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हिन्दी के प्रयोग के लिए व्यक्तिगत आग्रह आवश्यक है- चित्रा मुद्गल

हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत 'हिन्दी की यात्रा' पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत 'हिन्दी की यात्रा' पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुद्गल ने कहा कि विश्व को इस बात के लिए तैयार हो जाना चाहिए कि जो भाषा पूरी वैश्विक भाषा को पिछाड़ती हुई जो आगे आएगी वो भाषा है हिन्दी.

  • News18Hindi
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    हिंदी अकादमी, दिल्ली (Hindi Academy Delhi) द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी पखवाड़े के तहत 75 वर्षों में हिन्दी की यात्रा पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी में अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट (Jeetram Bhatt) ने कहा कि हिन्दी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास आवश्यक हैं, इसी कड़ी में हिन्दी अकादमी ने पखवाड़ा का आयोजन किया.

    संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुद्गल (Chitra Mudgal) ने की. मुख्य वक्ता के रूप में दूरदर्शन में सलाहकार अमरनाथ अमर ने भाग लिया. कार्यक्रम में प्रसिद्ध गीतकार और गायक जितेन्द्र सिंह द्वारा सांस्कृति प्रस्तुति की की गई.

    वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुद्गल ने कहा कि विश्व को इस बात के लिए तैयार हो जाना चाहिए कि जो भाषा पूरी वैश्विक भाषा को पिछाड़ती हुई जो आगे आएगी वो भाषा है हिन्दी. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर हिंदी वर्चस्व लगातार बढ़ता जा रहा है.

    चित्रा मुद्गल ने कहा कि भले ही हिंदी पखवाड़े का समापन हो गया हो, लेकिन समापन से ही नवीन संरचना का अंकुरण होता है.

    डॉ. अमरनाथ अमर ने कहा कि आज विदेशों में हिन्दी का जो प्रचार-प्रसार बहुत बढ़ा है. हिन्दी विश्व के बहुत सारे देशों में सीखी और बोली जा रही है यह एक सुखद पक्ष है. हिन्दी ने अपना स्वरूप निर्धारित किया है और अपना स्वरूप बदला भी है और वह पुष्पवित पल्लवित होती चली गई.

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    उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार में हिंदी फिल्मों और गीतों का बहुत योगदान रहा है. हिंदी के विकास में पत्र-पत्रिकाओं ने भी योगदान दिया. देश में हिन्दी अकादमियों और साहित्य अकादमी ने, दूरदर्शन ने भी अपनी योजनानुसार हिन्दी का प्रचार-प्रसार किया. परन्तु विदेशी चैनलों के आने से हिन्दी भाषा पर प्रभाव पड़ा. हिन्दी में उच्चारण आदि सही न होने से हिन्दी की स्थिति भी गिरने लगी. सोशल मीडिया में हिन्दी लेखन में भी गिरावट आई और हिन्दी में अंग्रेजी भाषा का भी समावेश हुआ.

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    हिंदी अकादमी, दिल्ली के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने कहा कि संचार क्रांति के युग में हिंदी का प्रचार-प्रसार बहुत तेजी से हुआ है. तकनीक के युग में कुछ समय पहले तक हिंदी भाषा में कार्य करने वाले लोगों को अंग्रेजी का अनुसरण करना होता था, लेकिन अब अंग्रेजी वाले हिंदी का अनुसरण कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि तमाम अंग्रेजी चैनेलों ने हिंदी में भी समाचार प्रस्तुत करना शुरू कर दिए हैं. इतना ही नहीं दुनिया में हिंदी भाषी लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

    अकादमी के उप-सचिव ऋषि कुमार शर्मा (Rishi Kumar Sharma) ने कहा कि हिन्दी राष्ट्र को सम्मान के साथ जोड़ते हुए हमें आधुनिक तकनीकी और हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं के माध्यम से विश्व हिन्दी का प्रचार-प्रसार करना होगा. हिन्दी की वर्णावली/शब्दावली को सरलीकरण की ओर ले जाना होगा.

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