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साहित्य संसार: गान्धर्व संगीत महाविद्यालय में बही काव्य गंगा

साहित्य संसार: गान्धर्व संगीत महाविद्यालय में बही काव्य गंगा

गान्धर्व संगीत महाविद्यालय तथा साहित्यिक संस्था 'काव्य कलश' के संयुक्त तत्वावधान काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया.

गान्धर्व संगीत महाविद्यालय तथा साहित्यिक संस्था 'काव्य कलश' के संयुक्त तत्वावधान काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया.

    गाजियाबाद में गान्धर्व संगीत महाविद्यालय तथा साहित्यिक संस्था ‘काव्य कलश’ के संयुक्त तत्वावधान काव्य गोष्ठी और साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.

    इस अवसर पर पत्रकार राज कौशिक एवं हिन्दी अकादमी के उप-सचिव ऋषि कुमार शर्मा को उनके पत्रकारिता, साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया.

    उप-सचिव ऋषि कुमार शर्मा ने अपने उदबोधन में कहा कि कवि समाज को आईना दिखाने का काम करता है. कवि अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में चेतना, जागरुकता और सजगता लाता है.

    पत्रकार राज कौशिक ने कहा कि एक पत्रकार और एक कवि समाज की दो आंखें हैं जो जैसा देखते हैं, सुनते हैं, पढ़ते हैं वैसा ही गुनते, बुनते और लिखते हैं.

    Ghaziabad

    सम्मान समारोह के बाद काव्य पाठ का आयोजन किया गया. पत्रकार एवं कवि राज कौशिक ने अपनी यह रचना सुनाई-
    मिला जो उससे मुझे युं वो घाव ज़्यादा था
    कि उससे मुझको भी थोड़ा लगाव ज़्यादा था
    मैं उन दिनों में ही ज़्यादा बिका हूं औरों से
    कि जिन दिनों मेरा औरों से भाव ज़्यादा था

    कवि डॉक्टर सतीश वर्द्धन ने अपनी यह रचना प्रस्तुत की-
    महके महके से गुलाबों में मिलूंगा तुमको।
    नींद आएगी तो ख्वाबों में मिलूंगा तुमको।।
    इतना मशहूर हुआ तुमसे मोहब्बत करके।
    मर गया मैं तो किताबों में मिलूंगा तुमको।।

    डॉक्टर तारा गुप्ता ने अपनी कविता में कहा-
    बड़े बदलाव की तैयारियों का यह जमाना है
    हमें तो प्रेम की मिट्टी से बस एक घर बनाना है
    यूं तिरछी आंख करने से निशाना चूक जाता है
    निगाहें सामने रखना अगर मकसद को पाना है.

    कवि अनिल बाजपेयी ने पढ़ा- पिता शब्द इतना बड़ा जैसे अम्बर व्योम। अनिल अनूठा मंत्र ये जैसे पावन ओम।।

    कवि सुनहरी लाल वर्मा ने अपनी रचना में हमेशा सकारात्मक सोच रखने का संदेश दिया-
    हम तो रोतों को घड़ीभर में हंसा लेते हैं
    जैसे मछुआरे मछलियों को फंसा लेते हैं
    कोई जलता है तो जलता रहे जलन लेकर
    हम जहन्नुम में भी जन्नत का मज़ा लेते हैं।

    कवि राज चैतन्य ने अपनी रचना में सनातन धर्म को कुछ इस तरह प्रस्तुत किया-
    प्यार को हम प्यार से प्यार का सिला देते हैं
    सर्वे भवन्तु सुखिनः में सारा जग मिला देते हैं
    जानते हैं ज़हर ही बनेगा, उनके कण्ठ में जाकर,
    मान देकर हम, नागों को भी दूध पिला देते हैं।

    कवि रामवीर आकाश ने पढ़ा-
    आज की रात सितारों को जगाये रखना
    अपनी पलकों पे मेरी याद बसाये रखना
    रात भर जाग के ढूंढा है सितारों में तुम्हें
    अपनी आंखों को पता मेरा बताये रखना।

    Tags: Hindi Literature

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