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प्रसिद्ध लेखक असगर वजाहत को उनके नाटक ‘महाबलि’ के लिए 31वां 'व्यास सम्मान'

प्रसिद्ध लेखक असगर वजाहत को उनके नाटक ‘महाबलि’ के लिए 31वां 'व्यास सम्मान'

व्यास सम्मान के लिए वजाहत (Asghar Wajahat) के नाटक 'महाबली' (Mahabali) को चुना गया है.

व्यास सम्मान के लिए वजाहत (Asghar Wajahat) के नाटक 'महाबली' (Mahabali) को चुना गया है.

असगर वजाहत को 2009-10 में हिंदी अकादमी, दिल्ली ने 'श्रेष्ठ नाटककार' के सम्मान से नवाज़ा था. उन्हें 2014 में नाट्य लेखन के लिए संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड और 2016 में दिल्ली हिंदी, अकादमी के सर्वोच्च शलाका सम्मान से भी सम्मानित किया गया था.

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    Vyas Samman 2021: वर्ष 2021 के व्यास सम्मान के लिए प्रख्यात लेखक असगर वजाहत (Asghar Wajahat) के नाटक ‘महाबली’ (Mahabali) को चुना गया है. यह पुस्तक 2019 में प्रकाशित हुई थी. 31वें व्यास सम्मान के लिए इस कृति का चयन प्रसिद्ध हिंदी विद्वान प्रोफेसर रामजी तिवारी की अध्यक्षता मे्ं संचालित एक चयन समिति ने किया है.

    उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में पांच जुलाई, 1946 में जन्मे असगर वजाहत दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग में प्रोफेसर रहे हैं. उनके अनेक उपन्यास, नाटक, निबंध, कहानी-संग्रह और यात्रा-वृतांत प्रकाशित हो चुके हैं.

    असगर वजाहत को 2009-10 में हिंदी अकादमी, दिल्ली ने ‘श्रेष्ठ नाटककार’ के सम्मान से नवाज़ा था. उन्हें 2014 में नाट्य लेखन के लिए संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड और 2016 में दिल्ली हिंदी, अकादमी के सर्वोच्च शलाका सम्मान से भी सम्मानित किया गया था.

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    असगर वजाहत का नाटक ‘महाबली’ बादशाह अकबर और कवि तुलसीदास को केंद्र में रखकर रचा गया है.

    केके बिरला फाउंडेशन (KK Birla Foundation) के निदेशक डॉ. सुरेश ऋतुपर्ण (Dr. Suresh Rituparna) ने बताया कि व्यास सम्मान सम्मान वर्ष से ठीक पहले 10 वर्ष की अवधि में प्रकाशित किसी भी भारतीय नागरिक की हिंदी की एक उत्कृष्ट साहित्यिक कृति को भेंट किया जाता है.

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    केके बिड़ला फाउंडेशन (KK Birla Foundation)
    केके बिड़ला फाउंडेशन की स्थापना सन् 1991 में कृष्णकुमार बिड़ला ने की थी. इसका उद्देश्य साहित्य और कलाओं के विकास को प्रोत्साहित करना है. इसके साथ ही यह शिक्षा एवं सामाजिक कार्य के क्षेत्र में भी काम करता है. इस फाउन्डेशन द्वारा कई पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं इनमें प्रमुख हैं-

    सरस्वती सम्मान (15 लाख रुपये) – किसी भी भारतीय भाषा में गद्य/पद्य रचना के लिए
    व्यास सम्मान (4 लाख रुपये) हिन्दी में गद्य/पद्य रचना के लिए
    बिहारी पुरस्कार ( 2.5 लाख रुपये) हिन्दी/राजस्थानी रचना के लिए (केवल राजस्थान के लेखक के लिए)
    शंकर पुरस्कार (1.5 लाख रुपये) – भारतीय दर्शन, संस्कृति, कला पर हिन्दीरचना के लिए (2008 से बंद)
    वाचस्पति पुरस्कार (1 लाख रुपये) संस्कृत में किसी भी रचना पर (2008 से बंद )
    घनश्यामदास बिड़ला पुरस्कार (1.5 लाख रुपये) – वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये

    व्यास सम्मान (Vyas Samman)
    डॉ. सुरेश ऋतुपर्ण ने बताया कि व्यास सम्मान (Vyas Samman) के तहत पुरस्कार के रूप में 4 लाख रुपए नकद, प्रशस्ति पत्र और स्मृत चिह्न प्रदान किए जाते हैं.

    पहली बार व्यास सम्मान 1991 में डॉ. रामविलास शर्मा (Ram Vilas Sharma) को उनके उपन्यास ‘भारत की प्राचीन परिवार और हिंदी’ के लिए प्रदान किया गया था.

    पिछले वर्ष 2020 के लिए 30वां व्यास सम्मान (Vyas Samman 2021) हिंदी के प्रसिद्ध लेखक प्रोफेसर शरद पगारे (Sharad Pagare) को प्रदान किया गया. प्रो. शरद पगारे को यह पुरस्कार इनके उपन्यास ‘पाटलिपुत्र की साम्राज्ञी’ के लिए प्रदान किया गया.

    जबकि 29वां व्यास सम्मान हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा (Nasira Sharma) उनके उपन्यास ‘कागज की नाव’ (Kaagaz Ki Nao) के लिए प्रदान किया गया था.

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