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भाषाई विविधता को तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता है- धर्मेन्द्र प्रधान

भाषाई विविधता को तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता है- धर्मेन्द्र प्रधान

केंद्रीय हिंदी संस्थान का यह केंद्र पूर्वोत्तर भारत के सभी प्रदेशों के लिए हिंदी के प्रचार−प्रसार में मुख्य भूमिका का निवर्हन करेगा.

केंद्रीय हिंदी संस्थान का यह केंद्र पूर्वोत्तर भारत के सभी प्रदेशों के लिए हिंदी के प्रचार−प्रसार में मुख्य भूमिका का निवर्हन करेगा.

केंद्रीय हिंदी संस्थान के शिलांग केंद्र के नए भवन का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया है. तीन मंजिल भवन तथा अतिथि गृह के निर्माण के लिए मेघालय सरकार नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराई है. भवन के निर्माण पर 12 करोड़ रुपए की लागत आई है.

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    Hindi Sahitya News: हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं. इसी क्रम में मेघालय की राजधानी शिलांग में केंद्रीय हिंदी संस्थान के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया गया. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने हिंदी सस्थान के शिलांग केंद्र का उद्घाटन किया.

    इस अवसर पर धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि शिलांग में नए भवन के निर्माण से त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम राज्यों के हिंदी अध्यापकों को हिंदी सीखने में मदद मिलेगी. पूर्वोत्तर भारत की भाषाएं यहां की ताकत हैं. यहां एक सौ अस्सी से ज्यादा स्थानीय भाषाएं हैं तथा इसे विकसित करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है. इस भाषाई विविधता को तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता है जिससे बाहर के लोगों को यहां की जैविक विविधता की जानकारी मिल सके.

    मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में हिंदी भाषा के विकास पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. आज हम विदेशी भाषा सीखते हैं किन उससे अधिक हिंदी पर ध्यान देने की जरूरत है.

    उन्होंने हिंदी को रोजगार से जोड़ते हुए कहा कि भाषा संबंधी रुकावट को पार करना आवश्यक है. यह भाषा पूर्वोत्तर भारतीय युवाओं को हिंदी भाषा सीखने का एक अवसर प्रदान करेगा.

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    नई भाषा नीति का जिक्र करते हुए कॉनराड के. संगमा ने कहा कि यह नीति स्थानीय भाषा को बढ़ाने का कार्य करेगी तथा इससे पूर्वोत्तर राज्य की भाषाएं लाभान्वित होंगी. उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की भाषाओं पर भाषार्इ अनुसंधान किया जाना अत्यंत आवश्यक है. इसके साथ−साथ इन भाषाओं को तकनीक के स्तर पर जोड़ा जाना अत्यंत आवश्यक है.

    Kendriya Hindi Sansthan Shillong

    मेघालय के शिक्षा मंत्री लाक्मेन रिम्बुई ने कहा कि विभिन्न भाषाओं को जोड़ने में संस्थान की अहम भूमिका होगी तथा यहां की प्रांतीय भाषा को बल मिलेगा.

    संस्कृत के प्रकांड विद्वान और संस्कृत भारती के संस्थापक चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भाषा के विकास के लिए सात स्वरूप होते हैं, जिसमें भाषा को प्रशासन से जोड़ने, समकालीन साहित्य निर्माण, निरंतर शब्द निर्माण, तकनीक का उपयोग करना प्रमुख हैं. उन्होंने कहा कि यह केंद्र, भारत सरकार तथा मेघालय सरकार की अपेक्षा के अनुरूप कार्य करेगा.

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    हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष अनिल जोशी ने कहा कि केंद्रीय हिंदी संस्थान केवल हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए ही प्रतिबद्ध ही नहीं है वह भारत सरकार की नीतियों के अनुकरण में पूर्वोत्तर के समग्र विकास के लिए अपना योगदान देने के लिए तत्पर है. चाहे इस बहु उपयोगी भवन का निर्माण हो, पूर्वोत्तर में ज्ञान के प्रचार-प्रसार की विभिन्न गतिविधियां हो, स्थानीय भाषाओं के हिंदी के साथ अध्येता कोष हों, पुस्तके हों, पूर्वोत्तर में केंद्रों का निर्माण हो, स्थानीय विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की बात हो, पूर्वोत्तर की भाषाओं का भाषा वैज्ञानिक अध्ययन हो, पूर्वोत्तर में ज्ञान का विकास और भारतीय भाषाओं का उन्नयन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.

    Kendriya Hindi Sansthan Dharmendra Pradhan

    केंद्रीय हिंदी संस्थान की निदेशक प्रो. बीना शर्मा ने संस्थान का परिचय प्रस्तुत किया, जिसमें केंद्र की विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया.

    Kendriya Hindi Sansthan Anil Sharma

    उद्घाटन समारोह में पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रभा शंकर शुक्ल, इफ्लू शिलांग के निदेशक प्रो. रजनीश अरोड़ा, आईसीएसएसआर पूर्वोत्तर क्षेत्र के निदेशक प्रो. भागीरथी पांडा, पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जयनारायण नायक, शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव नीता प्रसाद, भारतीय होटल प्रबंधक के निदेशक श्री विजय जी, वीएसएफ के डीजी, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिकारी, प्रो. दिनेश कुमार चौबे, समाजसेवी पुष्पा बजाज की उपस्थिति रही. कार्यक्रम का संचालन अनुपम श्रीवास्तव ने किया.

    केंद्रीय हिंदी संस्थान
    केंद्रीय हिंदी संस्थान के शिलांग केंद्र का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया है. तीन मंजिल भवन तथा अतिथि गृह के निर्माण के लिए मेघालय सरकार नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराई है. भवन के निर्माण पर 12 करोड़ रुपए की लागत आई है. केंद्रीय हिंदी संस्थान का हिंदी भवन पूर्वोत्तर भारत के हिंदी शिक्षकों, हिंदी सेवियों, विद्यार्थी के लिए हिंदी में कार्य करने हेतु नर्इ आधार भूमि के रूप में कार्य करेगा. यह केंद्र पूर्वोत्तर भारत के सभी प्रदेशों के लिए हिंदी के प्रचार−प्रसार में मुख्य भूमिका का निवर्हन करेगा.

    Tags: Hindi Literature

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