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कोरोनाकाल का आख्यान पेश करती किताबें ‘माया ने घुमायो’, ‘अमर देसवा’ और ‘पुद्दन कथा’ का लोकार्पण

कोरोनाकाल का आख्यान पेश करती किताबें ‘माया ने घुमायो’, ‘अमर देसवा’ और ‘पुद्दन कथा’ का लोकार्पण

‘अमर देसवा’, ‘पुद्दन कथा’ और ‘माया ने घुमायो’ (Maya Ne Gumayo) का प्रकाशन राधाकृष्ण प्रकाशन ने किया है.

‘अमर देसवा’, ‘पुद्दन कथा’ और ‘माया ने घुमायो’ (Maya Ne Gumayo) का प्रकाशन राधाकृष्ण प्रकाशन ने किया है.

युवा लेखक देवेश की पुस्तक 'पुद्दन कथा', चर्चित कथाकार प्रवीण कुमार की पुस्तक 'अमर देसवा' और वरिष्ठ साहित्यकार मृणाल पाण्डे (Mrinal Pandey) की पुस्तक 'माया ने घुमायो' का लोकार्पण किया गया.

    Hindi Literature News: अपने समय का आख्यान रचना बहुत कठिन काम है, क्योंकि बहुत करीब से उसके सभी पहलुओं को देख पाना आसान नहीं होता. लेकिन युवा लेखक देवेश, चर्चित कथाकार प्रवीण कुमार और वरिष्ठ साहित्यकार मृणाल पाण्डे (Mrinal Pandey) की नवीनतम किताबों से जाहिर है कि तीन पीढ़ियों के इन तीन लेखकों ने अपने समय को बेहद बारीकी से दर्ज किया है.

    ये बातें आलोचक अपूर्वानंद, राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा (Manoj Kumar Jha) और आलोचक संजीव कुमार सरीखे विद्वान वक्ताओं ने कहीं. वे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्स में राधाकृष्ण प्रकाशन (Radhakrishna Prakashan) के 55 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित विशेष लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे.

    इस समारोह में प्रवीण कुमार के पहले उपन्यास ‘अमर देसवा’, देवेश के पहले उपन्यास ‘पुद्दन कथा’ और और मृणाल पाण्डे के नवीनतम कहानी संग्रह ‘माया ने घुमायो’ (Maya Ne Gumayo) का लोकार्पण हुआ. तीनों किताबें राधाकृष्ण प्रकाशन ने प्रकाशित की हैं.

    Mrinal Pandey Books

    इस अवसर पर आलोचक संजीव कुमार (Alochak Sanjeev Kumar) ने कहा कि अलग-अलग पीढ़ी और अलग-अलग नजरिये के बावजूद इन तीनों लेखकों की सद्य प्रकाशित कृतियों में एक समानता है. वह यह कि तीनों किताबें कोरोना काल की उपज हैं. उनमें इस दौर को बारीकी से दर्ज किया गया है, मृणाल पांडेय की कहानियां लोककथाओं के ढांचे में वर्तमान की जटिलताओं को मारक ढंग से उजागर करती हैं, तो देवेश का उपन्यास कोरोना की आपदा के बहाने गांव गिरांव के अदेखे-कमदेखे यथार्थ को व्यक्त करता है. प्रवीण कुमार का उपन्यास अमर देसवा आम जनजीवन की अनेक कहानियों को समेटते हुए कोरोनाकाल का महाकाव्य होने की महत्वाकांक्षा लेकर चलता है.

