KLF Bhava Samvad: हर दिन नया जादू रचने की संभावना से भरपूर है- बाबुषा कोहली

बाबुषा की नई किताब आई है 'भाप के घर में शीशे की लड़की'. रुख पब्लिकेशन ने इस किताब को प्रकाशित किया है.

Baabusha Kohli को उनके पहले काव्य संग्रह 'प्रेम गिलहरी, दिल अखरोट' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुस्कार से सम्मानित किया गया था.

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    KLF Bhava Samvad: जबलपुर की रहने वाली बाबुषा कोहली (Baabusha Kohli) को 2014 में उनके पहले काव्य संग्रह 'प्रेम गिलहरी, दिल अखरोट' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्होंने कम उम्र में ही लिखना शुरू कर दिया था. वे मुख्यत: कविताएं लिखती हैं और उनकी कविताओं के केंद्र में जीवन की बातें होती हैं.

    उनकी एक किताब 'बावन चिट्ठियां: ब्रह्मांड नाम के महाजन से शून्य का हिसाब है प्रेम' रजा फाउंडेशन के सहयोग से राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित की है.

    हाल ही में बाबुषा की नई किताब आई है 'भाप के घर में शीशे की लड़की' (Bhap Ke Ghar Mein Shishe Ki Ladki). रुख पब्लिकेशन (Rukh Publication) ने इस किताब को प्रकाशित किया है.

    कलिंग साहित्य उत्सव (Kalinga Literary Festival) के ऑनलाइन कार्यक्रम भाव संवाद (Bhava Samvad) में बाबुषा की नई किताब पर विस्तार से चर्चा की गई. बाबुसा से उनकी किताब पर चर्चा की सुपरिचित लेखिका प्रतिभा कटियार ने.

    बाबुषा कहती हैं कि यह किताब पिछले डेढ-दो सालों के भीतर लिखी डायरियों का संकलन है. वह कहती हैं, मेरे लिए भाप का घर पूरा संसार है. भाप एक पल में उड़ जाती है, ऐसा ही संसार है, क्षण-भंगुर है. पल में ही घटनाएं बनती हैं और खत्म हो जाती हैं.

    Bhap Ke Ghar Mein Shishe Ki Ladki

    'भाप के घर में शीशे की लड़की' किताब में कक्षा का जादू की जिक्र किया गया है. चूंकि बाबुषा पेशे से शिक्षक हैं. अध्यापन कार्य पर वह कहती हैं, 'शिक्षक होना असल में विद्यार्थी होना है. पेशे से शिक्षक हो जाने का अर्थ शिक्षक हो जाना नहीं है. को लर्नर की भूमिका को अपनाते हुए जब शिक्षक बच्चों के साथ जुड़ने की प्रक्रिया पर काम करते हैं तब बच्चों का सीखना आसान होने लगता है. शिक्षक होना एक जिम्मेदारी का काम है क्योंकि शिक्षक पूरी पीढ़ी से संवाद में रहते हैं. और इसके लिए शिक्षकों को अपने भीतर जाकर खुद को भी टटोलना होगा. कि कहीं अनजाने बावजूद तमाम सदिच्छा के बच्चों तक कुछ गड़बड़ न सम्प्रेषित हो जाए.'

    उन्होंने इस पुस्तक का अंश भी पढ़कर सुनाया- 'क्लास में हर दिन जादू नहीं होता. पर हो जाता है किसी दिन तब बच्चों की आंखों के सितारे जगमगाते हैं, दीवारें सांस लेती हैं, खिड़की के ऊपर आले में घोसला बना चुकी चिड़िया पंख फड़फड़ाती है. उसके पंखों की फड़-फड़ एक एक बच्चे के कान तक पहुंचती है.'

    बातचीत में उन्होंने देश-दुनिया समाज के तमाम मुद्दों पर बात करते हुए कहा कि वे स्वप्नदृष्टा हैं और एक ऐसे समाज का सपना देखती हैं जहां किसी को किसी से ईर्ष्या द्वेष न हो, प्रेम हो सद्भाव हो. उन्होंने कहा कि उनकी बात किसी यूटोपिया सी लग सकती है लेकिन वे सचमुच ऐसे समाज का ही सपना देखती हैं जो उनके लिखे में नजर आता है.

    राजनीतिक पक्षधरता के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे मनुष्यता की तरह हैं. उन्होंने अपने जाने-पहचाने अमूर्त और रूमानी लहजे में कहा कि 'मैं पानी की तरफ हूं पानी जो सबकी तरफ है.' उन्होंने अपने जवाब में तमाम वादों के पार जाकर मैं जिस दुनिया का सपना देखती हूं वहां किसी भी वाद की कोई दीवार नहीं है.

    'भीड़ सूचना को पहचानती है, निर्देश को, आदेश को पहचानती है. भीड़ विवेक से अनभिज्ञ है.' तो ऐसे में लोकतंत्र, देश और समाज के बारे में क्या कहा जाय? आखिर लोग भीड़ कब और कैसे बन जाते हैं और कैसे इसे रोका जा सकता है, के सवाल पर बाबुषा ने कहा कि यह तभी संभव होगा जब लोग अपने भीतर की यात्रा पर निकलेंगे, खुद से सवाल करेंगे, सोचना शुरू करेंगे तब यो आदेश और निर्देश को नहीं तर्क से चीज़ों को देख पायेंगे. यह आसान नहीं होगा लेकिन इसकी शुरुआत का सिरा स्कूलों से शिक्षा से सीधे तरह से जुड़ता है.

    भाव संवाद की इस श्रृंखला में बातचीत करते हुए उन्होंने अपने सुनने वालों के सवालों के जवाब भी दिए. एक सवाल कि 'निजी जीवन और अनुभवों का लेखन में कितना प्रभाव पड़ता है' के जवाब में बाबुषा ने कहा कि असल जीवन और लेखन दो अलग चीज़ें हैं ही नहीं. अगर कोई भी लेखक अपने लिखे में ईमानदार है तो निश्चित तौर पर उसके लिखे में वह दिखेगा ही.

    कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल भाव संवाद (KLF: Bhava Samvad)
    'कलिंगा लिटरेरी फेस्टिवल' के संस्थापक रश्मि रंजन परिदा (Rashmi Ranjan Parida) बताते हैं कि
    'केएलएफ भाव संवाद' महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान साहित्यिक गतिविधियों को बरकरार रखने के लिए शुरू किया गया था. 'केएलएफ भाव संवाद' वर्चुअल माध्यम से साहित्यक गोष्ठियों का आयोजन करता है. भाव संवाद कार्यक्रमों में दिग्गज साहित्यकार, कलाकार, पत्रकारों को शामिल किया जाता है. इस मंच की लगातार बढ़ती साहित्यिक गतिविधियों को साहित्य प्रेमियों, लेखक और प्रकाशकों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है.

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