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दुष्यंत कुमार, पाश और अदम गोंडवी की रचनाओं ने प्रभावित किया है- मनीष सिसोदिया

दुष्यंत कुमार, पाश और अदम गोंडवी की रचनाओं ने प्रभावित किया है- मनीष सिसोदिया

मनीष सिसोदिया की पुस्तक 'शिक्षा: दिल्ली के स्कूलों में मेरे कुछ अभिनव प्रयोग' काफी चर्चित रही है.

मनीष सिसोदिया की पुस्तक 'शिक्षा: दिल्ली के स्कूलों में मेरे कुछ अभिनव प्रयोग' काफी चर्चित रही है.

Manish Sisodia कहते हैं कि शब्दों का असर होता है. हम मनुष्यों की यही खासियत होती है कि हम शब्दों का अर्थ खोजने लगते हैं. शब्दों के अर्थ की खोज की यही यात्रा हमें अन्य जीवों यहां तक कि एक इनसान से दूसरे इनसान को अलग बनाती है.

    Manish Sisodia News: दिल्ली की शिक्षा नीति को देश और दुनिया में एक पहचान दिलाने वाले दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया खुद भी एक लेखक और पत्रकार हैं. मनीष सिसोदिया अपने व्यस्त समय में भी पढ़ने के लिए समय निकाल ही लेते हैं.

    हिंदी अकादमी, दिल्ली (Hindi Akademi Delhi) के कार्यक्रम में अपने प्रिय रचनाकारों का उल्लेख करते हुए डिप्टी-सीएम मनीष सिसोदिया ने बताया कि दुष्यंत कुमार (Poet Dushyant kumar), अदम गोंडवी (Adam Gondvi) और अवतार सिंह संधू ‘पाश’ (Poet Pash) की रचनाओं ने उन्हें हमेशा प्रभावित किया है.

    मनीष कहते हैं कि इन रचनाकारों ने धारा के विपरीत व्यवस्था के खिलाफ अपनी कलम चलाई. इन्होंने थोड़ा लिखा, लेकिन जो लिखा वह अमर हो गया.

    अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब वह राजनीति में जमीन तैयार कर रहे थे तो उनके दिमाग में हमेशा अदम गोंडवी ये लाइनें गूंजती रहतीं-

    काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में
    उतरा है रामराज विधायक निवास में

    पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत
    इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में

    आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह
    जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में

    पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें
    संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में

    जनता के पास एक ही चारा है बगावत
    यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में

    मनीष सिसोदिया (Delhi D) बताते हैं कि राजनीति में आन पहले ही उन्होंने तय कर लिया था कि राजनीति की इस परिभाषा को बदलना है. धारा के विपरीत बहकर राजनीति की एक नई इबारत लिखना है.

    हर दौर में सत्ता और सिस्टम को चुनौती देती रहेंगी अदम गोंडवी की रचनाएं

    हिंदी अकादमी, दिल्ली के अध्यक्ष मनीष बताते हैं कि अदम गोंडवी की कलम ने राजनीति की उस सच्चाई को आम लोगों के सामने लाने का काम किया, जो कल्फ लगी खादी और वीआईपी कल्चर की ऊंची दीवारों के पीछे छिपी थी. आम आदमी के हिस्से में बस आश्वासन आते थे. इस व्यवस्था पर गोंडवी ने बिना किसी डर के अपनी कलम चलाई-

    तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है
    मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है

    उधर जम्हूरियत का ढोल पीते जा रहे हैं वो
    इधर परदे के पीछे बर्बरीयत है, नवाबी है

    लगी है होड़ – सी देखो अमीरी औ गरीबी में
    ये गांधीवाद के ढाँचे की बुनियादी खराबी है

    तुम्हारी मेज़ चांदी की तुम्हारे जाम सोने के
    यहां जुम्मन के घर में आज भी फूटी रक़ाबी है

    मनीष सिसोदिया कहते हैं कि दुष्यंत कुमार के बाद अदम गोंडवी (Adam Gondvi) ऐसे जन कवि रहे हैं, जिन्होंने जनता से सीधा संवाद स्थापित किया. अपनी रचनाओं के माध्यम से एक खास व्यस्था पर वार किया. ये लोग अन्याय और शोषण के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे.

    गरीब आदमी पर अत्याचार, भ्रष्टाचार, सत्ता द्वारा आम आदमी का शोषण आदि पर इन रचनाकारों के खूब लिखा.

    दुष्यंत कुमार को याद करते हुए मनीष बताते हैं कि दुष्यंत की रचनाओं में आम आदमी का दर्द छलकता है. केवल एक आदमी की दशा देखकर पूरे मुल्क के हालात बयां करने की कूवत दुष्यंत में ही है-

    वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
    माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है.

    मनीष बताते हैं कि देश के हर घर में खुशहाली लाने की जिम्मेदारी शासन की होती है, लेकिन हमारी राजनीति व्यवस्था ऐसी रही है कि कोरे आश्वासनों पर नेता अपनी राजनीति चमकाते हैं, जबकि असल में आम आदमी का जीवन लगातार बद से बदतर होता जा रहा है. दुष्यंत (Dushyant kumar ki gazal) इस व्यवस्था पर गहरी चोट करते नज़र आते हैं-

    कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए
    कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए

    मनीष बताते हैं कि अवतार सिंह संधू ‘पाश’ (Avtar Singh Sandhu Pash) भी उनके प्रिय कवि हैं. वह कहते हैं कि जीवन में तमाम उतार-चढ़ाव आए लेकिन पाश की कविता को उन्होंने हमेशा एक ताबीज की तरह अपने दिल और दिमाग में रखा और कभी भी अपने सपनों को मरने नहीं दिया. सपनों को जिंदा रखने का जोश पाश की कविता से ही मिला-

    सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना
    तड़प का न होना
    सब कुछ सहन कर जाना
    घर से निकलना काम पर
    और काम से लौटकर घर आना
    सबसे ख़तरनाक होता है
    हमारे सपनों का मर जाना

    मनीष सिसोदिया कहते हैं कि आवाज़ और शब्दों का असर होता है. हम मनुष्यों की यही खासियत होती है कि हम शब्दों का अर्थ खोजने लगते हैं. शब्दों के अर्थ की खोज की यही यात्रा हमें अन्य जीवों यहां तक कि एक इनसान से दूसरे इनसान को अलग बनाती है.

    गद्य पर चर्चा करते हुए मनीष कहते हैं कि श्रीलाल शुक्ल (Shrilal Shukla) का रागदरबारी (Rag Darbari) उन्हें बहुत पसंद हैं और वह इसे कई बार पढ़ चुके हैं.

    बता दें कि मनीष सिसोदिया खुद एक अच्छे लेखक और पत्रकार रहे हैं. कुछ समय पहले दिल्ली की शिक्षा में किए प्रयोगों और उनके नतीजों पर उनकी पुस्तक ‘शिक्षा: दिल्ली के स्कूलों में मेरे कुछ अभिनव प्रयोग’ काफी चर्चित रही है.

    Tags: Hindi Literature, Manish sisodia

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