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हिंदी अकादमी कवि सम्मेलन: 'जब फिसलने की तमन्ना हो जवां उन दिनों में भी संभलना सीखिये'

हिंदी अकादमी कवि सम्मेलन: 'जब फिसलने की तमन्ना हो जवां उन दिनों में भी संभलना सीखिये'

हिंदी अकादमी द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में देश के नामचीन कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं.

हिंदी अकादमी द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में देश के नामचीन कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं.

हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. इस महोत्सव में हिंदी अकादमी साहित्यिक सप्ताह का आयोजन कर रही है. साहित्यिक सप्ताह में राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत कवि सम्मेलन, विचार गोष्ठी, परिचर्चा और संगीत समारोह आयोजित किए जा रहे हैं.

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नई दिल्ली : हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कवि सम्मेलन में देश-विदेश के मंचों पर छाए रहने वाले कवियों ने रचना पाठ किया. दिल्ली के मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर में आयोजित कवि सम्मेलन में ओज, वीर रस, श्रृंगार और हास्य रस से ओत-प्रोत रचनाओं के माध्यम से कवियों ने देशप्रेम, भाईचारा और प्रकृति प्रेम का संदेश दिया.

कवि सम्मेलन का संचालन प्रख्यात हास्य कवि प्रवीण शुक्ल ने किया. सम्मेलन का आगाज आगरा से पधारी डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने सरस्वती वंदना ने किया. उन्होंने अपनी रचना के माध्यम से देश की सीमा पर गए एक सैनिक की पत्नी के संदेश को कुछ इस तरह पेश किया-

लाल महावर लगे मेरे इन पांवों की चिंता मत करना
सीमा पर जागते रहना तुम गांव की चिंता मत करना
ठिठुरन हो या कड़ी धूप हो छांव की चिंता मत करना
लगी युद्ध में चोट अगर तो घाव की चिंता मत करना।

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प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी.

ओज के प्रसिद्ध कवि विनय विनम्र ने अपनी रचना के माध्यम से देश की आजादी में प्राण न्यौछावर करने वाले वीरों को नमन किया.

जिन धीर वीरों ने स्वतंत्रता दिलाई हमें
उनका बखान आठों याम करते हैं हम
ओज पूर्ण कविता बनाके वीर रस घोल
उनका प्रचार ग्राम-ग्राम करते हैं हम
देश हित जिन ललनाओं ने सुहाग दिए
नित्य अविराम गुणगान करते हैं हम
गांधीजी, सुभाष, चंद्रशेखर, भगत सिंह
सकल शहीदों को प्रणाम करते हैं हम।

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कवि विनय विनम्र अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते हुए.

कवि विनय विनम्र की रचना खूब सराही गई-

कोई निज राष्ट्र हित हंसकर के फांसी झूल जाता है,
कोई झूठी प्रशंसा पा खुशी से फूल जाता है।
कोई हरिश्चन्द्र,भामाशाह बन सब कुछ लुटा देता,
कोई धन के लिए संबंध सारे भूल जाता है।

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काव्य पाठ करते गीतकार गुनवीर राणा.

प्रसिद्ध गीतकार गुनवीर राणा ने भारत की शान में कलमकारों के योगदार का उल्लेख करते अपनी रचना पढ़ी-

नाज़ हम आपके सरकार उठा सकते हैं
एक-दो बार क्या सौ बार उठा सकते हैं
वाअदब हैं मगर बुजदिल न समझना हमको
हम कलम छोड़ के तलवार उठा सकते हैं।

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कवि शहनाज़ हिन्दुस्तानी

वीर रस के कवि शहनाज हिन्दुस्तानी ने अपनी रचनाओं से पूरे वातावरण में उत्साह का संचार किया. उन्होंने शहीद सैनिक की पत्नी के त्याग और नाज़ को कुछ इस तरह प्रस्तुत किया-

