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जन्माष्टमी: पालने में विराजे लड्डू गोपाल, घर-घर में गूंजा 'जसोदा हरि पालनैं झुलावै'

जन्माष्टमी: पालने में विराजे लड्डू गोपाल, घर-घर में गूंजा 'जसोदा हरि पालनैं झुलावै'

 जन्माष्टमी का त्योहार न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी काफी धूम-धाम से मनाया जाता है.

जन्माष्टमी का त्योहार न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी काफी धूम-धाम से मनाया जाता है.

पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है. श्रद्धालु श्रीकृष्ण के रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं. देश के हर हिस्से में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जबरदस्त उत्साह है.

    Krishna Janmashtami 2022: समूचा भारत कान्हा के रंग में डूबा हुआ है. हर घर और मंदिरों में ‘जय कन्हैया लाल की’ का उदघोष गूंजायमान है. पालने सजकर तैयार हैं, मनोहारी छटा लिए लड्डू गोपाल पालनों में झूल रहे हैं. हाथों में पालने की डोर लिए हर माता बस यही गीत गुनगुना रही है-

    जसोदा हरि पालनैं झुलावै
    हलरावै, दुलरावै मल्हावै, जोइ-जोइ कछु गावै
    जसोदा हरि पालनैं झुलावै।

    मेरे लाल कौं आउ निंदरिया, काहैं न आनि सुवावै
    तू काहैं नहिं बेगहिं आवै, तोकौं कान्ह बुलावै
    जसोदा हरि पालनैं झुलावै।

    कबहुँ पलक हरि मूँदि लेत हैं, कबहुँ अधर फरकावै
    सोवत जानि मौन ह्वै कै रहि, करि-करि सैन बतावै
    जसोदा हरि पालनैं झुलावै।

    इहिं अंतर अकुलाइ उठे हरि, जसुमति मधुरैं गावै
    जो सुख सूर अमर-मुनि दुरलभ, सो नंद-भामिनि पावै
    जसोदा हरि पालनैं झुलावै।

    कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर पूरा भारत ब्रजमय बना हुआ है. महाकवि सूरदास ने बड़े ही सुंदर शब्दों में कृष्ण के बाल रूप का वर्णन किया है. सूरदास लिखते हैं- जसोदा हरि पालनैं झुलावै.

    यह भी पढ़ें- Janmashtami 2022: जन्माष्टमी पर पढ़ें हफ़ीज़ जालंधरी की नज़्म ‘कृष्ण कन्हैया’

    माता यशोदा अपने नन्हें कान्हा को पालने में झुला रही हैं. यहां सूरदासजी ने एक मां का अपने बच्चे के प्रति लाड-दुलार का बड़े ही अद्भुत शब्दों में वर्णन किया है. यशोदा कान्हा जी को पुचकारते हुए सुला रही हैं और निद्रा का आह्वान करते हुए कहती हैं- निद्रा, तू मेरे लाल के पास आकर उसे सुलाती क्यों नहीं है.

    भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत लीला के बारे में सुरदासजी कहते हैं- यह दुलर्भ क्षण है. जो सुख और क्षण देवी-देवता और बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों के लिए दुलर्भ है वही सुख नंद की पत्नी यशोदा प्राप्त कर रही हैं.

    Tags: Hindi Literature, Janmashtami, Literature

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