KLF Bhava Samvad: मर्म छूने वाली घटनाओं का विस्तार है 'एक देश बारह दुनिया'

KLF Bhava Samvad में 'एक देश बारह दुनिया' के लेखक शिरीष खरे से एनडीटीवी के रेसिडेंस एडिटर अनुराग द्वारी ने उनकी पुस्तक से जुड़े अनुभवों पर बातचीत की.

'एक देश बारह दुनिया' की पहली दुनिया है महाराष्ट्र का मेलघाट. 'वह कल मर गया' शीर्षक से लेखक ने ऐसी मार्मिक घटना को उजागर किया है, जो हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर सकती है.

  • Share this:
    'कलिंगा साहित्य महोत्सव' (Kalinga literary festival) द्वारा आयोजित ऑनलाइन 'भाव संवाद' (KLF Bhava Samvad) श्रृंखला की कड़ी में 'एक देश बारह दुनिया' (Ek Desh Barah Duniya) के लेखक शिरीष खरे (Shirish Khare) से एनडीटीवी के रेसिडेंस एडिटर अनुराग द्वारी (Anurag Dwary) ने उनकी पुस्तक 'एक देश बारह दुनिया' से जुड़े अनुभवों पर लंबी बातचीत की.

    शिरीष ने हाल ही में 'राजपाल एंड सन्स' (Rajpal and Sons) से प्रकाशित अपनी पुस्तक के बारे में बताया कि 'एक देश बारह दुनिया' उनके रिपोर्ट और आलेखों का संकलन नहीं है, बल्कि समाचारों से इतर इस देश की ऐसी बारह जगहों की गहन पड़ताल का ब्यौरा है, जिनमें गांवों से जुड़े मुद्दों को लंबे रिपोर्ताज की तर्ज पर अलग-अलग कहानियों की तरह बड़े इत्मीनान और सहजता के साथ नए सिरे से लिखा गया है. इन सच्ची कहानियों में असली घटनाएं और पात्र हैं, जिन्हें ज्यादातर जगहों पर उनके असल नामों के साथ ज्यों के त्यों विवरणों के साथ रखा गया है.

    लेखक से बातचीत कर रहे अनुराग द्वारी ने पुस्तक में से कई अंश पढ़ते हुए शिरीष से पूछा कि इस पुस्तक का फार्मेट क्या है. इस बारे में शिरीष ने बताया कि पुस्तक में कहीं यात्रा-वृत्तांत, कहीं संस्मरण तो कहीं डायरी जैसी साहित्यिक विधाओं का भी प्रयोग किया गया है. लेकिन, यह सारी विधाएं आखिरकार होती कहानियां ही हैं तो इन्हें ऐसी कहानियों के रुप में समझा जाए जो पिछले एक-डेढ़ दशक में भारतीय गांवों, जिनमें हिंदी, मराठी, गुजराती, कन्नड़, छत्तीसगढ़ी, बुंदेलखंडी, राजस्थान के थार और जनजातीय बोलियों से जुड़े लोगों की व्यथा है.

    शिरीष खरे अपनी ग्रामीण पत्रकारिता से जुड़ी चुनौतियों को साझा करते हुए कहते हैं, "इसमें रिपोर्टिंग के दौरान जुड़ी उन घटनाओं को विस्तार दिया गया है, जो रिपोर्टिंग में शामिल नहीं हो सकती थीं, लेकिन जिनके बारे में कहना बहुत जरूरी था, इसलिए कुछ वर्षों के दौरान अपनी पत्रकारिता से संबंधित बारह जगहों को चुना और रिपोर्टिंग के दौरान के तजुर्बों को इस तरह बुना, जिसमें कोई व्यक्ति अपनी कहानी कहते हुए कई रोचक आयामों की तरफ ध्यान खींचता है, ज्यादातर जगहों पर ऐसे व्यक्ति हमें भावुक कर देते हैं."

    यह भी पढ़ें- गांधी के आखिरी आदमी की खरी आवाज़ है "एक देश बारह दुनिया"

    इन दोनों पत्रकारों के बीच हुए इस आपसी संवाद में पुस्तक के बहाने यह बात भी स्पष्ट तरीके से सामने आई कि देश के विभिन्न स्थानों पर कई बातें एकसमान और सामान्य दिखने के बावजूद जब उनकी कहानियां लिखी जाती हैं तो क्यों स्थान विशेष के संदर्भ के अनुसार उसकी दुनिया बदल जाती है .फिर कहीं मुद्दे, कहीं लोगों के जन-जीवन तो कहीं उनकी चुनौतियों और संघर्षों को लेकर एक देश के भीतर ही कई तरह की दुनियाएं नजर आती हैं.

    उदाहरण के लिए, भूख को लेकर ही यदि कोई समाचार आधारित कहानी लिखनी है तो महाराष्ट्र में विदर्भ अंचल की मेलघाट पहाड़ियां हमें कुपोषण की समस्या की जड़ों की तरफ ले जाती हैं, जहां खासकर पिछले पांच दशकों में जंगलों से आदिवासियों को नागपुर और मुंबई जैसे शहरों की तरफ पलायन करने के लिए मजबूर किया गया है. इस तरह, व्यवस्थागत तरीके से जंगल से आदिवासियों के जुड़ाव तथा अधिकारों को समाप्त करके एक आत्मनिर्भर समाज को शहरी लोगों का मोहताज बना दिया गया है.

    कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल भाव संवाद (KLF Bhava Samvad)
    'कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल' के संस्थापक रश्मि रंजन परिदा (Rashmi Ranjan Parida) बताते हैं कि
    'केएलएफ भाव संवाद' महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान साहित्यिक गतिविधियों को बरकरार रखने के लिए शुरू किया गया था.

    'केएलएफ भाव संवाद' वर्चुअल माध्यम से साहित्यक गोष्ठियों का आयोजन करता है. भाव संवाद कार्यक्रमों में दिग्गज साहित्यकार, कलाकार, पत्रकारों को शामिल किया जाता है. इस मंच की लगातार बढ़ती साहित्यिक गतिविधियों को साहित्य प्रेमियों, लेखक और प्रकाशकों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.