नाज़ मुझे खुद पर हो रहा है आज पिया
मेरा ये सिंदूर भारती के काम आया है
पिता की चिता को आग भाई-बेटे देते आए
पर ये सम्मान आज पत्नी ने पाया है
आपका ये बलिदान आज बान और शान
मेरी कोख के लिए सबक बन आया है
सात महीने का गर्भ झूम-झूम कह रहा
आज मेरे पापा ने तिरंगा लहराया है।

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कवि महेश गर्ग बेधड़क

बीते कई दशकों से मंचों पर हास्य और व्यंग्य के माध्यम से विशेष छाप छोड़ने वाले हास्य कवि महेश गर्ग ‘बेधड़क’ ने समाज की विसंगतियों पर तीखे व्यंग्य चलाए. उन्होंने मजदूर और शोषित वर्ग की पीड़ा को अपने शब्दों में कुछ इस तरह बयां किया-

क्या-क्या जुगत करते हैं ये मजदूर जीने के लिए
खून को ईंधन बनाते हैं पसीने के लिए
ये उजाले के लिए दीए बनाते रह गए
बातियां हुशियार थीं सब तेल पीने के लिए।

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कवि राजेश कुमार अग्रवाल

राजेश अग्रवाल ने अपनी रचना के माध्यम से एकता और भाईचारे का संदेश दिया-

जहां पर राम की खुशियों में खुश रहमान रहता है
जुड़ा जड़ और मिट्टी से यहां इन्सान रहता है
यहां ना धर्म का बन्धन ना भाषाओं की है सीमा
यहां सबके दिलों में एक हिन्दुस्तान रहता है।

हास्य कवि सुनहरी लाल ‘तुरंत’ ने रस परिवर्तन करते हुए अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खुब हंसाया और गुदगुदाया.

किसी वजह से आपके, पिचक गए हैं गाल
बर्र-ततैया छेड़ दो, फूल जाएं तत्काल।

सुनहरी लाल ‘तुरंत’ अपनी खूबियां का बखान करते हुए खूब तालियां बटोरीं-

हम भी कुछ रंग जमाने का हुनर रखते हैं
और रंग पे रंग चढ़ाने का हुनर रखते हैं
किसी का रंग चढ़ रहा हो किसी के ऊपर
तो रंग में भंग में मिलाने का हुनर रखते हैं।

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रचना पाठ करते हास्य कवि दीपक गुप्ता.

कवि दीपक गुप्ता ने अपने शेरों के माध्यम से खूब वाह-वाही बटोरी-

हमें भी फख्र होता है कफ़न भी नाज़ करता है
वतन पर जां-निसारी जब कोई जाबाज़ करता है।

यहां पर जो भी मिलता है हमारा दिल जलाता है
मिले कोई तो ऐसा भी जो रोशन जिंदगी कर दे।

डॉ. कीर्ति काले ने कई रंगों की रचनाएं प्रस्तुत करने वातारण को विभिन्न आयामों से सराबोर किया-

कीर्ति काले ने हास्य की बौछार करते हुए कहा कि वे हास्य से प्रेम करने वालों के लिए प्रेम में हास्य लेकर आई हैं-

समर्पित भावनाओं का सदा उपहास करते हैं
यूज एंड थ्रो की थ्योरी में अधिक विश्वास करते हैं
नए इस दौर के इन मजनुओं से दूर ही रहना
मुहब्बत ये नहीं करते ये टाइम पास करते हैं।

इनके प्यार करने के नियम भी हार्ड होते हैं
इनके दिल के दरवाजे पर अक्सर गार्ड होते हैं
उन्हीं से दिल लगाती हैं, उन्हीं पे जान लुटाती हैं
जिनकी जेब में दस-बीस क्रेडिट कार्ड होते हैं।

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काव्य पाठ करतीं डॉ. कीर्ति काले.

कीर्ति काले ने श्रोताओं में ऊर्जा का संचार करते हुए देश प्रेम से ओत-प्रोत रचना प्रस्तुत की-

सीमा पर दुश्मन की गोली ने ललकारा है
क्या सिंहों का देश कभी चूहों से हारा है।

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प्रसिद्ध गज़लकार नित्यानंद तुषार.

