विचारों में वेद पुराण उपनिषद का सारतत्‍व निहित है. बुद्ध व महावीर की करुणा उनके विचारों के मूल में है. उन्‍होंने अपने जीवन में 11 व्रतों के पालन का संकल्‍प लिया- सत्‍य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्‍वाद, अस्‍तेय, अपरिग्रह, अभय, अस्‍पृश्‍यता-निवारण, शारीरिक श्रम, सर्वधर्म समभाव, स्‍वदेशी.

गांधी के विचारों की प्रासंगिकता पर बहस
किसी ने हाल ही में गांधीवादी चिंतक कुमार प्रशांत से आज के तकनीकी युग में गांधी के विचारों की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े किए तो उनका मानना था कि दुनिया में हर युग तकनीक का युग रहा है. हर आने वाली तकनीक मौजूदा तकनीक को पीछे धकेल देती है. गांधी जी ने सदैव यह पक्ष रखा कि तकनीक और मशीनी युग में आखिर मनुष्‍य की जगह कहां होगी. आज तकनीक का ही वर्चस्‍व है कि एक बटन दबा भर देने से दुनिया राख हो सकती है तो इस तकनीक का आखिर क्‍या प्रयोजन?

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सूचना प्रौद्योगिकी और इंटरनेट ने भले ही दुनिया के सामने ज्ञान के गवाक्ष खोले हों कि पलक झपकते आपकी जिज्ञासाओं का समाधान हो जाए पर जब इंटरनेट नहीं थे तो भी हमारा वह समय अपने समय की बौद्धिकता का चरम युग था. महाभारत, रामायण, उपनिषद, आरण्‍यक, ओल्‍ड टेस्‍टामेंट, तमाम वैज्ञानिक धरती की इसी कोख से उपजे और उनके अनेक आविष्‍कारों ने मानवता के हित में काम किया. सूचना तकनीक आज जितनी उन्‍नत है उतने ही साइबर अपराध हो रहे. आज भी आत्‍महत्‍या करते हुए किसानों को यह तकनीक क्‍या दे रही है. क्‍या उनके उद्धार का कोई रास्‍ता इस उच्‍च तकनीकी के पास है. आज कम्‍यूटर पर कुछ देशों का एकाधिकार है. वह पूरी दुनिया के सूचनातंत्र को अपनी मुट्टी में कैद करने की तकनीकी का युग है कि आज हमारी जरा भी निजता सुरक्षित नहीं रही.

कुमार प्रशांत का मानना था कि आज ग्‍लोबल विलेज की अवधारणा का गान किया जाता है पर यह उदारतावाद, भूमंडलीकरण हमारी वसुधैव कुटुम्‍बकम की धारणा से कोसों दूर है. यह सब अपने हथियारों व साज सामान को पूरी दुनिया में बेचने का एकमात्र उपक्रम व मुनाफा को अपने देशों में ले जाने का लक्ष्‍य है. गांधी का आंदोलन गांव-गांव को स्‍वावलंबी बनाने का था. उद्योग-धंधों की केंद्रीयता शहरों महानगरो में न हो इस पर था. पर आज भी ऐसा नहीं हुआ. किसानों की पैदावार को बढ़ाने के लिए जिस तरह खाद व पेस्‍टीसाइड्स का प्रयोग बढ़ा है, उसने न केवल जमीन की उर्वराशक्‍ति का ह्रास किया है बल्‍कि मनुष्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य के साथ भी खिलवाड़ किया है.

जैसा कि वरिष्‍ठ अर्थशास्‍त्री गुरचरण दास का कहना है कि गांधी के सत्‍य और अहिंसा के विचार अब और प्रासंगिक हैं. इसमें संशय नहीं कि आज का समाज उन्‍नत है. विश्‍व के अनेक देशों के पास दुनिया को नष्‍ट कर देने के लिए बम और हथियार हैं. तकनीक और विज्ञान के चरम आविष्‍कार हैं. किन्‍तु आज भी जो चीजें मनुष्‍य की बुनियादी जरूरतों में आती हैं उनमें रोटी, कपड़ा और मकान के बाद मुनष्‍य की नैतिक और आध्‍यात्‍मिक उन्‍नति ही प्रमुख है. यह हो तो मनुष्‍य मनुष्‍य में प्रतिस्‍पर्धाएं खत्‍म हो जाएं. एक दूसरे को मारने मिटाने की कोशिशें खत्‍म हो जाएं, दूसरे के धन को हड़पने की लालसाएं खत्‍म हो जाएं. एक नया संतोषी समाज पैदा हो जाए. पर क्‍या ऐसा होना संभव है. तथापि हम गांधी के उच्‍चादर्शों को अपने जीवन का ध्‍येय तो बना ही सकते हैं.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)

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