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Lucknow Book Fair: भारत का इतिहास हमेशा ज्ञान का सोपान रहा है- हृदय नारायण दीक्षित

ह्रदय नारायण दीक्षित राजनेता होने के साथ-साथ पत्रकार, साहित्यकार और स्तंभकार भी हैं.

ह्रदय नारायण दीक्षित राजनेता होने के साथ-साथ पत्रकार, साहित्यकार और स्तंभकार भी हैं.

लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में कवि सम्मेलन, मुशायरा जैसे सास्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

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    lucknow Pustak Mela: लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला (National Book Fair) पुस्तक प्रेमियों, लेखकों और कलाकारों से गुलजार है. मेले में लेखकों की पुस्तकों का लोकार्पण हो रहा है. पुस्तकों के स्टॉलों पर पुस्तक प्रेमियों की खासी भीड़ देखने को मिल रही है.

    पुस्तक मेले में आज उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष ह्रदयनारायण दीक्षित (Hriday Narayan Dikshit) की उपस्थिति रही.

    वाणी प्रकाशन (Vani Prakashan) के स्टॉल पर ह्रदयनारायण दीक्षित ने पुस्तकों का जायजा लिया. ह्रदय नारायण दीक्षित राजनेता होने के साथ-साथ पत्रकार, साहित्यकार और स्तंभकार भी हैं. उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. पुस्तक मेले में वाणी प्रकाशन ने उनकी पुस्तकों पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया.

    संगोष्ठी में हृदय नारायण दीक्षित की पुस्तकें (Hriday Narayan Dikshit Books) ‘ज्ञान का ज्ञान’, ‘अथर्ववेद का मधु’ और ‘ऋग्वेद: परिचय’ पर परिचर्चा हुई. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वामपंथी विचारधारा के बौद्धिकजनों ने भारत के इतिहास को अंधकार काल की उपमा दी है. सत्य यह है कि इस देश का इतिहास, हमेशा ज्ञान का सोपान रहा है.

    lucknow pustak mela

    ह्रदय नारायण दीक्षित ने कहा कि युवा शक्ति को ‘अथर्ववेद के मधु’ को अपने जीवन में जोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा किऋगवेद में सबसे पहले मधु शब्द आया. मधु को गुप्त विद्या समझा जाता था, पर वेदों में रहस्य नहीं है.

    उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि ह्दय नारायण जी का साहित्य संसार भारत के हर क्षेत्र में हर छात्र के पास पहुंचना अनिवार्य है ताकि इतिहासबोध के साथ सामाजिक दायित्व की ओर युवा उन्मुख हो सकें.

    National Book Fair

    वाणी प्रकाशन की प्रमुख अदिति माहेश्वरी (Aditi Maheshwari) ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय बुक रिव्यू ट्रस्ट ने उनसे ‘ज्ञान का ज्ञान’ पर आलोचनात्मक टिप्पणी की पेशकश की. यह रिव्यु ऑनलाइन सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले आलेखों में शामिल है. इस पुस्तक को वाओ लिटरेरी पुरस्कार भी प्राप्त है. उन्होंने कहा कि वाणी प्रकाशन ग्रुप भविष्य में भी दीक्षितजी सभी पुस्तकें प्रकाशित करेगा.

    संगोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ओम प्रकाश पांडेय, सर्वेश अस्थाना, अंशुमन द्विवेदी और वीरेंद्र सारंग ने भी अपने विचार व्यक्त किए. इस अवसर पर विशेष रूप से पधारे प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी भी मौजूद थे.

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