मशहूर गज़लकार नित्यानंद तुषार ने अलग ही अंदाज में रचनाएं पेश कर माहौल को अलग ही रंग दिया-

मुश्किलों से भी निकलना सीखिये
जगमगाना है तो जलना सीखिये
इस ज़माने को बदलना छोड़िये
हो सक तो खुद बदलना सीखिये
जब फिसलने की तमन्ना हो जवां
उन दिनों में भी संभलना सीखिये।

दुनियाभर में अपनी रचनाओं का डंका मनवाने वाले मशहूर हास्य व्यंग्यकार प्रवीण शुक्ल ने कार्यक्रम संचालन के बाद कीर्ति काले के आमंत्रण पर काव्य पाठ किया.

समय था वह भी जब हर ओर अच्छे लोग रहते थे
जलन-नफरत-घुटन से दूर ऐसे लोग रहते थे
यहां महलों में भी पसरा है अब तो झूठ का साया
कभी कच्चे मकानों में भी सच्चे लोग रहते थे।

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प्रसिद्ध हास्य कवि और व्यंग्यकार डॉ. प्रवीण शुक्ल.

विपरीत परिस्थितियों में चलने वालों की ही जीत होती है, इस संदेश के साथ प्रवीण शुक्ल ये रचना पेश की-

मैं हूं वो दीप जिसे आंधियां जलाएंगी
खुद आफतें ही मुझे रास्ता दिखाएंगी
मुझे यकीन हैं डूबा जो मैं समंदर में
तो लहरें बनके सफीना किनारे लाएंगी।

माहौल में देश भक्ति का रंग घोलते हुए प्रवीण शुक्ल ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्र प्रेम का आह्वान किया-

आन, मान सम्मान मिटे, एक-एक अरमान मिटे
जिस भूमि पर जन्म लिया है, उस पर ही ये जान मिटे
अगर जरूरत पड़े देश को लाख बार मिट जाऊ मैं
मगर धरा से नहीं कभी मेरा हिन्दुस्तान मिटे।

हिंदी अकादमी, दिल्ली के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने आयोजन के संबंध में बताया कि देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. इस अवसर पर दिल्ली सरकार ने एक सप्ताह तक साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन किया है. साहित्य की तमाम विधाओं के माध्यम से राष्ट्र की उन्नति का बखान किया जाएगा और आजादी दिलाने वाले वीरों का स्मरण किया जा रहा है.

डॉ. जीतराम भट्ट ने कहा कि कवि सम्मेलन, विचार गोष्ठी, संगीतमय प्रस्तुतियों के माध्यम से दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर लगातार सात दिन तक अलग-अलग आयोजन किए जा रहे हैं.

उप-सचिव ऋषि कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि काव्य ही एक ऐसी विधा है जो श्रोताओं पर सीधा प्रभाव डालती है. उन्होंने कहा कि कविताओं के माध्यम से कम तथा सरल शब्दों से जीवन का पूरा संदेश दिया जाता है जो श्रोता पर लंबे समय तक अंकित रहता है.

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कार्यक्रम में हिंदी अकादमी कार्यकारिणी सदस्य मृदुल अवस्थी, डॉ. क्षेत्रपाल शर्मा, पिंकी तिवारी और श्रीराम शर्मा ने कवियों को पुष्प प्रदान करने का स्वागत और सम्मान किया.

हिंदी कवि सम्मेलन से पहले इसी स्थान पर गढ़वाली, कुमाउनी एवं जौनसारी अकादमी, दिल्ली द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में गढ़वाल के प्रसिद्ध कवि ओम प्रकाश आर्य, कुसुमलता पुनडोरा, खजान दत्त शर्मा, रमेश हितेषी, रामेश्वरी नेगी नादान और वीरेंद्र जुयाल ने स्थानीय भाषा-बोली में विभिन्न रसों की रचनाओं का पाठ किया.

Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature, Poem

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