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    वरिष्ठ आलोचक और स्तंभकार अपूर्वानंद (Apoorvanand) ने कहा कि तीनों लेखकों ने अपने समय के यथार्थ को उसके निहितार्थों के साथ पकड़ने की कोशिश की है. उन्होंने मृणाल पाण्डे के कहानी संग्रह का जिक्र करते हुए कहा कि लोककथाएं अतीत तक सीमित नहीं हैं, उनके भीतर आज का समय भी प्रवेश कर सकता है, जो मृणाल जी की किताब’ माया ने घुमायो’ (Maya Ne Gumayo) में बखूबी देखा जा सकता है. उन्होंने प्रवीण के उपन्यास ‘अमर देसवा’ के बारे में कहा कि लेखक ने एक ही उपन्यास में कई कहानियां समेटी हैं. उसने जिस युक्ति और कौशल से इस उपन्यास में नागरिकता और व्यवस्था की विवेचना की है वह गौरतलब है। यह लेखक की परिपक्वता को दर्शाता है.

    Mrinal Pandey

    राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा ने तीनों लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि ये तीनों किताबें लॉकडाउन से उपजी हुई अद्भुत रचनाएं हैं. ये अपने वक्त का जरूरी दस्तावेज हैं. इन रचनाओं के पीछे एक वेदना है जो व्यक्तिगत नही, सामूहिक है.

    तीनों वक्ताओं ने इस मौके पर राधाकृष्ण प्रकाशन (Radhakrishna Prakashan) को बधाई देते हुए कहा कि इसने अपने प्रकाशनों के जरिये कई पीढ़ियों को साहित्यिक शिक्षा प्रदान की है. उन्होंने उम्मीद जताई कि राधाकृष्ण आगे भी अपनी यह भूमिका निभाता रहेगा.

    इस अवसर पर तीनों लेखकों ने अपनी अपनी किताब से एक एक अंश पढ़ कर सुनाया.

    राधाकृष्ण प्रकाशन का 55 वर्ष का सफर (Radhakrishna Prakashan)
    समारोह के आरंभ में राधाकृष्ण प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने प्रकाशन के 55 वर्षों के सफर को याद करते हुए बताया कि 1965 में स्थापित राधाकृष्ण प्रकाशन ने कई भारतीय भाषाओं के लेखकों को हिंदी में प्रायः पहली बार प्रकाशित किया. राधाकृष्ण के जरिये ये सभी लेखक प्राय: पहली बार किसी दूसरी भाषा में आये. इसके बाद इनकी उपलब्धियों के बारे में बताने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा, मंगलेश डबराल, असद जैदी, उदय प्रकाश सरीखे आज के वरिष्ठ और विशिष्ट लेखकों की पहली-पहली पुस्तकें भी राधाकृष्ण ने प्रकाशित कीं. उन्होंने कहा कि 55 साल का यह शानदार सफर आगे भी ऐसा ही विविधरंगी बना रहे, हम इसका भरोसा दिलाते हैं.

    तीनों किताबों के बारे में
    वरिष्ठ लेखक मृणाल पांडेय की किताब ‘माया ने घुमायो’ उन कहानियों की समसामयिक प्रस्तुति है जो हमें वाचिक परंपरा से मिली हैं. ये कहानियां अपनी कल्पनाओं, अतिरंजनाओं और अपने पात्रों के साथ सुदूर अतीत से हमारे साथ हैं और मानव समाज, उसके मन-मस्तिष्क के साथ मनुष्य की महानताओं-निर्बलताओं का गहरा तथा सटीक अध्ययन करती रही है.

    दो चर्चित कहानी संग्रहों के बाद प्रवीण कुमार का यह पहला उपन्यास है- ‘अमर देसवा’ जो कोरोना में आम आदमी की बेबसी, दर्द और अकेलेपन के बीच सुलगते उबलते आक्रोश को आकार देता है.

    सोशल मीडिया पर #मेट्रोनामा के लिए चर्चित देवेश की पहली किताब ‘पुद्दन कथा: कोरोना काल में गांव-गिरांव’ कोरोना काल से जूझते एक गांव की मार्मिक और दिलचस्प कहानी है जो रुलाती भी है और गुदगुदाती भी है.

    Tags: Hindi Literature, Literature

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